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सुप्रीम कोर्ट का आदेश- 10 दिन में पूरी हो जांच, नागेश्वर राव नहीं लेंगे कोई बड़ा फैसला

एम. नागेश्वर और आलोक वर्मा

एम. नागेश्वर और आलोक वर्मा

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल एवं जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ वर्मा की याचिका पर सुनवाई की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 26, 2018, 2:15 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक आलोक वर्मा की अर्जी पर शुक्रवार को सीबीआई, केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और केंद्र सरकार से जवाब तलब किया. वर्मा ने खुद को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने और सारे अधिकार वापस लिए जाने के सरकार के फैसले को चुनौती दी है.

न्यायालय ने निर्देश दिया कि सीबीआई के अंतरिम निदेशक बनाए गए एम. नागेश्वर राव कोई नीतिगत फैसला नहीं करेंगे. बीते 23 अक्टूबर से अब तक राव की ओर से किए गए फैसलों पर अमल नहीं होगा और उनके सारे फैसले एक सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपे जाएंगे.

अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए. के. पटनायक सीबीआई अधिकारियों के बीच लग रहे आरोप-प्रत्यारोप की सीवीसी जांच की निगरानी करेंगे और दो हफ्ते के भीतर रिपोर्ट न्यायालय में सौंपनी होगी.



प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 नवंबर की तारीख तय कर दी. पीठ ने एनजीओ ‘कॉमन कॉज’ की अर्जी पर भी नोटिस जारी किए. एनजीओ ने सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ एसआईटी जांच कराने की मांग की है.
एनजीओ की ओर से दायर अर्जी में सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को भी प्रतिवादी बनाया गया है. वर्मा और अस्थाना ने एक-दूसरे के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं.

शुक्रवार को हुई संक्षिप्त सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील फली एस. नरीमन ने सीबीआई प्रमुख वर्मा की तरफ से दलीलें पेश की. नरीमन ने कहा कि वर्मा को प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और प्रधान न्यायाधीश की सदस्यता वाली चयन समिति की मंजूरी से सीबीआई निदेशक नियुक्त किया गया था.

उन्होंने वर्मा से सारे अधिकार वापस लेने के सीवीसी और केंद्र के आदेश का भी जिक्र किया. वर्मा के पक्ष में दलीलें देने के लिए वरिष्ठ वकील ने विनीत नारायण मामले में उच्चतम न्यायालय की ओर से दिए गए फैसले का भी हवाला दिया.

शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप पर सीवीसी की जांच इस अदालत की निगरानी में 10 दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए. इस पर सीवीसी ने कहा कि जांच के लिए 10 दिन का वक्त पर्याप्त नहीं है, क्योंकि उसे बहुत सारे दस्तावेज खंगालने होंगे. सीवीसी ने कहा कि कुछ समय तक किसी को निगरानी की अनुमति नहीं दी जाए.

पीठ ने सीवीसी को जांच पूरी करने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया. वर्मा ने खुद को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने और 1986 बैच के ओड़िशा कैडर के आईपीएस अधिकारी राव को सीबीआई निदेशक पद का प्रभार दिए जाने के केंद्र के आदेश पर रोक लगाने की भी मांग की है.

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