Assembly Banner 2021

दिल्ली के 10 वर्षीय बच्चे के इलाज को 16 करोड़ की जरूरत, क्राउडफंड के भरोसे मां-बाप

रेहांश के मां-बाप क्राउड फंडिंग का रास्ता चुन रहे हैं. (तस्वीर-ANI)

रेहांश के मां-बाप क्राउड फंडिंग का रास्ता चुन रहे हैं. (तस्वीर-ANI)

रेहांश की मां ने कहा है- उसे (रेहांश) स्पाइनल मस्क्युलर एंट्रोफी टाइप 1 (Spinal Muscular Atrophy Type I) नाम की दुर्लभ बीमारी है. रेहांश का इलाज सिर्फ अमेरिका की जीन थेरेपी के जरिए किया जा सकता है जिसमें 16 करोड़ा का खर्च आएगा. इतने पैसे हमारे पास नहीं हैं.

  • Share this:
नई दिल्ली. दिल्ली के एक दस वर्षीय बच्चे रेहांश सूरी (Rehansh Suri) को दुर्लभ बीमारी है. उसके इलाज के लिए 16 करोड़ रुपए की आवश्यकता है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक अब बच्चे के मां-बाप क्राउड फंडिंग के जरिए पैसे जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. रेहांश की मां ने समाचार एजेंसी से कहा है- उसे (रेहांश) स्पाइनल मस्क्युलर एंट्रोफी टाइप 1 (Spinal Muscular Atrophy Type I) नाम की दुर्लभ बीमारी है. रेहांश का इलाज सिर्फ अमेरिका की जीन थेरेपी के जरिए किया जा सकता है जिसमें 16 करोड़ा का खर्च आएगा. इतने पैसे हमारे पास नहीं हैं.

इससे पहले मुंबई में तीरा नाम की एक बच्ची को भी इलाज के लिए करीब 22 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ी थी. ये पैसे क्राउड फंडिंग के जरिए ही जुटा लिए गए थे. पांच वर्षीय तीरा कामत भी दुर्लभ स्वास्थ्य परेशानी स्पाइनल मस्क्युलर एथ्रॉपी से जूझ रही है. बच्ची के पैरेंट्स की इस परेशानी का इलाज दुनियाभर के आम लोगों ने किया. करीब 10 देशों के लोगों ने वेबसाइट के जरिए तीरा के इलाज के लिए पैसे भेजे.

तीरा के लिए लोगों ने 100 से लेकर 5 लाख रुपये तक का दान किया
लोगों ने तीरा के इलाज के लिए 100 से लेकर 5 लाख रुपये तक का दान किया. वहीं, केंद्र सरकार ने भी अपनी तरफ से टैक्स में 6 करोड़ रुपये की छूट देकर परिवार की मदद की है. तीरा के माता-पिता प्रियंका और मिहिर कामत ने सोशल मीडिया पर लोगों से मदद की अपील की थी. एसएमए एक दुर्लभ जैनेटिक कंडीशन है, जिसके चलते मसल्स का नुकसान होता है. यह मांसपेशियां चलने-फिरने के लिए जरूरी होती हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज