सरदार सरोवर बांध: दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बांध की 10 बड़ी बातें

News18Hindi
Updated: September 17, 2017, 10:51 AM IST
सरदार सरोवर बांध: दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बांध की 10 बड़ी बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 67वें जन्मदिन पर गुजरात में स्थित सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन करेंगे. सरदार सरोवर बांध दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है. यह नर्मदा नदी पर बना 800 मीटर उंचा बांध है.
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Updated: September 17, 2017, 10:51 AM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 67वें जन्मदिन पर गुजरात में स्थित सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन करने जा रहे हैं. सरदार सरोवर बांध दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है. गुजरात के अस्तित्व में आने के कुछ समय बाद ही गुजरात की जीवनदायी कहे जाने वाले सरदार सरोवर नर्मदा योजना (नर्मदा बांध) की नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 4 अप्रैल 1961 को रखी थी.

इस योजना की कुल लागत के हिसाब से यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी योजना है. नर्मदा नदी पर बनने वाले 30 बांधों में से सरदार सरोवर सबसे बड़ी बांध परियोजना है. इस परियोजना का उद्देश्य गुजरात के सूखाग्रस्त इलाक़ों में पानी पहुंचाना और मध्य प्रदेश के लिए बिजली पैदा करना है, लेकिन ये परियोजनाएं अपनी अनुमानित लागत से काफ़ी ऊपर जा चुकी हैं.

मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में पड़ने वाली नर्मदा घाटी में 30 बड़े, 135 मझोले और 3000 छोटे बांध बनाने की योजना शुरू से ही हर मुद्दे पर विवाद में रही है.

सरदार सरोवर बांध से जुड़ी कुछ खास बातें:


  • सरदार सरोवर बांध अमेरिका के ग्रांड कोली डैम के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है.

  •  इस बांध के 30 दरवाजे हैं और प्रत्येक दरवाजे का वजन 450 टन है. हर दरवाजे को बंद करने में करीब एक घंटे लगते हैं.

  •  इस बांध के जरिये 9,000 गांवों को पानी मिलने का दावा है.

  • हाल ही में बांध की उंचाई को 138.68 मीटर तक बढ़ाई गई है. इस बांध की 4.73 मिलियन क्यूबिक पानी संचय करने की क्षमता है.

  • सरदार सरोवर बांध गुजरात के केवाड़िया क्षेत्र में स्थित है. हालांकि, इस बांध से उत्पन्न होने वाली 57% बिजली महाराष्ट्र में, 27% मध्य प्रदेश और शेष गुजरात में जाएगी. सिंचाई और पानी की आपूर्ति के मामले में राजस्थान को भी कुछ लाभ मिलने की उम्मीद है.

  • बांध से 6 हज़ार मेगावाट बिजली पैदा होगी जो कि गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में वितरित होगी.

  • भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1961 में इस परियोजना की शुरुआत की थी. करीब पांच दशकों के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज इसका लोकार्पण करेंगे.

  • नर्मदा बचाव आंदोलन की अगुवाई करने वाली मेधा पाटकर ने इस मामले को लेकर सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में घसीटा और 1996 में कोर्ट ने निर्माण पर रोक लगा दी.

  • अक्टूबर 2000 में सर्वोच्च न्यायालय ने बांध के पुनर्ग्रहण की अनुमति दी.

First published: September 17, 2017
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