चारों जजों के सीजेआई मिश्रा को लिखे पत्र की मुख्य बातें

वरिष्ठ जजों ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि चीफ जस्टिस सिर्फ 'सभी समान लोगों में पहले नंबर पर आते हैं, उससे ज्यादा कुछ नहीं'. अंग्रेजी में लिखे खत में इसके लिए जजों ने लिखा है.‘Chief Justice is only the first amongst the equals — nothing more or nothing less’.

News18Hindi
Updated: January 12, 2018, 10:17 PM IST
चारों जजों के सीजेआई मिश्रा को लिखे पत्र की मुख्य बातें
CJI को लिखे ख़त की मुख्य बातें..
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Updated: January 12, 2018, 10:17 PM IST
सुप्रीम कोर्ट के चारों जजों ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस करने से कुछ दिन पहले मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था. जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को लेकर बातें उठाईं थीं. ये चिट्ठी प्रेस कांफ्रेंस के बाद जारी की गई. वरिष्ठ जजों ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि चीफ जस्टिस सिर्फ 'सभी समान लोगों में पहले नंबर पर आते हैं, उससे ज्यादा कुछ नहीं'. अंग्रेजी में लिखे खत में इसके लिए जजों ने लिखा है. ‘Chief Justice is only the first amongst the equals — nothing more or nothing less’.

चिट्ठी में मुख्य तौर पर मुद्दा उठाया गया है कि सैद्धांतिक रूप से मुख्य न्यायाधीश के पास ही रोस्टर बनाने का अधिकार होता है. चीफ जस्टिस ही तय करते हैं कि कौन सा केस कोर्ट में कौन देखेगा. इन चारों न्यायाधीशों के मुताबिक चीफ जस्टिस को यह अधिकार दिया गया है ताकि सर्वोच्च अदालत सुचारू रूप से काम कर सके. जजों ने यह भी कहा कि हम उन मामलों का नाम इसलिए सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं क्योंकि इसे सर्वोच्च न्यायालय के सम्मान पर ठेस पहुंच सकती है. खत के मुताबिक जजों ने तुरंत इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की है.

पत्र की मुख्य बातें इस तरह हैं
-  पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट आफिस से लिए प्रशासनिक फैसले हमारे लिए चिंता की वजह रहे हैं

-  इन फैसलों ने हमारी पूरी न्याय प्रक्रिया और न्याय प्रदान करने के सिस्टम पर असर डाला है.
-  इसका असर हाईकोर्टों की स्वतंत्रता पर पड़ा है.
- कलकत्ता, मद्रास और बाम्बे हाईकोर्ट के गठन के बाद से कुछ परंपराएं और तरीके न्यायिक प्रशासन में स्थापित किए जाते रहे हैं. ये परंपराएं इस अदालत में एक सदी के कामकाज में स्थापित की गईं और इस्तेमाल में लाई गईं.
- यही परंपराएं ये बताती रही हैं कि चीफ जस्टिस किस तरह केसों का बंटवारा करते हैं और किस तरह ये प्रक्रिया अदालतों के लिए जरूरी भी हैं.
-  चीफ जस्टिस सौ साल में स्थापित उस परंपरा से अलग जा रहे हैं, जिसके तहत महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय सामूहिक तौर पर लिए जाते रहे हैं.
- चीफ जस्टिस केसों के बंटवारे में नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं.
- वे महत्वपूर्ण मामले, जो सुप्रीम कोर्ट की अखंडता को प्रभावित करते हैं, चीफ जस्टिस उन्हें बिना किसी वाजिब कारण के उन बेंचों को सौंप देते हैं, जो चीफ जस्टिस की पसंद की हैं. इससे संस्थान की छवि बिगड़ी है. हम ज़्यादा केसों का हवाला नहीं दे रहे हैं.
- पत्र में कुछ फैसलों और केसों को एक खंडपीठ से लेकर दूसरी खंडपीठ को सौंपने को लेकर सवाल उठाये गए हैं.
- इसमें कोलकाता हाईकोर्ट के जज करनन पर दिए गए फैसले पर भी सवाल उठाया गया है और कहा गया कि इस पर फिर से विचार करने की जरूरत थी.
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