तीन तलाक के संशोधित बिल में क्या है नया, जानें इससे जुड़ी 10 बड़ी बातें

तीन तलाक के कई प्रावधानों पर विपक्षी पार्टियों को ऐतराज है जिस वजह से विधेयक संसद में विवाद का केंद्र बना हुआ है. शुक्रवार को भी इस पर बहस के दौरान हंगामा होने की पूरी गुंजाइश है.

News18Hindi
Updated: August 10, 2018, 3:03 PM IST
तीन तलाक के संशोधित बिल में क्या है नया, जानें इससे जुड़ी 10 बड़ी बातें
प्रतीकात्मक तस्वीर
News18Hindi
Updated: August 10, 2018, 3:03 PM IST
राज्यसभा में शुक्रवार को तीन तलाक विधेयक  अब मानसून सत्र में पेश नहीं किया जाएगा. हालांकि केंद्रीय कैबिनेट ने कुछ संशोधनों के साथ इसे पहले ही पारित कर दिया था. 29 दिसंबर 2017 को लोकसभा में यह विधेयक पारित हो गया था, जिसमें तुरंत तीन तलाक देने को अपराध की श्रेणी में रखा गया था. तीन तलाक के कई प्रावधानों पर विपक्षी पार्टियों को एतराज है जिस वजह से विधेयक संसद में विवाद का केंद्र बना हुआ है.

आइए आपको इस बिल से जुड़ी 10 बड़ी बाते बताते हैं.

1-गुरुवार को सरकार ने तीन तलाक से जुड़े कानून में आरोपी को सुनवाई से पहले जमानत जैसे कुछ प्रावधानों को मंजूरी दे दी.

2- कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कैबिनेट ने ‘मुस्लिम विवाह महिला अधिकार संरक्षण विधेयक’ में तीन संशोधनों को मंजूरी दी. इस विधेयक को लोकसभा में मंजूरी दी जा चुकी है और यह राज्यसभा में लंबित है.

3-संसद के मॉनसून सत्र का शुक्रवार को अंतिम दिन है और सरकार राज्यसभा में संशोधन पेश कर सकती है. अगर विधेयक ऊपरी सदन में पारित हो जाता है तो इसे संशोधन पर मंजूरी के लिए वापस लोकसभा में पेश करना होगा.

यह भी पढ़ें: पांच बड़ी मुस्लिम संस्‍थाएं भी मानती हैं तीन तलाक गलत है, लेकिन...

4-कानून 'गैरजमानती' बना रहेगा लेकिन आरोपी जमानत मांगने के लिए सुनवाई से पहले भी मजिस्ट्रेट से गुहार लगा सकते हैं. गैरजमानती कानून के तहत, जमानत थाने में ही नहीं दी जा सकती.

5-रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रावधान इसलिए जोड़ा गया है ताकि मजिस्ट्रेट 'पत्नी को सुनने के बाद' जमानत दे सकें. उन्होंने साफ किया, 'लेकिन प्रस्तावित कानून में तीन तलाक का अपराध गैरजमानती बना रहेगा.'

6-सूत्रों की माने तो मजिस्ट्रेट यह तय करेंगे कि जमानत केवल तब ही दी जाए जब पति विधेयक के अनुसार पत्नी को मुआवजा देने पर राजी हो. विधेयक के मुताबिक, मुआवजे की राशि मजिस्ट्रेट द्वारा तय की जाएगी.

यह भी पढ़ें: तीन तलाक पर बना मोदी सरकार का कानून इन्हें मंज़ूर नहीं

7-पुलिस केवल तब प्राथमिकी दर्ज करेगी जब पीड़ित पत्नी, उसके किसी करीबी संबंधी या शादी के बाद उसके रिश्तेदार बने किसी व्यक्ति की ओर से पुलिस से गुहार लगाई जाती है.

8- रविशंकर प्रसाद के मुताबिक, यह इन चिंताओं को दूर करेगा कि कोई पड़ोसी भी प्राथमिकी दर्ज करा सकता है जैसा कि किसी संज्ञेय अपराध के मामले में होता है. यह दुरुपयोग पर लगाम कसेगा.

9- विधेयक के अनुसार, मुआवजे की राशि मजिस्ट्रेट द्वारा तय की जाएगी. एक अन्य संशोधन यह स्पष्ट करता है कि पुलिस केवल तब प्राथमिकी दर्ज करेगी जब पीड़ित पत्नी, उसके किसी करीबी संबंधी या शादी के बाद उसके रिश्तेदार बने किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस से गुहार लगाई जाती है.

10- तीसरा संशोधन तीन तलाक के अपराध को ‘‘समझौते के योग्य' बनाता है. अब मजिस्ट्रेट पति और उसकी पत्नी के बीच विवाद सुलझाने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं. समझौते के योग्य अपराध में दोनों पक्षों के पास मामले को वापस लेने की आजादी होती है.

यह भी पढ़ें: जिस्म का धंधा करवाकर अपनी ही बीवी का दलाल बनना चाहता था शौहर
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर