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10 राज्यों में कोविड-19 के 77 फीसदी एक्टिव केसः केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

केंद्र ने कहा कि भारत का ‘केस फर्टिलिटी रेट’ (CFR) 1.46 फीसदी है, जबकि वैश्विक औसत 2.36 फीसदी है. फाइल फोटो
केंद्र ने कहा कि भारत का ‘केस फर्टिलिटी रेट’ (CFR) 1.46 फीसदी है, जबकि वैश्विक औसत 2.36 फीसदी है. फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को दी गई जानकारी में गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने कहा कि मृत्यु दर (Case Fertility Ratio) को कम करने का प्रयास तेज करेगी और इस 1 फीसदी से नीचे लाने का प्रयास करेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2020, 11:03 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दस राज्यों में कोविड-19 के लगभग 77 फीसदी सक्रिय मामले (Active Case) हैं, जबकि कुल सक्रिय मामलों में से 33 फीसदी महाराष्ट्र और केरल के हैं.

साथ ही ये भी बताया कि दुनिया के अधिकतर देशों में कोविड-19 के मामले फिर से बढ़ रहे हैं और भारत की घनी आबादी को देखते हुए देश ने संक्रमण के प्रसार पर अंकुश लगाने में उल्लेखनीय काम किया है. केंद्र ने कहा कि 24 नवंबर तक भारत में कोविड-19 के 92 लाख मामले थे, जिसमें 4.4 लाख से अधिक सक्रिय मामले हैं.

गृह मंत्रालय ने हलफनामे में कहा, ‘‘हमारी स्वस्थ दर (Recovery Rate) 93.76 फीसदी हो गई है और करीब 86 लाख लोग महामारी से उबर चुके हैं. पिछले आठ हफ्तों में प्रतिदिन के औसतन मामलों में 50 फीसदी की कमी आई है. वर्तमान में केवल दो राज्यों में 50 हजार से अधिक मामले हैं और वे पूरे सक्रिय मामलों का करीब 33 फीसदी हैं.’’



केंद्र ने कहा कि भारत का ‘केस फर्टिलिटी रेट’ (सीएफआर) 1.46 फीसदी है, जबकि वैश्विक औसत 2.36 फीसदी है. गृह मंत्रालय ने कहा कि सरकार सीएफआर को कम करने का प्रयास जारी रखेगी और इसे एक फीसदी से नीचे लाएगी और पॉजिटिविटी दर को कम करने के प्रयास तेज करेगी, जो वर्तमान में 6.9 फीसदी है.
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केंद्र ने कहा, ‘‘दस राज्यों में देश में सक्रिय मामलों का 77 फीसदी है. ये राज्य हैं महाराष्ट्र (18.9 प्रतिशत), केरल (14.7 प्रतिशत), दिल्ली (8.5 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल (5.7 फीसदी), कर्नाटक (5.6 फीसदी), उत्तर प्रदेश (5.4 फीसदी), राजस्थान (5.5 फीसदी), छत्तीसगढ़ (पांच फीसदी), हरियाणा (4.7 फीसदी) और आंध्रप्रदेश (3.1 फीसदी).’’

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सरकार की ओर कहा गया कि भारत अब प्रतिदिन औसतन 11 लाख सैंपल की जांच कर रहा है और अप्रैल में छह हजार नमूनों की जांच से बढ़कर यहां तक पहुंचना एक उल्लेखनीय बढ़ोतरी है.

केंद्र ने 170 पन्नों का हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया और कहा कि महामारी जिस भयावता से बढ़ी उससे बाध्य होकर विभिन्न देशों ने कड़े कदम उठाए. इसने जीवन के लगभग हर पहलू को प्रभावित किया है और भारत इसका अपवाद नहीं है.
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