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कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान समुद्र में फेंकी गई 10 हजार टन मछलियां

News18Hindi
Updated: March 31, 2020, 12:47 AM IST
कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान समुद्र में फेंकी गई 10 हजार टन मछलियां
महाराष्ट्र में 10 हजार टन मछलियों के समुद्र मे फेंके जाने का दावा किया गया है (सांकेतिक तस्वीर)

रविवार को केंद्र सरकार (central Government) की ओर से प्रकाशित एक नोटिफिकेशन (Notification) में साफ किया गया था किसी भी तरह के सामान की आवाजाही को लॉकडाउन (lockdown) के दौरान रोका नहीं जाएगा, चाहे वह सामान आवश्यक सामानों की श्रेणी में आता हो या न आता हो.

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  • Last Updated: March 31, 2020, 12:47 AM IST
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मुंबई. मछुआरों (Fishermen) ने कहा है कि 10 हजार मीट्रिक टन ताजी पकड़ी गई मछलियों (Fishes) को दोबारा समुद्र में फेंक दिया गया है. मछुआरों ने बताया कि ऐसा कोरोना वायरस (Coronavirus) के फैलने के दौरान लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown) के पहले हफ्ते में किया गया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक रेफ्रिजरेशन (refrigeration) की सुविधाओं, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और बर्फ की उपलब्धता की कमी को मछुआरों (Fishermen) ने इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है.

महाराष्ट्र के तटीय इलाके के लोक नेताओं से पूछकर जुटाया गया आंकड़ा
मछलियों के बारे में यह अनुमान नेशनल फिशरमैन फोरम (NFF) और नेशनल पर्स सेन फिशरमैन वेलफेयर एसोसिएशन (NPSFWA) ने यह अनुमान मछुआरों के लोक नेताओं द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर लगाया है. इसके लिए उन्होंने महाराष्ट्र के हर तटीय इलाके के लोक नेता से 22 मार्च से 29 मार्च के बीच का आंकड़ा पूछा था. रविवार को यह जानकारी राज्य के मत्स्य विभाग को सौंप दी गई है.



NPSFWA के चेयरमैन गणेश नखाना ने कहा, "जबकि लोगों की सुरक्षा प्राथमिक है, इस लॉकडाउन (Lockdown) को लागू किए जाने के लिए बनाई गई योजना खराब थी. पूरा का पूरा मछली का कारोबार बैठ गया. हम अगले दो महीनों में 1 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगा रहे हैं. इसमें मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगाई जाने वाली रोक भी शामिल है."



केंद्र ने जारी किया था सभी जरूरी-गैर जरूरी सामानों की आवाजाही का नोटिफिकेशन
रविवार को केंद्र की ओर से प्रकाशित एक नोटिफिकेशन में साफ किया गया था किसी भी तरह के सामान की आवाजाही को लॉकडाउन के दौरान रोका नहीं जाएगा, चाहे वह सामान आवश्यक सामानों की श्रेणी में आता हो या न आता हो. मुंबई के NFF के एक सदस्य ने कहा, "सरकार का यह कदम बहुत देर से आया है. इस कारोबार में लगा हुआ कोई बाजार अब तक बचा नहीं है. कोई भी कोल्ड स्टोरेज (Cold Storage) अभी काम नहीं कर रहा है. नावें खाली पड़ी हैं और अब इसे करने के लिए लोग भी नहीं बचे हैं."

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First published: March 31, 2020, 12:46 AM IST
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