पति की मौत के 10 साल बाद तलाक के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई को तैयार हुई कोर्ट

दोनों की शादी फरवरी, 2001 में हुई थी और चार साल बाद पति ने क्रूरता का आरोप लगाते हुए 2005 में तलाक लेने की अर्जी दायर की थी.

भाषा
Updated: November 10, 2018, 1:37 AM IST
पति की मौत के 10 साल बाद तलाक के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई को तैयार हुई कोर्ट
प्रतीकात्मक
भाषा
Updated: November 10, 2018, 1:37 AM IST
दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक को खारिज करने की मांग करने वाली उस महिला की याचिका पर सुनवाई करने की मंजूरी दे दी है, जिसके पति की मौत 10 साल पहले हो गई थी. महिला का दावा है कि निचली अदालत के फैसले के दिन वह अदालत में मौजूद नहीं थी और उसने इस फैसले पर अपनी रजामंदी नहीं दी थी.

जस्टिस अनु मल्होत्रा ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत आपसी सहमति से तभी तलाक को मंजूरी दी जा सकती है, जब फैसले के दिन तक दोनों पक्ष इसके लिए रजामंद हों. हाईकोर्ट ने यह संज्ञान लिया कि मौजूदा मामले में महिला उस दिन निचली अदालत नहीं आई थी जब यह आदेश दिया गया था.

ये भी पढ़ें- जिद पर अड़े तेजप्रताप ने कहा, तलाक पर माता-पिता साथ दें तभी लौटूंगा घर

कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत को दोनो पक्षों की रजामंदी को सुनना था, लेकिन इस मामले में 'साफ तौर पर' ऐसा नहीं किया गया, क्योंकि महिला छह अक्टूबर, 2007 को अदालत नहीं आई थी, जब तलाक का आदेश दिया गया था.

ये भी पढ़ें- तेज प्रताप के तलाक की ज़िद से डिप्रेशन में लालू, बीपी-ब्लड शुगर बढ़ा, उड़ी नींद

बता दें कि दोनों की शादी फरवरी, 2001 में हुई थी और चार साल बाद पति ने क्रूरता का आरोप लगाते हुए 2005 में तलाक लेने की अर्जी दायर की थी. हालांकि सुनवाई के दौरान वह दोनों एक समझौते पर पहुंचे कि आपसी सहमति से वह तलाक के लिए अर्जी दायर करेंगे और अलग हो जाएंगे. समझौते के अनुसार व्यक्ति को महिला को गुजर-बसर के लिए 15 लाख रुपये देने थे.

ये भी पढ़ें- क्या होगा तेजप्रताप यादव का तलाक? जानिए क्या कहती है कुंडली
Loading...
हाईकोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया कि निचली अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार महिला ने बाद में कहा कि वह तब आपसी सहमति से तलाक देगी जब उसे 28 लाख रुपये मिलेंगे. निचली अदालत ने पाया कि पुरुष ने पहले ही महिला को आठ लाख रुपये दे दिए हैं और वह उससे अधिक धन की 'उगाही' करना चाहती है. इसके बाद निचली अदालत ने महिला द्वारा रजामंदी नहीं देने की याचिका खारिज कर दी और आपसी सहमति वाले तलाक का फैसला दे दिया.

निचली अदालत ने तब कहा था कि महिला पुरुष द्वारा चार डिमांड ड्राफ्ट से दिए गए आठ लाख रुपये की राशि लेने के लिए आजाद है. वहीं महिला ने इस फैसले को हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी कि उसने तलाक की मंजूरी नहीं दी थी और वह आदेश के दिन निचली अदालत में मौजूद नहीं थी.

इस याचिका प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति की 2008 में मौत हो गई और बाद में उसकी मां भी गुजर गई. इस संबंध में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले का हवाला देते हुए अब कहा है कि महिला की अपील पुरुष की मौत के बाद भी उसके कानूनी वारिस के साथ जारी रहेगी. हाईकोर्ट ने हालांकि यह भी कहा कि आठ लाख की जो राशि फिक्स्डि डिपॉज़िट (एफडी) में रखी है, वह वास्तविक ब्याज दर के साथ पुरुष के पिता को दी जाए.
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर