गृहमंत्रालय एनसीपी को देना बड़ी गलतीः पृथ्वीराज

इन संस्थानों की कड़ी निगरानी के चलते सरकारी अफसर तुरंत फैसले लेने में हिचकते हैं। इससे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए जरूरी सामानों की खरीद के सौदों में भी काफी वक्त लग जाता है।

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मुंबई। मुंबई धमाकों के बाद कांग्रेस और एनसीपी के बीच दरार पड़ती दिख रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि गृहमंत्रालय एनसीपी को देना एक भारी भूल थी। इस पर फिर से विचार किया जाना चाहिए था। चव्हाण ने कहा है कि गठबंधन में शायद वो इकलौते मुख्यमंत्री होंगे जिनके पास या उनकी पार्टी के पास गृह, वित्त और योजना जैसे मंत्रालय न हो। गौरतलब है कि 1999 से महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। एनसीपी के पास गृहमंत्रालय है और आर आर पाटिल गृहमंत्री हैं।

चव्हाण ने आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष के साथ खास कार्यक्रम एजेंडा में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने में सीएजी, सीवीसी की वजह से दिक्कतें आ रही हैं। इन संस्थानों की कड़ी निगरानी के चलते सरकारी अफसर तुरंत फैसले लेने में हिचकते हैं। इससे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए जरूरी सामानों की खरीद के सौदों में भी काफी वक्त लग जाता है।

पृथ्वीराज चव्हाण ने साफ कहा कि इन संस्थाओं की वजह से पुलिस आधुनिकीकरण की प्रक्रिया भी खटाई में पड़ती जा रही है। 26-11 के हमले के बाद कई कदम उठाए गए लेकिन कुछ लागू हो सके तो कुछ नहीं। बड़ी संख्या में सीसीटीवी खरीदने का कार्यक्रम भी अब तक पूरा नहीं हो सका है। इसके अलावा बुलेट प्रूफ जैकेट और आधुनिक हथियार तत्काल खरीदे जाने की जरूरत भी है। सरकारी अफसर इन खरीद के सौदों पर तत्काल निर्णय नहीं लेते हैं, क्योंकि कहीं न कहीं उन्हें इन संस्थाओं की जांच का डर रहता है। चव्हाण ने कहा कि आतंकवाद से लड़ने के लिए हमें तेजी की जरूरत है, लेकिन हमारा सिस्टम काफी धीमा हो गया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या आलसीपन की वजह से अफसर फैसले वक्त रहते नहीं करते हैं, तो उन्होंने कहा कि आलसीपन की वजह से नहीं बल्कि इन संस्थाओं के डर की वजह से अफसर या तो संभल-संभल कर फैसले लेते हैं और लंबा वक्त लग जाता है या फिर वो फैसले आगे के लिए टाल जाते हैं। इन अफसरों को लगता है कि एक भी गलत फैसला उन्हें आने वाले वक्त में मुश्किल में डाल सकता है और जांच के घेरे में फंसा सकता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें एक ऐसा सिस्टम बनाना होगा जिसमें देश आधुनिक हथियारों की खरीद करे और फिर जरूरतमंद राज्यों के साथ उनका बंटवारा कर दे। इस बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृह मंत्री पी चिदंबरम से बातचीत भी की है।
पृथ्वीराज चव्हाण से ये भी पूछा गया कि क्या सीरियल ब्लास्ट खुफिया एजेंसियों की चूक साबित करते हैं तो उन्होंने कहा कि ये चूक नहीं है लेकिन ये सच जरूर है कि इस बार सुरक्षा एजेंसियों को इस साजिश की भनक तक नहीं थी। चव्हाण ने कहा कि धमाकों की जांच कई दिशाओं में चल रही है और मुंबई पुलिस की कोशिश है कि जल्द ही इस गुत्थी को सुलझा लें। चव्हाण से ये भी पूछा गया कि आखिर हर बार मुंबई में झावेरी बाजार को निशाना क्यों बनाया जाता है और ऐसे में वो वहां काम करने वाले हीरा कारोबारियों को क्या भरोसा देंगे तो चव्हाण ने कहा कि वो इन कारोबारियों से अपील करते हैं कि वो झावेरी बाजार का इलाका छोड़ कर बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स में उनके लिए खास तौर पर बने सिस्टम का इस्तेमाल करें। मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि चोरी-छिपे शहर के इलाकों में बम रखने और समुद्र के रास्ते दाखिल होकर सीधे हमला करने में अंतर है। दोनों अलग-अलग चुनौतियां हैं और उनसे निपटने के लिए सरकार ने समुद्र की निगरानी बढ़ाई है। इसके लिए मरीन पुलिस स्टेशन, मरीन टास्क फोर्स बनाई गई है। वहीं मुंबई को सुरक्षित बनाने के लिए फोर्स–1 और क्विक रिस्पॉन्स टीम बनाई हैं। महाराष्ट्र इकलौता राज्य है जहां इंटेलिजेंस एकेडमी बनाई गई है, ताकि अफसरों को खुफिया कामों के लिए खास प्रशिक्षण दिया जा सके।
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