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करीब 16 तक चली भारत-चीन के बीच 10वें दौर की सैन्य वार्ता

भारत और चीन के बीच शनिवार को 10वें दौर की सैन्य वार्ता हुई (फोटो:रॉयटर्स)
भारत और चीन के बीच शनिवार को 10वें दौर की सैन्य वार्ता हुई (फोटो:रॉयटर्स)

India-China Standoff: वार्ता के दौरान पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देप्सांग जैसे गतिरोध वाले बिंदुओं से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 21, 2021, 8:26 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को और विस्तार देने के लिये 10वें दौर की सैन्य वार्ता के दौरान भारत और चीन (India-China) ने व्यापक चर्चा की. वार्ता करीब 16 घंटे चली. आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की तरफ मोल्डो सीमा बिंदु पर कोर कमांडर स्तरीय वार्ता शनिवार सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई और रविवार तड़के दो बजे खत्म हुई. सूत्रों ने कहा कि वार्ता के दौरान पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देप्सांग जैसे गतिरोध वाले बिंदुओं से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया.

वार्ता के बारे में हालांकि अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. यह बातचीत दोनों सेनाओं के पैंगांग सो (झील) के उत्तरी व दक्षिणी किनारों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों से सैनिकों व हथियारों की वापसी के पूरा होने के दो दिन बाद हुई. माना जा रहा है कि भारत ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में तनाव कम करने के लिये हॉट स्प्रिंग्स,गोगरा और देप्सांग जैसे इलाकों से वापसी प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया.

सूत्रों ने शनिवार को कहा था कि बातचीत के दौरान व्यापक प्राथमिकता क्षेत्र में तनाव में कमी लाने की है. भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिये गतिरोध वाले सभी बिंदुओं से सैनिकों की वापसी जरूरी है.



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10 फरवरी से शुरू हुई थी वापसी की प्रक्रिया
सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों के सैनिक समझौते के मुताबिक अपने ठिकानों पर वापसी की है. सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया 10 फरवरी को शुरू हुई थी. शनिवार को हुई वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन कर रहे थे जो लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर हैं. वहीं, चीनी पक्ष का नेतृत्व मेजर जनरल लिउ लिन कर रहे थे जो चीनी सेना के दक्षिणी शिनजियांग सैन्य जिले के कमांडर हैं.

दोनों देशों के बीच पिछले साल पांच मई को पैंगांग झील क्षेत्र में हिंसक संघर्ष के बाद सैन्य गतिरोध शुरू हुआ था और फिर हर रोज बदलते घटनाक्रम में दोनों पक्षों ने भारी संख्या में सैनिकों तथा घातक अस्त्र-शस्त्रों की तैनाती कर दी थी. दोनों पक्षों की बीच हालांकि गतिरोध दूर करने के लिये इस दौरान सैन्य व कूटनीतिक बातचीत का दौर भी जारी रहा.

पिछले साल चीनी सेना ने फिंगर 4 और फिंगर 8 के इलाके केबीच कुछ बंकर और अन्य ढांचे बना लिये थे और भारतीय गश्ती दल को फिंगर 4 से आगे नहीं जाने दे रहे थे जिसका भारतीय सेना ने कड़ा प्रतिरोध किया था.

नौ दौर की सैन्य वार्ता में भारत ने विशेषकर पैंगांग झील के उत्तरी क्षेत्र में फिंगर 4 से फिंगर 8 तक के क्षेत्रों से चीनी सैनिकों की वापसी पर जोर दिया था. वहीं, चीन ने पैंगांग झील के दक्षिणी छोर पर सामरिक महत्व की चोटियों से भारतीय सैनिकों की वापसी पर जोर दे रहा था. गतिरोध के लगभग पांच महीने बाद भारतीय सैनिकों ने कार्रवाई करते हुए पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर क्षेत्र में मुखपारी, रेचिल ला और मगर हिल क्षेत्रों में सामरिक महत्व की कई पर्वत चोटियों पर तैनाती कर दी थी.
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