पब्लिक पर नोटबंदी की मार, मगर बिल्डरों से हजारों करोड़ कब वसूलेगी खट्टर सरकार?

काले धन की तो सरकार बहुत बात कर रही है, लेकिन उस सरकारी धन की बात नहीं हो रही है जिसे बिल्‍डरों ने हड़प रखा है। इससे भी आगे बढ़कर सरकार उन्‍हें और लूट का मौका दे रही है।

ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: November 29, 2016, 10:17 AM IST
पब्लिक पर नोटबंदी की मार, मगर बिल्डरों से हजारों करोड़ कब वसूलेगी खट्टर सरकार?
ग्रेटर फरीदाबाद में लोग कई साल से रह रहे हैं लेकिन पानी की लाइन अब डाली जा रही है
ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: November 29, 2016, 10:17 AM IST
नई दिल्‍ली। काले धन के खिलाफ केंद्र सरकार के नोटबंदी जैसे कदम से देशभर में बैंकों-एटीएम के बाहर लंबी लाइन लगी है। लोग अपना ही पैसा जरूरी खर्च के लिए इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी ओर कुछ ऐसे लोग भी हैं जो सरकार के ही हजारों करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं लेकिन उनसे कोई वसूली नहीं हो रही। बीजेपी शासित राज्य हरियाणा में बिल्डर अपने ग्राहकों से वसूले गए साढ़े 11 हजार करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं। ये रकम एक्‍सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज यानी ईडीसी के नाम पर वसूली गई थी और इसे सरकारी खजाने में जमा कराना था। मगर हालत ये है कि कोई भी बिल्डर ऐसा नहीं कर रहा और खट्टर सरकार उन पर कार्रवाई की बजाय उन्हें लूट का और मौका देते जा रही है। सरकार के मंत्री को तो बिल्डरों की हालत पर रहम आ रहा है।

ईडीसी वो रकम है जिसे फ्लैट खरीदने वालों ने विकास के लिए बिल्‍डरों के पास जमा कराई लेकिन बिल्‍डरों ने सरकार को नहीं दी। इसलिए फ्लैट धारक सड़क, बिजली, पानी और सीवरेज के लिए परेशान हैं। ईडीसी जमा न करने वाले जिन बिल्‍डरों का लाइसेंस कैंसिल किया जाना चाहिए था उन्‍हें खट्टर सरकार ने लूट की और छूट दे दी है। जुलाई में एक आदेश जारी कर डायरेक्‍टर टाउन एंड कंट्री प्‍लानिंग ने कहा है कि बिल्‍डर अपने ईडीसी बैलेंस के 25 फीसदी की बैंक गारंटी देकर नए प्रोजेक्‍ट के लिए लाइसेंस ले सकते हैं।

सुविधाओं एवं अन्य मांगों को लेकर बिल्डरों के खिलाफ प्रदर्शन: फाइल फोटो। सुविधाओं एवं अन्य मांगों को लेकर बिल्डरों के खिलाफ प्रदर्शन: फाइल फोटो।

दरअसल, ईडीसी हड़पने का ये सिलसिला पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला के शासन से शुरू हुआ। जिसे भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार ने शह दी। अब मनोहरलाल सरकार भी इसे आगे बढ़ाने का काम कर रही है। गुड़गांव निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता अभय जैन ने आरटीआई डालकर इस बात का खुलासा किया है। ईडीसी हड़पने वालों की सूची के मुताबिक करीब आठ सौ प्रोजेक्‍ट का ईडीसी का पैसा बिल्‍डरों में हड़पा हुआ है। जैन का कहना है कि यह तो तब है जब सरकार पर करीब एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज बताया गया है। क्‍या कोई सरकार आम आदमी का पैसा छोड़ती ?

इस सूची के मुताबिक 30.78 करोड़ रुपये की ईडीसी सबसे पहले गवर्नमेंट एंप्‍लायज कोऑपरेटिव हाउस बिल्‍डिंग सोसायटी लिमिटेड रोहतक ने 2003 में रोक ली थी, जिसे अब तक जमा नहीं करवाया गया है। इसके बाद एक-एक कर बिल्‍डरों ने इसे रोकना शुरू कर दिया। जबकि घर लेने वाले ज्‍यादातर लोगों ने बैंक से ब्‍याज पर रकम लेकर इसका भुगतान किया।

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इसीलिए है इन शहरों में परेशानी

हरियाणा में सबसे ज्‍यादा हाउसिंग सोसायटियां गुड़गांव और फरीदाबाद में हैं। दिल्‍ली से सटे ग्रेटर फरीदाबाद में लोग लगभग पांच साल से अपने फ्लैट में रह रहे हैं लेकिन वहां अब तक न तो पानी की लाइन डाली गई है और न ही सीवर की। सड़कों पर अब भी धूल उड़ रही है। इसके खिलाफ कई बार प्रदर्शन भी हो चुका है लेकिन समस्‍या का समाधान नहीं हुआ। गुड़गांव के भी कई क्षेत्रों में यह दिक्‍कत है। लोगों को टैंकर के पानी से काम चलाना पड़ रहा है...।

ईडीसी हड़पने वालों के साथ खड़ी है सरकार: मिनोचा

ग्रेटर फरीदाबाद वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान प्रमोद मिनोचा का कहना है कि सरकार ईडीसी हड़पने वाले बिल्‍डरों का साथ देकर फ्लैट धारकों के साथ अन्‍याय कर रही है। यह समस्‍या इसलिए है क्‍योंकि बिल्‍डरों ने सरकार के पास एक्‍सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज नहीं जमा करवाया। जबकि वे फ्लैट धारकों से इसकी रकम वसूल चुके हैं। यह पैसा जमा हो तब कोई एजेंसी सीवर, पानी, पावर हाउस और सड़क के लिए काम कराए। इसके बावजूद मनोहरलाल खट्टर सरकार ऐसे बिल्‍डरों पर मेहरबान हो गई है।

ईडीसी न मिलने की वजह से नहीं हो पा रहे विकास कार्य, ऐसे बह रहा पानी ईडीसी न मिलने की वजह से नहीं हो पा रहे विकास कार्य, ऐसे बह रहा पानी

सरकारें सख्‍ती दिखातीं तो नहीं आती ये नौबत, होता विकास: कुश

गुड़गांव और फरीदाबाद नगर निगम के चीफ टाउन प्‍लानर रहे एससी कुश का कहना है कि किसी भी सरकार ने यह पैसा वसूलने में दिलचस्‍पी नहीं दिखाई। वरना सरकार डिफाल्‍टरों के लाइसेंस कैंसिल कर सकती थी। सरकार की कमी के कारण ही इतनी बड़ी रकम बाकी है। यह पैसा सरकारी खजाने में चला जाए तो शहर चमक जाएगा।

पैसा मिल जाए तो तेजी से होगा विकास

-पिछले 12 साल में हरियाणा सरकार को ईडीसी के रूप में 20075.73 करोड़ रुपये मिले हैं। जिसमें सबसे ज्‍यादा 12,948 करोड़ रुपये गुड़गांव ने दिए हैं। दूसरा नंबर फरीदाबाद का है जहां से 2263 करोड़ रुपये सरकारी तिजोरी में गए हैं। जानकारों का कहना है कि अगर बकाया 11.5 हजार करोड़ रुपये सरकार को मिल जाएं तो वह नए विकसित हो रहे क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य करवा सकती है।

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सूची में बड़े-बड़े नाम:

अंसल, डीएलएफ, पार्श्‍वनाथ, ओमेक्‍स, यूनिटेक, वाटिका, कंट्रीवाइड प्रमोटर्स, पुरी कंस्‍ट्रक्‍शन, रहेजा, बेस्‍टेक, एसआरएस, फेयरेस इंफ्रास्‍ट्रक्चर, एबीडब्‍ल्‍यू इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, अचीवर, त्रिवेणी फेयरस इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, एमआर एमजीएफ लैंड साहित कई नामी बिल्‍डरों के 808 प्रोजेक्‍ट के नाम सामने आए हैं, जिनकी ईडीसी बकाया है। कंट्रीवाइट प्रमोटर्स के बीपीटीपी में मार्केटिंग मैनेजर रोहित मोहन कहते हैं कि उनकी कंपनी ने सबसे अधिक करीब 900 करोड़ रुपये जमा करवाए हैं। जो बाकी है उसका केस अदालत में चल रहा है।
‘सरकार ने ईडीसी को छोड़ा नहीं है। पुराने बकाये की रिकवरी आती रहती है और नया बकाया बढ़ता रहता है। अभी जो बकाया है उसे लेने के लिए कोई स्‍पेशल ड्राइव की योजना सरकार नहीं बना रही है, क्‍योंकि इस वक्‍त तो बिल्‍डरों की हालत वैसे ही खराब है।’

-विपुल गोयल, उद्योग मंत्री, हरियाणा सरकार

 
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