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    Air Pollution: वायु प्रदूषण से देश में 16.7 लाख लोगों ने तोड़ा दम, 2019 में 1.16 लाख से अधिक नवजातों की मौत - रिपोर्ट

    उत्‍तर भारत में वायु प्रदूषण का स्‍तर बढ़ा हुआ है.
    उत्‍तर भारत में वायु प्रदूषण का स्‍तर बढ़ा हुआ है.

    Air Pollution India: यह दावा स्‍टेट ऑफ ग्‍लोबल एयर 2020 नामक वैश्विक रिपोर्ट में किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 1,16,000 में से करीब आधे से ज्‍यादा मौतों का संबंध बाहरी पीएम 2.5 प्रदूषक तत्‍व से है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 21, 2020, 1:32 PM IST
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    नई दिल्‍ली. पराली जलाने और अन्‍य इंसानी कारकों से देश में वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्‍तर घातक होता जा रहा है. हर साल दिल्‍ली (Delhi Air Pollution) समेत उत्‍तर भारत में सर्दियों की शुरुआत में वायु प्रदूषण के कारण हालात चिंताजनक होते हैं. इस बीच वायु प्रदूषण पर एक भयावह तस्वीर दिखाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. इसके अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से एक साल में 1,16,000 लाख से अधिक नवजातों (Infants Deaths Air Pollution) की मौत हुई है. वायु प्रदूषण का सीधा असर नवजातों पर भी पड़ रहा है. यह दावा स्‍टेट ऑफ ग्‍लोबल एयर 2020 नामक वैश्विक रिपोर्ट में किया गया है.

    रिपोर्ट में कहा गया है कि 1,16,000 में से करीब आधे से ज्‍यादा मौतों का संबंध बाहरी पीएम 2.5 प्रदूषक तत्‍व से है. इसके अलावा अन्‍य मौतें कोयला, लकड़ी और गोबर से बने ठोस ईंधन से जुड़ी हुई हैं. भारत में 2019 में बाहरी और घरेलू वायु प्रदूषण के लंबे समय के प्रभाव के कारण स्ट्रोक, दिल का दौरा, डायबिटीज, फेफड़े के कैंसर, पुरानी फेफड़ों की बीमारियों और नवजात रोगों से 16.7 लाख मौतें हुईं.

    नवजात शिशुओं में ज्यादातर मौतें जन्म के समय कम वजन और समय से पहले जन्म से संबंधित जटिलताओं से हुईं. रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण अब दूसरों के बीच मृत्यु का सबसे बड़ा खतरा है. यह रिपोर्ट बुधवार को हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट (HEI1) द्वारा प्रकाशित की गई है. यह स्वतंत्र, गैर-लाभकारी अनुसंधान संस्थान है. यह अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी और अन्य द्वारा वित्‍त पोषित है.

    यह रिपोर्ट कोविड 19 महामारी के समय सामने आई है. अभी तक इस कोविड 19 और वायु प्रदूषण के कारण हुई मौतों के बीच में कोई संबंध की बात सामने नहीं आई है. देश में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अब तक 1 लाख से भी अधिक मौतें हो चुकी हैं. हालांकि इस दौरान वायु प्रदूषण और हृदय व फेफड़ों की बीमारियों के बढ़ने के बीच साफ सबूत मिले हैं. यह भी चिंता का विषय बना हुआ है कि सर्दियों में अधिक वायु प्रदूषण में रहने से दक्षिण एशियाई देशों और खाड़ी पूर्वी एशियाई देशों में कोरोना संक्रमण भी बढ़ सकता है.
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