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45 माह में 85 बार तिहाड़ से बाहर आए विकास-विशाल यादव

सबसे ताजा मामला है 10 अक्टूबर का जब विकास यादव ने एम्स में 25 दिन बिताए। विकास ने अपनी बीमारी बताई कमर दर्द, खांसी और डायबिटीज लेकिन एम्स में 25 दिन बिताने के बाद विकास ने बिना जांच-पड़ताल के ही कमरा छोड़ दिया।

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    नई दिल्ली। देश को हिलाकर रख देने वाले नीतीश कटारा हत्याकांड के मुजरिम विकास और विशाल यादव ने झूठी शान के नाम अपनी ही बहन के दोस्त नीतीश की हत्या कर दी थी। अदालत ने इन्हें उम्रकैद की सजा दी है लेकिन इस सजा को इन्होंने किस हद तक मजाक बना दिया कि सजा के ऐलान के बाद 45 महीने में दोनों अब तक 85 बार बीमारी का बहाना बनाकर जेल से बाहर आए हैं। यानि हर महीने में कम से कम दो बार विकास और विशाल यादव बीमारी का इलाज कराने के लिए जेल से बाहर आए हैं। सबसे ताजा मामला है 10 अक्टूबर का जब विकास यादव ने एम्स में 25 दिन बिताए।
    विकास ने अपनी बीमारी बताई कमर दर्द, खांसी और डायबिटीज लेकिन एम्स में 25 दिन बिताने के बाद विकास ने बिना जांच-पड़ताल के ही कमरा छोड़ दिया। ध्यान दीजिए ये ऐसी बीमारी थी जिसकी जांच कराने तक की जरूरत नहीं समझी गई। बावजूद इसके विकास यादव ने 25 दिन एम्स में गुजारे।
    विकास यादव एम्स के न्यू प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर 3002 में रुका था। 25 दिन तक प्राइवेट कमरे में रहकर विकास यादव ने ऐश की जिंदगी काटी। लेकिन जैसे ही हमने इस खबर की तहकीकात शुरू की ये कमरा खाली करा लिया गया। हमसे कहा गया कि विकास यादव को डिस्चार्ज कर दिया गया है।
    यानि इस बात की भनक लगते ही कि विकास यादव के एम्स में होने की खबर हमें लग चुकी है। उसकी बीमारी अचानक ठीक हो गई। खुद अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि यहां इलाज के नाम पर विकास यादव का रूटीन इंवेस्टिगेशन हो रहा था।
    हमने जब इस बारे में एम्स के डॉक्टरों से बात की तो उन्होंने जवाब दिया कि विकास यादव का कमर दर्द के लिए स्कैन होना था लेकिन तिहाड़ प्रशासन की तरफ से इस स्कैन के लिए पैसे नहीं भेजे जा रहे थे। डॉक्टरों ने विकास यादव के 25 दिन तक एम्स के प्राइवेट वार्ड में रुकने को इसी आधार पर सही ठहराने की कोशिश की। हालांकि बाद उन्होंने कबूल किया कि विकास यादव को एम्स से अचानक डिस्चार्ज किया गया। जिस स्कैन के लिए विकास प्राइवेट वार्ड में 25 दिन रहा वो कभी हुआ ही नहीं।
    वैसे एम्स के जिस कमरे में विकास यादव रुका उसका हर रोज का किराया है 1800 रुपए। 25 दिन के हिसाब से ये रकम होती है 45 हजार रुपए जबकि जिस स्कैन के नाम पर वो एम्स में रहा वो सिर्फ 7000 रुपए में होता है। ये सात हजार रुपये एम्स को नहीं मिल पाए इसलिए एम्स ने विकास यादव पर 45 हजार रुपये खर्च कर दिए। इस रूम में विकास को एयरकंडीशन, टीवी, फोन, फ्रिज जैसी सुविधाएं मुहैया कराई गईं। मतलब वो पूरी तरह ऐश के दिन गुजारता रहा।
    ताकतवर मुजरिमों के लिए सब कुछ मुमकिन है। प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों की मानें तो विकास यादव जिस बीमारी के लिए एम्स के प्राइवेट वार्ड में 25 दिन रहा उसके लिए अस्पताल में दाखिल होने की तो कोई जरूरत ही नहीं है।
    क्या अदालत से मिली सजा का यही मतलब है। क्या इससे इंसाफ बेमतलब नहीं हो जाता। महीने में कम से कम 2 बार जेल से बाहर आना। इलाज के बहाने जेल से बाहर रहना। क्या नीतीश कटारा हत्याकांड के मुजरिमों को उम्रकैद की सजा बेमानी नहीं हो गई है।

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