केरल में विधानसभा चुनाव से 6 महीने पहले CPM के सामने खड़े हैं 12 सवाल

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के लिए आगामी विधानसभा चुनाव जीतना बड़ी चुनौती होगा. (फाइल फोटो)
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के लिए आगामी विधानसभा चुनाव जीतना बड़ी चुनौती होगा. (फाइल फोटो)

Kerala Assembly Elections 2021: आगामी चुनाव में पिनराई विजयन के सामने कई सवाल खड़े हैं, जो आगामी चुनावों में उनके लिए बड़ा रोड़ा बन सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 31, 2020, 12:40 PM IST
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केरल (Kerela) में अगले साल विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2021) है. राज्य में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (Chief Minister Pinrai Vijayan) की सरकार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) एक बार फिर सत्ता में आने का प्रयत्न करेगी. इधर, राज्य में विपक्षी भाजपा और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को घेरा हुआ है. दोनों ही विपक्षी पार्टी मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है. विपक्ष, विभिन्न मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर और केरल माकपा अध्यक्ष के बेटे बीनीश कोडियेरी की गिरफ्तारी के बाद से विजयन पर हमले तेज कर दिए हैं. ऐसे में आगामी चुनाव में पिनराई विजयन के सामने कई सवाल खड़े हैं, जो आगामी चुनावों में उनके लिए बड़ा रोड़ा बन सकते हैं.

बिनीश कोडियारी की गिरफ्तारी
सीपीएम के राज्य सचिव कोडियारी बालाकृष्णन के बेटे बीनीश कोडियारी का नाम बीते कई दशकों के दौरान कई मामलों में सामने आ चुका है. 36 वर्षिय कोडियारी को ईडी ने ड्रग्स माफियाओं को फंडिंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया है. ऐसे में पिनराई विजयन सरकार के लिए चुनाव में यह मुद्दा परेशानी खड़ी कर सकता है. बता दें कि फरवरी से राज्य में नशे के खिलाफ 'बी ह्यूमन' अभियान चलाया जा रहा है, जिससे राज्य के युवा जुड़े हुए हैं.

पूर्व सचिव पर मनी लॉन्ड्रिंग केस
मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया है. साथ ही सोने की तस्करी में यह पांचवी गिरफ्तारी है. इस गिरफ्तारी से शिवशंकर के साथ सरकार की भूमिका पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं. ऐसे में पिनराई विजयन के लिए चुनावों में जनता के सामने खुद को पेश करना बड़ी चुनौती होगा.



लाइफ मिशन परियोजना
बता दें कि 2016 में सत्ता में आने के बाद पिनराई विजयन ने 'लाइफ मिशन' परियोजना लॉन्च की थी जो उनके लिए सरकारात्मक साबित हो रही थी. इसमें सरकार द्वारा कई प्रायोजकों के फंड से राज्य के बेघर लोगों के लिए आवास देने का काम किया गया था. इस मिशन में बेघरों को घर देने के लिए सरकारी जमीन का इस्तेमाल किया गया था. सोने की तस्करी के आरोपी स्वपन सुरेश के बयान के बाद सीबीआई ने इस परियोजना की जांच करनी शुरू कर दी है. जिसके बाद मुख्यमंत्री की यह परियोजना शक के दायरे में आ गई.

सबरीमाला अयप्पा मंदिर विवाद
सबरीमाला अयप्पा मंदिर में दो महिलाओं के प्रवेश से राज्य प्रशासन और CPI (M) पर गंभीर प्रभाव पड़ा है. बता दें कि इससे 2019 में आम चुनावों में राज्य में 10 लोकसभा सीटों का क्षय हुआ. सरकार की सबरीमाला अयप्पा मंदिर में दो महिला के प्रवेश को लेकर अभी भी मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

सैलरी चैंलेंज
सरकार ने लॉकडाउन में बढ़ते वित्तिय संकट के बीच वेतन कटौती का अध्यादेश लागू किया था. जिसमें लोगों की मदद करने के लिए सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कटौती करने की बात कही थी. इस फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं दर्ज होने के बाद भी सरकार अपने रुख पर अड़ी हुई थी. सैलरी चैलेंज का विचार साल 2018 में बाढ़ पीढ़ितों की मदद करने से आया था. इस दौरान भी 2018 में केवल 60 प्रतिशत कर्मचारियों ने सैलरी चैलेंज को स्वीकार किया था.

बाढ़ पीड़ितों की राहत सामग्री में झोल
मार्च में दूसरे सैलरी चैंलेज से एक महीने पहले क्राइम ब्रांच ने दो सीपीएम वर्करों को कोच्चि में 15 लाख रुपये की राहत सामग्री में घपला करने के चलते धरा था. इस पर विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा था. साल 2018 में बाढ़ पीड़ितों के लिए पहुंचाई जाने वाली राहत सामग्री में झोल के कारण सरकार की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो गए थे.

माओवादियों से लिंक
बता दें कि बीते वर्ष दो छात्रों के तार माओवादियों से जुड़े होने के चलते गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार हुई थी. दोनों छात्रों को जेल में 10 महीने बिताने पड़े थे. वहीं, सीपीआई (एम) की शाखा समिति के दो और सदस्यों को उनकी गिरफ्तारी के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. इस दौरान पिनराई सरकार की व्यापक निंदा हुई. जो आगामी चुनाव में परेशानी खड़ी कर सकता है.

आरक्षण विवाद
राज्य सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के फैसले से जाति, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के बीच विरोध की स्थिति पैदा हुई है. मुस्लिम समुदाय ने भी राज्य में नई नीति को लागू करने के तरीके का भी विरोध किया था. वहीं, वामपंथी-उदारवादियों ने भी इस की योग्यता पर भी सवाल उठाया था. सरकार के इस कदम से विपक्ष को बड़ा लाभ हो सकता है.

यूनिवर्सिटी में शीर्ष पदों पर विवाद
नवगठित श्री नारायण गुरु ओपन यूनिवर्सिटी में शीर्ष पदों पर नियुक्ति विवादों में घिर गई. शिक्षाकर्मियों और शिक्षाविदों के एक समूह ने नियुक्तियों के खिलाफ राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को याचिका दी. याचिका के अनुसार, मुबारक पाशा, जिनकी सिफारिश सरकार ने कुलपति के पद पर की थी उनमें यूजीसी द्वारा निर्धारित योग्यता का अभाव है. शिक्षाकर्मी और शिक्षाविद इस नियुक्ति के खिलाफ हैं. ऐसे में सरकार के लिए आगे की राह आसान नहीं दिख रही है.

कोरोनावायरस का जाल
विपक्ष राज्य में बढ़ते कोरोना के मामले में राज्य सराकर को खुलकर घेर रहा है. ऐसे में विपक्ष इन चुनावों में सरकार को नीचा दिखाने के लिए कोरोना को धार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा. इस अवधि में कोविड-19 मरीजों की अनुचित देखभाल और एंबुलेंस में महिला मरीज का बलात्कार जैसे बड़े मुद्दें हैं जो पिनराई सरकार को खतरे में डाल सकते हैं.
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