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गिर अभयारण्य में आखिर कैसे मरे 10 दिन में 13 शेर!

गिर में इसी महीने 13 शेरों की मौत हो चुकी है.

गिर में इसी महीने 13 शेरों की मौत हो चुकी है.

वन्य जीव संरक्षण करने वालों समेत राज्य की जनता के लिए इन शेरों की मौत पर गोपनीयता से कई सवाल पैदा हो रहे हैं

  • News18Hindi
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    विजयसिंह परमार

    गिर अभयारण्य में एशियाई शेरों की मौत के कारणों पर सरकार की ओर बरती जा रही गोपनीयता गुजरात के लोगों के लिए चिंता और कौतूहल का कारण बना हुआ है. यहां इसी महीने 13 शेरों की मौत के मामले सामने आए हैं.

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    वन्य जीव संरक्षण करने वालों समेत राज्य की जनता के लिए इन शेरों की मौत पर गोपनीयता से कई सवाल पैदा हो रहे हैं. हाल में ही पूर्वी गिर जोन के डलखानिया और जसाधार फॉरेस्ट रेंज में छह शावकों समेत 11 शेरों के अवशेष मिले थे.

    वन विभाग ने दावा किया कि मारे गए 13 शेरों में से छह आपस में लड़े थे. बाकी शेर लड़ाई के दौरान हुए फेफड़ों और लीवर के रोगों की वजह से मारे गए. वैसे वयस्कों समेत 13 शेरों की आपस में एक ही इलाके में लड़ाई होना बहुत ही असामन्य है. फिर भी वन विभाग अपने इस दावे पर कायम है कि शेर आपस में लडाई और फिर संक्रमण के कारण मारे गए हैं.

    इससे भी बड़ी बात है कि शेरों के अवशेष बेहद खराब हालत में मिले. यहां तक कि ये पहचान कर पाना भी मुश्किल था कि उनमें कौन शेर हैं कौन शेरनी. मारे गए 13 में से 11 डलखानिया और बाकी दो जसाधार फॉरेस्ट रेंज से मिले.



    इस दरम्यान सोमवार को को चार साल का एक शेर डलखानिया फॉरेस्ट इलाके में मरा पाया गया और शनिवार को चार साल का एक शावक बीमार देखा गया. वो भी जसाधार इलाके में एनिमल केयर सेंटर में इलाज के दौरान सोमवार को मर गया. अब मरने वाले शेरों की संख्या 13 पहुंच गई.

    न्यूज 18 से बात करते हुए प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अक्षय कुमार सक्सेना ने कहा, "शेरों की मौत में कोई संदिग्ध बात नहीं है. सभी कुदरती कारणों से मरे हैं. हमने नमूने लिए हैं और उन्हें जांच के लिए पुणे के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वाइरोलॉजी में भेज दिया है. हम पूरे गिर इलाके की जांच कर रहे हैं और कह दिया गया है कि अगर शेरों में कोई असामन्य व्यवाहर दिखता है तो उसे रिपोर्ट किया जाए."
    सभी 13 शेर 12 से 24 सितंबर के बीच गिर अभयारण्य के पूर्वी गिर डिविजन में मारे हैं.

    पिछले सप्ताह तक मीडिया से बातचीत में 21 सितंबर को वन सुरक्षा फोर्स के मुखिया जी के सिंहा ने कहा था, "शेर इलाके बनाने वाला जीव है और उनके बीच लड़ाइयां होती है. जब भी कोई शेर बूढ़ा हो जाता है या फिर कोई शेर बीमार होता है तो उनके बीच लड़ाइयां होती है. इस मामले में दो वयस्क शेर तीन शेरनी और छह शावक मिले हैं. इन शेरों की कोई असामन्य मौत नहीं है."

    जी के सिंहा ने ये भी कहा था, "शेरों की संख्या अच्छी खासी तरीके बढ़ रही है. 2010 में 411 शेर थे जबकि 2015 में की गई गिनती में संख्या बढ़ कर 523 हो गई." गुजरात वन विभाग के अधिकारियों का ये भी कहना है कि शेर हर साल 210 शावक पैदा करते हैं. इनमें से 140 कुदरती और दूसरी वजहों से मर जाते हैं. इनमें से एक तिहाई ही वयस्क होने तक जी पाते हैं.

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