दिल्ली दंगे की जांच पर उठे सवाल तो 13 पूर्व जज बोले-कुछ लोग विभाजनकारी एजेंडा चला रहे

पूर्व न्यायाधीशों का कहना है कि कुछ लोग विभाजनकारी ताकतों का साथ दे रहे हैं. (फाइल फोटो) (फाइल फोटो)
पूर्व न्यायाधीशों का कहना है कि कुछ लोग विभाजनकारी ताकतों का साथ दे रहे हैं. (फाइल फोटो) (फाइल फोटो)

विभिन्न हाईकोर्ट के 13 पूर्व न्यायाधीशों (13 Former High Court Judges) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, इनमें हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस (Former Chief Justice) भी शामिल हैं. न्यायधीशों ने लिखा है-हम कुछ पूर्व न्यायधीशों के समूह हैं, जो कुछ लोगों के विभाजनकारी एजेंडे को देख रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 11:57 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली दंगे (Delhi Riots) में लोकतांत्रिक संस्थाओं (Democratic Institution) पर उठते सवालों के मद्देनजर 13 पूर्व न्यायाधीशों (13 Former High Court Judges) ने नाराजगी जाहिर की है. विभिन्न हाईकोर्ट के 13 पूर्व न्यायाधीशों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, इनमें हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस भी शामिल हैं. न्यायधीशों ने लिखा है-हम कुछ पूर्व न्यायाधीशों के समूह हैं जो कुछ लोगों के विभाजनकारी एजेंडे को देख रहे हैं.

क्या बाले पूर्व न्यायाधीश
पूर्व न्यायाधीशों ने लिखा है कि उमर खालिद की गिरफ्तारी के संबंध में जो कुछ लोग एजेंडा सेट कर रहे हैं ये वही लोग हैं जो भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं जैसे सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और संसद को बदनाम करने का कोई मौका नहीं चूकते. न्यायधीशों का कहना है कि ऐसे लोग खुद संवैधानिक पदों पर रह चुके हैं और विभाजनकारी एजेंडे को समर्थन दे रहे हैं. ऐसे लोग इस खयाल में जीते हैं कि देश की सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं को उनके हिसाब से काम करना चाहिए.

उमर खालिद की गिरफ्तारी पर ये दी प्रतिक्रिया
पूर्व न्यायाधीशों ने कहा है कि दिल्ली दंगों के संबंध में एक के बाद देशविरोधी गतिविधियों का खुलासा हो रहा है. लेकिन इसी बीच बार-बार जांच प्रक्रिया और ट्रायल पर सवाल खड़े कर संदेह पैदा करने की कोशिश की जा रही है. उमर खालिद के संदर्भ में ये समझा जाना चाहिए कि बेल के लिए न्यायव्यवस्था में पूरी प्रक्रिया दी हुई. न्याय प्रक्रिया के दौरान किसी को दोषी सिर्फ सबूतों के आधार पर ही सिद्ध किया जा सकता है. फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का मतलब ये नहीं कि इससे किसी भी अपराध को करने या उसे बढ़ावा देनी की छूट मिल जाती है. राष्ट्रीय एकता को कुछ लोगों की विशेष सोच की कीमत पर बलिदान नहीं किया जा सकता है.





ये हैं खत लिखने वाले पूर्व जज
बी.सी पाटिल (दिल्ली और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस), के.आर. व्यास (मुंबई हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस), प्रमोदी कोहली (सिक्किम हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और सीएटी के चेयरमैन), एस.एम सोनी (गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और गुजरात के लोकायुक्त). इनके अलावा भी विभिन्न हाईकोर्ट के जजों ने इस खत पर हस्ताक्षर किए हैं.



कई पूर्व आईपीएस भी लिख चुके हैं खत
गौरतलब है कि दिल्ली दंगे में पुलिसिया जांच पर उठते सवालों को लेकर कई पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों ने भी खत लिखकर नाराजगी जाहिर की थी. अधिकारियों का कहना था कि बाहरी प्रेशर बनाकर जांच की प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जाना चाहिए.
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