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    14 साल की भारतीय मूल की अमेरिकी छात्रा की खोज से कोरोना के इलाज में मिल सकती है मदद

    14 साल की अनिका चेबरोलू ने 25,000 अमेरिकी डॉलर का इनाम जीता है
    14 साल की अनिका चेबरोलू ने 25,000 अमेरिकी डॉलर का इनाम जीता है

    Coronavirus Cure: अनिका जब 8वीं कक्षा में थी तब उन्होंने अपना प्रोजेक्ट जमा किया था - लेकिन यह शुरू में कोविड -19 का इलाज खोजने पर केंद्रित नहीं था. प्रारंभ में, उसका लक्ष्य एक लीड कंपाउंड की पहचान करने के लिए इन-सिलिको विधियों का उपयोग करना था जो इन्फ्लूएंजा वायरस के प्रोटीन से बंध सकता था.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 19, 2020, 7:09 PM IST
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    ह्यूस्टन. भारतीय मूल की अमेरिकी किशोरी (Indian-American young scientist) ने एक अनोखी खोज के लिए 25,000 अमेरिकी डॉलर का इनाम जीता है. यह खोज कोविड-19 (Covid-19) का एक संभावित उपचार प्रदान कर सकती है. अमेरिका के टेक्सास प्रांत की रहने वाली 14 साल की अनिका चेबरोलू (Anika Chebrolu) को यह राशि ‘3एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज’ में शीर्ष 10 में आने के लिए मिली है. यह अमेरिका की एक प्रमुख माध्यमिक विद्यालय विज्ञान प्रतियोगिता है.

    ‘3एम’ मिनेसोटा स्थित एक अमेरिकी विनिर्माण कंपनी है.‘3एम चैलेंज वेबसाइट’ के अनुसार पिछले साल एक गंभीर ‘इन्फ्लूएंजा’ संक्रमण से जूझने के बाद चेबरोलू ने यंग साइंटिस्ट चैलेंज में हिस्सा लेने का फैसला किया. वह ‘इन्फ्लूएंजा’ का इलाज खोजना चाहती थी. कोविड-19 के बाद सब बदल गया और सार्स-सीओवी-2 संक्रमण पर ध्यान केन्द्रित किया. उन्हें इनामी राशि के साथ ही ‘3एम’ की विशेष मेंटरशीप भी मिली है. चेबरोलू ने कहा, ‘‘मैं अमेरिका के शीर्ष युवा वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होकर खुश हूं.’’

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    8वीं कक्षा में जमा किया था प्रोजेक्ट
    सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अनिका का जीतने वाला आविष्कार एक लीड अणु की खोज करने के लिए इन-सिलिको पद्धति का उपयोग करता है जो चुनिंदा रूप से SARS-CoV-2 वायरस के स्पाइक प्रोटीन से बंध सकता है.

    अनिका जब 8वीं कक्षा में थी तब उन्होंने अपना प्रोजेक्ट जमा किया था - लेकिन यह शुरू में कोविड -19 का इलाज खोजने पर केंद्रित नहीं था. प्रारंभ में, उसका लक्ष्य एक लीड कंपाउंड की पहचान करने के लिए इन-सिलिको विधियों का उपयोग करना था जो इन्फ्लूएंजा वायरस के प्रोटीन से बंध सकता था.



    कोरोना को बढ़ते देख बदली खोज की दिशा

    अनिका ने कहा "महामारी, वायरस और दवाओं की खोज में इतना समय बिताने के बाद, यह सोचना बहुत अजीब था कि मैं वास्तव में ऐसी किसी परिस्थित में जी रही हूं." अनिका ने सीएनएन को बताया कि "कोविड -19 महामारी की अत्यधिक गंभीरता और जैसे इसने इतने कम समय में दुनिया पर भारी प्रभाव डाला, इसे देखते हुए मैंने SARS-CoV-2 वायरस को लक्षित करने के लिए दिशा बदल दी."

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    अनिका ने कहा कि वह 1918 फ्लू महामारी के बारे में जानने और यह पता लगाने के लिए प्रेरित हुई थी कि बाजार में वार्षिक टीकाकरण और एंटी-इन्फ्लूएंजा दवाओं के बावजूद अमेरिका में हर साल कितने लोगों की मौत होती है.

    दादा के चलते साइंस से इतना प्यार
    14 साल की अनिका को विज्ञान के लिए प्रेरणा और उत्साह उनके दादा से आता है, उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि “जब मैं छोटी थी मेरे दादा हमेशा मुझपर साइंस के लिए दबाव बनाते थे. वह वास्तव में एक रसायन विज्ञान के प्रोफेसर थे, और वह हमेशा मुझे तत्वों की पीरियॉडिक टेबल जानने और विज्ञान के बारे में इन सभी चीजों को सीखने के लिए कहा करते थे और समय के साथ, मैं बस इसे प्यार करती गई.”

    महामारी के बारे में, अनिका ने कहा कि, "हर किसी की तरह, हम भी चाहते हैं कि हम जल्द ही अपने सामान्य जीवन में लौट जाएं." (भाषा के इनपुट सहित)
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