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14 years job after studying agricultural science now earning a lot by setup farming related industries

14 साल MNC में जॉब करने के बाद पकड़ी खेतों की राह, अब सैकड़ों लोगों की बढ़ा रहे हैं आमदनी

पढ़ाई का सदुपयोग करने की इच्छा से राजेश सिंह ने खेती और उससे जुड़े व्यवसायों की ओर बढ़ाया कदम

पढ़ाई का सदुपयोग करने की इच्छा से राजेश सिंह ने खेती और उससे जुड़े व्यवसायों की ओर बढ़ाया कदम

औरंगाबाद के नबीनगर प्रखंड के गोगो गांव के रहनेवाले राजेश सिंह ने ऊषा मार्टिन की अपनी नौकरी जब छोड़ी तब उनका वेतन एक लाख रुपये महीने से ऊपर था. जबकि आज उनका टर्नओवर करीब एक करोड़ रुपये है.

औरंगाबाद. देश में ज्यादातर उच्च शिक्षित युवा अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उसके व्यावहारिक और व्यापारिक उपयोग के बजाए नौकरी करना पसंद करते हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार के ज्यादातर युवाओं की तरह ही औरंगाबाद के राजेश सिंह ने उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद नौकरी की ओर ही रूख किया. पहले तो राजेश सिंह ने कृषि विज्ञान में एमएससी किया और फिर एग्री बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की. इसके बाद वे लगातार 14 साल तक निजी क्षेत्र में नौकरियां करते रहे. पढ़ाई में शुरू से मेधावी रहे राजेश सिंह ने आईसीएआर द्वारा आयोजित अखिल भारतीय संयुक्त परीक्षा में सफलता हासिल करके बीएससी-एजी और एमएससी-एजी की पढ़ाई की थी. उन्होंने कई कंपनियों के सीएसआर प्रोजेक्ट के तहत बिहार और बंगाल में हजारों किसानों को खेती के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी और उनको बाजार से जुड़ने के लिए प्रशिक्षित भी किया.

फिलहाल एक समय ऐसा भी आया जब अपने प्रोफेशनल करियर में काफी सफल माने जा रहे राजेश सिंह को लगा कि उन्होंने जो पढ़ाई की है, उसका उपयोग करके उनको अपना खुद का कोई काम का शुरू करना चाहिए. इसके लिए उन्होंने खेती और उससे जुड़े व्यावसाय में उतरने का फैसला किया. राजेश सिंह ने जब खेती और उससे जुड़े व्यवसाय में उतरने का फैसला किया तो उनको अपने परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा. इसका सबसे बड़ा कारण है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में आम लोगों के बीच नौकरी को प्राथमिकता देने की मानसिकता बहुत प्रबल है.

औषधीय पौधों से तेल निकाल कर की कमाई
बहरहाल अपने फैसले पर कायम रहते हुए राजेश सिंह ने सबसे पहले तो धान और मेंथा की खेती और उसकी प्रोसेसिंग शुरू करवाई. उन्होंने अधुनिक पद्धति से धान की खेती करवा कर उपज में बढ़ोतरी और लागत में कमी करने का काम सफलता से किया. मेंथा के साथ ही राजेश सिंह ने तुलसी, लेमनग्रास और पुदीना का तेल निकालकर बिहार, बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में बेचा. मूलतः औरंगाबाद जिले के नबीनगर प्रखंड के गोगो गांव के रहनेवाले राजेश सिंह ने ऊषा मार्टिन की अपनी नौकरी तब छोड़ दी जब उनका वेतन एक लाख रुपये महीने से ऊपर था. जबकि आज उनका सालाना टर्नओवर करीब एक करोड़ रुपये है.

Rajesh Singh

मशरूम उगाने और प्रोसेसिंग से मिल रहा सैकड़ों को रोजगार
धान की खेती और औषधीय तेलों के कारोबार में सफलता हासिल करने के बाद राजेश सिंह ने बेबी कॉर्न, मशरूम और मोरिंगा की खेती और उनकी प्रोसेसिंग से प्रोडक्ट तैयार करने की ओर अपने कदम बढ़ाए. बेबी कॉर्न और मशरूम चूंकि बहुत जल्द खराब होने वाले प्रोडक्ट हैं, इसलिए इनकी प्रोसेसिंग पर राजेश सिंह ने विशेष ध्यान दिया. मशरूम के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राजेश सिंह ने किसानों और खासकर महिलाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया. उन्होंने ऐसे लोगों की मदद करने का अनोखा तरीका निकाला है जो मशरूम की खेती तो करना चाहते हैं, लेकिन उसके लिए खाद तैयार करने और बीज को सही तरीके से लगाने में असमर्थ हैं. राजेश सिंह ने खाद और बीज के साथ लोगों को तैयार पाली बैग देना शुरू किया है. इससे लोगों को केवल इसे नमी और अंधेरे वाली जगह पर रखकर इसमें पानी छिड़कना होता है. अब राजेश सिंह ने अपना पूरा ध्यान मशरूम की प्रोसेसिंग की तरफ लगाया है. मशरूम उगाने के लिए उन्होंने 1200 महिलाओं को प्रशिक्षित किया है. केवल मशरूम उगाने के लिए ही उनके साथ जुड़े सैकड़ों लोगों की आय बढ़ रही है.

Rajesh Singh

कांट्रैक्ट फॉर्मिंग से किसानों को जोड़ा
राजेश सिंह ने कांट्रैक्ट फॉर्मिंग में भी कदम रखा और गया में उन्होंने किराए पर जमीन लेकर अपना महात्मा बुद्ध कृषि और कृषि व्यवसाय केंद्र शुरू किया. उनके केंद्र पर रोजाना 150 किलो मशरूम की पैदावार होती है. इसके अलावा औषधीय पौधों और बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की खेती होती है. उन्होंने गया जिले के कई प्रखंडों के किसानों को अपने साथ जोड़कर बेबी कॉर्न, मशरूम, मेंथा, तुलसी, लेमन ग्रास और अन्य सुगंधित औषधीय फसलों की खेती को शुरू कराई है. इस तरह राजेश सिंह ने न केवल अपना व्यापार खड़ा किया बल्कि वे कई किसानों को अपने साथ जोड़कर ऐसी फसलों के उत्पादन को बढ़ा रहे हैं, जिनसे उनकी आय बढ़े.

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शिक्षा का सदुपयोग करने की इच्छा से मिली सफलता
राजेश सिंह ने कृषि विज्ञान की उच्च शिक्षा हासिल की है, इसलिए उन्हें खेती में हर तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी है. आज उनके साथ सैकड़ों किसान जुड़े हैं और खेती के उन्नत तरीकों का उपयोग कर रहे हैं. अपनी नौकरी के दौरान भी राजेश सिंह कंपनियों के सीएसआर प्रोजेक्ट के तहत बिहार, बंगाल और झारखंड में किसानों को आय बढ़ाने के लिए उन्नत खेती के तरीके सिखाते थे. राजेश सिंह ने अब तक करीब 7 हजार किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रशिक्षित भी किया है. राजेश सिंह चाहते हैं कि उन्होंने जो पढ़ाई की है उसका पूरा सदुपयोग हो. इसलिए ही उन्होंने खेती और उससे जुड़े व्यवसायों की ओर कदम बढ़ाया है. उनका कहना है कि बिहार में खेती और उससे जुड़े उद्योगों की बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं. आज जरूरत केवल ऐसे नौजवानों की है, जो इस दिशा में काम करने के लिए आगे आएं.

Tags: Farmer story, Farming in India, Mushroom, News18 Hindi Originals

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