अनशन पर टीम अन्ना, लेकिन जंतर मंतर से भीड़ गायब!

भ्रष्टाचार के खिलाफ टीम अन्ना की लड़ाई में इस बार पहले जैसा जोश नदारद है। दिल्ली के जंतर मंतर पर टीम अन्ना के अनशन के दूसरे दिन आज उम्मीद से काफी कम भीड़ जुटी।

  • News18India
  • Last Updated: July 26, 2012, 11:12 AM IST
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नई दिल्ली।भ्रष्टाचार के खिलाफ टीम अन्ना की लड़ाई में इस बार पहले जैसा जोश नदारद है। दिल्ली के जंतर मंतर पर टीम अन्ना के अनशन के दूसरे दिन आज उम्मीद से काफी कम भीड़ जुटी। यहां तक कि टीम अन्ना की ताकत समझे जाने वाले आम शहरी युवा भी नजर नहीं आए, जिन्होंने पिछली बार बढ़-चढ़कर अन्ना के आंदोलन में हिस्सा लिया था। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या अन्ना का जादू उतार पर है?

दिल्ली के जंतर मंतर पर मजबूत लोकपाल और भष्ट्राचार के मुद्दे पर टीम अन्ना का अनशन जारी है, लेकिन इस बार नजारा बदला हुआ है। गुरुवार को अनशन के दूसरे दिन जंतर मंतर पर भीड़ वैसी नहीं थी, जो पिछले साल हुए अनशन के दौरान दिखी थी। जो लोग थे भी, उनमें दिल्ली के आम शहरियों से ज्यादा हरियाणा और उत्तर प्रदेश के गावों से आए लोग ज्यादा थे। टीम अन्ना के लिए सबसे बड़ा झटका ये भी है कि उसकी मुहिम में दिल्ली के आम युवा और महिलाएं फिलहाल दूरी बनाए हुए हैं। हालांकि टीम को भरोसा है कि जल्दी ही जंतर-मंतर पर वैसी ही भीड़ होगी जिसने पिछली बार केंद्र सरकार को झुका दिया था।

उधर, टीम अन्ना के आंदोलन के फीकेपन से सरकार का चेहरा खिल उठा है। अनशन शुरू होने से पहले सरकार खुल कर बोलने से बच रही थी। लेकिन अब जन समर्थन न मिलता देख सरकार ने हमले तेज कर दिए हैं। अनशन पर बैठने वाले अरविंद केजरवाल डायबिटीज के मरीज हैं। भूखे रहने से उनकी तबीयत बिगड़ सकती है। लेकिन सरकार को परवाह नहीं है। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि केन्द्र सरकार डायबिटीज का इलाज नहीं करती। केन्द्र सरकार अपना दायित्व निभाती है।



हालांकि, ये भी सच है कि अन्ना हजारे खुद अभी अनशन पर नहीं बैठे हैं। उन्होंने सरकार को 29 जुलाई तक की मोहलत दी है। गुरुवार को अरविंद भी अनशन स्थल पर न होकर मुकदमे की पेशी में बुलंदशहर गए थे। अनशन पर केवल गोपाल राय और मनीष सिसौदिया ही थे। लेकिन पिछली बार जैसा स्वत:स्फूर्त समर्थन का ज्वार नदारद दिखने से कुछ सवाल तो खड़े ही हो गए हैं। सवाल ये कि क्या अन्ना का जादू खत्म हो गया है?क्या लोगों को अरविंद केजरीवाल की अगुआई पसंद नहीं?क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए लोगों का जज्बा मर चुका है?
बहरहाल टीम अन्ना जंतर मंतर पर डटी हुई है। उसे लोगों पर पूरा भरोसा है। वैसे भी, ये आम लोग ही हैं जो टीम अन्ना के आंदोलन की दिशा या सरकार की दशा अंतिम रूप से तय करेंगे।
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