जम्मू कश्मीर: 15 विदेशी राजनयिकों से मिलने वाले नेताओं को महबूबा ने PDP से निकाला

जम्मू कश्मीर: 15 विदेशी राजनयिकों से मिलने वाले नेताओं को महबूबा ने PDP से निकाला
जम्मू-कश्मीर से जुड़े राजनयिकों के एक दौरे पर विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी.

राजनयिकों का यह दौरा कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के दुष्प्रचार को गलत साबित करने की सरकार के कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 9, 2020, 6:23 PM IST
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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने के बाद भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ आई जस्टर (Kenneth juster) समेत 15 देशों के राजनयिक मौजूदा स्थिति का मुआयना करने गुरुवार को श्रीनगर (Srinagar) पहुंचे. राजनयिकों का दौरा शुरू होने के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश ने एक प्रेस वार्ता में कहा, 'भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में 15 राजदूतों की यात्रा कराई गई. यह गाइडेड टूर नहीं है. इसमें अमेरिका, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, बांग्लादेश, मालदीव, मोरक्को, फिजी, नॉर्वे, फिलीपींस, अर्जेंटीना, पेरू, नाइजरिया, नाइजीरिया, टोगो और गुयाना के दूत शामिल हैं.'

उधर खबर आ रही है 15 राजनयिकों के इस दल से मुलाक़ात करने वाले पीडीपी सदस्यों को महबूबा मुफ़्ती ने पार्टी से सस्पेंड कर दिया है. पीडीपी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट के जरिए इसकी जानकारी दी है. सस्पेंड किए गए नेताओं में दिलवार मीर, रफ़ी अहमद मीर, ज़फर इकबाल, चौधरी कमर हुसैन, राजा मंजूर और जावेद बेग समेत कई अन्य भी शामिल हैं.

 





विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ने कश्मीर के दौरे के लिए 15 विदेशी राजनयिकों को भेजने की व्यवस्था की जिसका मकसद यह था कि वे हालात को सामान्य बनाने के प्रयासों का जमीनी स्तर पर अनुभव कर सकें. मंत्रालय ने उन आलोचनाओं को बेबुनियाद बताया कि यह प्रायोजित था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि राजनयिक एक समूह में कश्मीर जाना चाहते थे, ऐसे में 15 विदेशी राजनयिकों को भेजने की व्यवस्था की गई. उन्होंने कहा कि कश्मीर की यात्रा के लिये ऐसा ही एक आयोजन भविष्य में यूरोपीय संघ के राजनयिकों के संदर्भ में हो सकती है.

उन्होंने कहा कि राज्य में सुरक्षा स्थिति का जायजा लेने के लिए सुरक्षा अधिकारियों के साथ पहली बैठक हुई. सभी ने आतंकवाद को शांति के लिए खतरा बताया. कुमार ने बताया कि राजनयिकों की यात्रा का उद्देश्य यह था कि वह सरकार द्वारा किये गए प्रयासों को स्वतः देखें.

यूरोपीय यूनियन से जुड़े सवाल पर दिया जवाब
कुमार ने जानकारी दी कि शुक्रवार को यह दल जम्मू पहुंचेगा. उन्होंने बताया, 'दिल्ली में मौजूद कुछ राजनयिकों ने जम्मू और कश्मीर जाने की इच्छा जताई थी. इसके बाद सरकार ने यह फैसला किया.' रवीश कुमार ने बताया, 'राजनयिकों ने सिविल सोसायटी, लोकल मीडिया और स्थानीय नेताओं से भी मुलाकात की.'

राजनयिकों के इस दौरे में यूरोपीय यूनियन के डिप्लोमैट्स के शामिल ना होने से जुड़े सवाल पर कुमार ने कहा, 'वह एक समूह में जाना चाहते थे. उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों के चलते राजनयिकों के ग्रुप को बड़ा नहीं किया जा सकता था. कई राजनयिकों ने यह भी कहा कि उन्हें इसकी जानकारी पहले से नहीं थी. हम कोशिश करेंगे कि क्या ऐसा दौरा आगे कराया जा सकता है या नहीं.'

रवीश कुमार ने कहा कि विदेशी राजनयिकों ने इस यात्रा के दौरान सुरक्षा अधिकारियों, राजनीतिक नेताओं, नागरिक संस्थाओं और स्थानीय मीडिया से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के लिए मौजूदा स्थिति का जमीनी अनुभव के लिये राजनयिकों का दौरा आयोजित किया गया. यह पूछने पर कि राजनयिकों से किन राजनीतिक नेताओं ने मुलाकात की, प्रवक्ता ने कहा कि राजनयिकों का कश्मीर दौरा अभी पूरा नहीं हुआ है. मंत्रालय ने बताया कि राजनयिकों ने जम्मू कश्मीर के विभिन्न वर्गो एवं नागरिक समाज के लोगों से बात की. शुक्रवार को दिल्ली लौटने से पहले समूह जम्मू में और बैठकें करेगा.

ईरान पर भी दिया जवाब
ईरान और अमेरिका के मुद्दे पर कुमार ने कहा कि हम स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं. क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. हम चाहेंगे कि विवादास्पद स्थिति जल्द से जल्द ख़त्म हो जाए. उन्होंने कहा, 'पिछले दिनों अमेरिका ने चाबहार परियोजना के महत्व पर समझ दिखाई. पूरी बात किस तरह असर डालती है, यह हमें देखना होगा. लेकिन, हम प्रतिबंधों से अमेरिका के चाबहार बंदरगाह को छूट देने की सराहना करते हैं.'

विपक्ष ने लगाया था आरोप
बता दें कि कांग्रेस ने कई प्रमुख देशों के राजनयिकों के जम्मू-कश्मीर दौरे को लेकर गुरुवार को सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि ‘गाइडेड टूर’ बंद होना चाहिए और केंद्रशासित प्रदेश में सार्थक राजनीतिक गतिविधि आरंभ करनी चाहिए.

नेता जयराम रमेश ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमारी आपत्ति राजनयिकों के इस दौरे के विषय में नहीं है. हमारी आपत्ति यह है कि जब हमारे नेता और सांसद जम्मू-कश्मीर नहीं जा सकते तो फिर दूसरे देशों के राजदूतों को ले जाने का क्या मतलब है.’

PDP ने साधा निशाना
पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने बृहस्पतिवार को कहा कि विभिन्न देशों के दूतों का जम्मू-कश्मीर दौरा घाटी में सरकार द्वारा किए गए बंद को सामान्य दिखाने का प्रयास है. पीडीपी ने केंद्र को चुनौती दी कि वह दूतों को हिरासत में रखे गए राजनीतिक नेताओं से मुलाकात करने की इजाजत दे. पीडीपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'आज प्रधानमंत्री कार्यालय दूतों के दूसरे जत्थे को कश्मीर में हालात ‘दिखाने’ लाया, यह सरकार द्वारा किए गए बंद को सामान्य दिखाने का प्रयास लगता है. प्रधानमंत्री कार्यालय को चुनौती देते हैं कि क्या वे इन विदेशी दूतों को 160 दिन से जेल में बंद राजनीतिक बंदियों से मुलाकात करने देंगे?'

पीडीपी ने उपराज्यपाल जी.सी. मुर्मू से इस हफ्ते बुखारी के नेतृत्व में पार्टी से अलग हो चुके नेताओं की मुलाकात के बारे में टिप्पणी की. उसने कहा, 'सरकार ने उन लोगों को जेल में डाला जिन्होंने लोकतंत्र के लिए काम किया और उन कठपुतलियों को ले आई जो बेहद सस्ते में बिकने को तैयार हैं.' उसने कहा, 'सरकार को समझना चाहिए कि जो वास्तव में कश्मीर की मिट्टी से प्रेम करते हैं वह बिकाऊ नहीं हैं.'

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