मसूरी और उसके आसपास के 15 प्रतिशत इलाकों में भूस्खलन का खतरा

मसूरी और उसके आसपास के 15 प्रतिशत इलाकों में भूस्खलन का खतरा
मसूरी देश का लोकप्रिय हिल स्टेशन है. (तस्वीर विकीपीडिया से साभार)

आपदा खतरे को देखते हुए वैज्ञानिकों (Scientists) ने मसूरी (Mussoorie) और आसपास के इलाके में भूस्खलन की आशंका का आकलन किया जिससे पता चला कि 15 प्रतिशत इलाकों में भूस्खलन का खतरा है.

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  • Last Updated: August 31, 2020, 11:45 PM IST
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नई दिल्ली. वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (Wadia Institute of Himalayan Geology-WIHG) के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि उत्तराखंड के हिल स्टेशन मसूरी (Mussoorie) और आसपास के 15 प्रतिशत इलाकों पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है. संस्थान की ओर से सोमवार को जारी बयान के मुताबिक भाटाघाट, जॉर्ज एवरेस्ट, केम्टी फॉल, खट्टापानी , लाइब्रेरी, गलोगीधर और हाथीपांव की बस्तियों पर बहुत अधिक भूस्खलन संभावित क्षेत्र है क्योंकि यहां पर खंडित चूना पत्थर की चट्टानें हैं और 60 डिग्री की ढलान है.

15 प्रतिशत इलाकों में भूस्खलन का खतरा
अध्ययन के मुताबिक मसूरी जैसे पहाड़ी शहर लोकप्रिय हिल स्टेशन हैं और यहां कई बार भूस्खलन हो चुका है. इसकी वजह संभवत: विकास गतिविधियां हैं. बयान के मुताबिक, ‘आपदा खतरे को देखते हुए वैज्ञानिकों ने मसूरी और आसपास के इलाके में भूस्खलन की आशंका का आकलन किया जिससे पता चला कि 15 प्रतिशत इलाकों में भूस्खलन का खतरा है.’

29 प्रतिशत इलाकों में मध्यम दर्जे के भूस्खलन की आशंका
बयान के मुताबिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन डब्ल्यूआईएचजी के वैज्ञानिकों ने मसूरी शहर और आसपास के 84 वर्ग किलोमीटर के लघु हिमालय क्षेत्र का अध्ययन किया. भूस्खलन संवेदनशीलता मानचित्रण (एलएसएम) को जर्नल ऑफ अर्थ सिस्टम साइंस में प्रकाशित किया गया है जिसके मुताबिक 29 प्रतिशत इलाकों में मध्यम दर्जे के भूस्खलन की आशंका है जबकि 56 प्रतिशत इलाके में भूस्खलन की सबसे कम आशंका है.
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