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धधक रहा है कोयला और आंच में झुलस रही है सरकार!

News18India
Updated: August 27, 2012, 4:49 PM IST

उन्होंने संसद के दोनों सदनों में बयान देकर साफ कहा कि वो इस मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं लेकिन बीजेपी सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाने के लिए उनपर आधारहीन आरोप लगा रही है और संसद नहीं चलने दे रही है।

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  • Last Updated: August 27, 2012, 4:49 PM IST
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नई दिल्ली। कोयला खदानों को निजी कंपनियों को बांटने पर उठे बवाल पर सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपना मौन तोड़ा। उन्होंने संसद के दोनों सदनों में बयान देकर साफ कहा कि वो इस मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं लेकिन बीजेपी सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाने के लिए उनपर आधारहीन आरोप लगा रही है और संसद नहीं चलने दे रही है।

15 दिन पहले कोयले ने चिंगारी पकड़ी और अब धधकने लगा है। सरकार का दामन झुलसने लगा है। लिहाजा सोमवार को कोयला वार का अनोखा दृश्य नजर आया। पहले प्रधानमंत्री सरकार के बचाव मेँ उतरे, फिर बीजेपी को दो सेनापतियों ने उनकी दलीलें खारिज करते हुए उलटे कठघरे में ला खड़ा किया। उसके बाद सरकार के तीन सेनापतियों ने जवाबी रण संभाला। एक साथ उतर कर बीजेपी की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए।

पहला हमला खुद प्रधानमंत्री ने किया। उन्होंने चुप्पी तोड़ी और कोयला खदानों के आवंटन पर मचे हल्ले के बीच अपनी जिम्मेदारी मानी लेकिन खुद पर लगे सारे आरोपों की धुर्रियां उड़ा दीं। कहा बीजेपी खुद कोयले की कोठरी में खड़ी है, उसका दामन दागदार है। अंदाज भले ही शायराना हो लेकिन सटीक था। प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रखी....।



प्रधानमंत्री ने विपक्ष के हल्ले के बीच संसद में बयान दिया, लेकिन बयान पूरा न कर सके, सो 31 बिंदुओँ वाला अपना लंबा चौड़ा जवाब सदन के पटल पर रख दिया। लेकिन दोनों ही खबरें खारिज करते हुए कांग्रेस ने पीएम के इर्दगिर्द किलेबंदी कर दी और तीन मंत्रियों को एकसाथ उतार दिया। कोयले का रण और तीखा हो गया। पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल और अंबिका सोनी। तीनों ने साफ कहा कि प्रधानमंत्री विपक्ष के हर आरोप का जवाब दे चुके हैं। विपक्ष उस जवाब को गंभीरता से पढ़े और सदन को चलने दे, बहस से न भागे।



वहीं, लेफ्ट का कहना है कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही एक ही थैली के चट्टेबट्टे हैं, ये दोनों आपस में लड़ इसीलिए रहे हैं ताकि जनता का ध्यान कोयले में नुकसान से ज्यादा राजनीतिक अस्थिरता और बयानों की इस विष बेल पर ही टिक कर रह जाए।

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First published: August 27, 2012, 4:49 PM IST
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