रेप के लिए फांसी की सजा पर राज्यों में नहीं बन पाई सहमति

बलात्कर जैसे जघन्य अपराध के लिए फांसी की सजा पर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। शुक्रवार को दिल्ली में हुई पुलिस महानिदेशकों की बैठक में लगभग सभी ने बलात्कारियों को उम्रक़ैद की सजा को ज्यादा कारगर बताया।
बलात्कर जैसे जघन्य अपराध के लिए फांसी की सजा पर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। शुक्रवार को दिल्ली में हुई पुलिस महानिदेशकों की बैठक में लगभग सभी ने बलात्कारियों को उम्रक़ैद की सजा को ज्यादा कारगर बताया।

बलात्कर जैसे जघन्य अपराध के लिए फांसी की सजा पर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। शुक्रवार को दिल्ली में हुई पुलिस महानिदेशकों की बैठक में लगभग सभी ने बलात्कारियों को उम्रक़ैद की सजा को ज्यादा कारगर बताया।

  • News18India
  • Last Updated: January 4, 2013, 4:32 PM IST
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नई दिल्ली। बलात्कर जैसे जघन्य अपराध के लिए फांसी की सजा पर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। शुक्रवार को दिल्ली में हुई पुलिस महानिदेशकों की बैठक में लगभग सभी ने बलात्कारियों को उम्रक़ैद की सजा को ज्यादा कारगर बताया। उधर सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के मामलों को तय समय सीमा में निपटाने के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस भेजा है।
दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद देशभर में भले ही बलात्कारियों को फांसी दिए जाने की मांग उठ रही हो, लेकिन पुलिस के आला अफसरों का नज़रिया अलग है। शुक्रवार को गृहमंत्रालय की बुलाई, सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की बैठक में बलात्कारियों को फांसी दिए जाने की मांग पर सहमति नहीं बन पाई। बैठक में लगभग सभी राज्य इस प्रस्ताव को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं दिखे।उनके मुताबिक़ फांसी की सज़ा के प्रावधान से इन मामलों में सज़ा दिलाना ज्यादा मुश्किल हो सकता है। उम्र क़ैद की सज़ा ज्यादा क़ारगर हो सकती है।
बैठक में राज्य पुलिस बलों को महिलाओं से जुड़े अपराधों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होने पर ज़ोर दिया गया। वहीं ऐसे मामलों के निपटारे में हो रही देरी पर भी चिंता जताई गई। गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के मुताबिक मैनें सज़ा मिलने की दर में कमी पर चिंता जतायी है और इसके कारणों पर ध्यान देने को कहा है। वहीं बलात्कार के मामलों को तय समयसीमा के तहत निपटाने से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस भेजा है और चार हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है।
उधर बालिग होने की उम्र सीमा को 18 से घटाकर 16 करने की मांग को समर्थन मिलने लगा है। सूत्रों के मुताबिक़ पुलिस महानिदेशकों की बैठक में उत्तर प्रदेश के ऐसे ही एक प्रस्ताव को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों का समर्थन मिला। इसी मामले में दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर ने भी केंद्र सरकार को चिठ्ठी लिखी है। उनका सुझाव है कि जुर्म के मामले में 16 साल से कम उम्र के बच्चों को ही नाबालिग माना जाए। इस प्रस्ताव को कांग्रेस सहित कई अन्य राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ के मुताबिक बालिग या नाबालिग होना, ऐसे मामलों में सख्त सज़ा होनी चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी के मुताबिक बालिग होने की उम्र सीमा पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत है।
उधर गृह मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति की भी शुक्रवार को बैठक हुई। समिति के सामने पेश होते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त ने बताया कि राजधानी में पुलिस बल की संख्या कम होना, सबसे बड़ी समस्या है। समिति ने सीआरपीसी संशोधन विधेयक की समीक्षा करने का भी फ़ैसला किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस देते वक्त एक और अहम आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि जिन सांसदों और विधायकों पर बलात्कार के मामले में चार्जशीट दायर की गई है क्या उन्हें अयोग्य करार दे दिया जाए। कोर्ट ने ये आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया जिसमें सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि ऐसे नेताओं को अयोग्य करार दे दिया जाए।



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