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17 वर्षीय पायल जांगिड़ बनी “गोलकीपर्स ग्लोबल गोल्स चेंजमेकर” अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय

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Updated: September 25, 2019, 1:39 PM IST
17 वर्षीय पायल जांगिड़ बनी “गोलकीपर्स ग्लोबल गोल्स चेंजमेकर” अवॉर्ड  जीतने वाली पहली भारतीय
“गोलकीपर्स ग्लोबल गोल्स चेंजमेकर” अवार्ड जीतने वाली पहली भारतीय : पायल जांगिड़

कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन संचालित बाल मित्र ग्राम की पायल को बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने किया सम्‍मानित.

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  • Last Updated: September 25, 2019, 1:39 PM IST
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नई दिल्‍ली. राजस्थान के सुदूर हिंसला बाल मित्र ग्राम (बीएमजी) का प्रतिनिधित्‍व करने वाली 17 वर्षीय पायल जांगिड़ को न्यूयॉर्क में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से ‘चेंजमेकर’ पुरस्कार दिया गया है. यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्‍हें उनके गांव हिंसला और अन्य पड़ोसी गांवों में बाल विवाह को रोकने की दिशा में किए गए उल्‍लेखनीय कार्यों के लिए दिया गया है.

पायल को यह सम्‍मान न्यूयॉर्क में “गोलकीपर्स ग्लोबल गोल्स अवार्ड्स” 2019 समारोह में दिया गया. गौरतलब है कि उसी दिन भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी प्रतिष्ठित ग्लोबल गोलकीपर पुरस्कार से विभूषित किया गया है.



पायल नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्‍यार्थी द्वारा शुरू किए गए बीएमजी में रहती है. इस सम्‍मान को प्राप्‍त करने पर वह अपनी खुशी को साझा करते हुए कहती है कि मैं अपने गुरुओं, श्री कैलाश सत्यार्थी और श्रीमती सुमेधा कैलाश के प्रति अत्यंत कृतज्ञ हूं, जिन्होंने मुझे बाल अधिकारों के प्रचार की दिशा में काम करने का अवसर प्रदान किया. उनके समर्थन के कारण मैं बाल विवाह का विरोध कर सकी और अपनी शादी भी रोक पायी. उनके द्वारा प्रोत्साहित करने के कारण मैं आज बच्चों के सामाजिक शोषण का विरोध कर पाती हूं.

बाल संसद की अध्यक्ष के रूप में पायल अपने गांव और पड़ोस के गांवों की महिलाओं और बच्चों को सशक्त करने के उद्देश्‍य से पिछले कई सालों से कई गतिविधियों को अंजाम देती रहींं हैं. पायल के माता-पिता ने 11 साल की उम्र में ही जब उनकी शादी करने का फैसला किया, तब उन्‍होंने अपने बाल विवाह का जबरदस्‍त विरोध किया. परिणामस्‍वरूप पायल के माता-पिता को उनकी शादी रोकनी पड़ी.



इस प्रकार पायल ने अपने गांव और आस-पास के क्षेत्रों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान शुरू किया. उन्‍होंने महिलाओं के कई समूहों और आसपास के गांवों के युवा मंचों को साथ लेकर रैलियों, धरनों और संगठित विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाई. आज के दिन वह बाल अधिकारों की वकालत करते हुए तथा उनके साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए बच्‍चों को गोलबंद करने में जुटी हुई है. पायल को अपने गांव हिंसला की चुनी हुई बाल पंचायत का दूसरा प्रमुख होने का भी गौरव हासिल है. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपने गांव के बच्चों के जीवन की बेहतरी के लिए गांव प्रशासन के साथ मिलकर महत्‍वपूर्ण काम किए हैं.पायल के अपने इलाके में बाल विवाह के उन्‍मूलन की दिशा में किए गए योगदान के बारे में श्री कैलाश सत्‍यार्थी कहते हैं कि पायल जैसे युवा लोग दुनिया को बदलने के लिए अपनी शक्तिशाली आवाज़ों का उपयोग कर रहे है. पायल जैसे युवाओं को धन्यवाद देना चाहिए जिनकी वजह से परिवर्तन और उम्मीद की किरणें हमारे दरवाजों पर दस्तक दे रही है. दुनिया को इस नयी पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए तैयार रहना चाहिए. उनकी सक्रियता, समर्पण और बहादूरी पहले से ही समाज के अग्रणी लोगों को परिवर्तन करने के लिए आगे बढ़ा रही है और मुझे पता है कि आगे और भी बदलाव आने वाले है.



उल्‍लेखनीय है कि पायल को इससे पहले 2013 में बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के असाधारण कार्य करने के लिए ‘वर्ल्‍डस चिल्‍ड्रेनस प्राइज’ का जूरी भी बनाया गया था. 2017 में उन्‍हें वैश्विक खेल और फिटनेस ब्रांड रिबॉक द्वारा "यंग अचीवर अवार्ड" भी मिल चुका है.

चेंजमेकर सम्‍मान सतत विकास लक्ष्यों के अनुसार युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं, अभियानकर्ताओं और नवप्रवर्तकों की उपलब्धियों को रेखांकित करने और प्रोत्साहित करने के लिए प्रदान किया जाता है. यह पुरस्कार अगले 15 वर्षों तक उन 3 असाधारण उद्देश्यों के लिए दिए जाते रहेंगे, जिसके तहत देखा जाएगा कि व्‍यक्ति या संस्‍था ने गरीबी, असमानता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष किए हैं. जलवायु संतुलन के लिए भी काम करने वालों को इस सम्‍मान से नवाजा जाएगा.

बाल मित्र ग्राम (बीएमजी) के बारे में
बीएमजी से अभिप्राय ऐसे गांवों से है जिसके 6-14 साल की उम्र के सभी बच्‍चे बाल मजदूरी से मुक्‍त कराए गए हों और सारे बच्‍चे स्‍कूल जाते हों. वहां चुनी हुई बाल पंचायत हो और जिसे ग्राम पंचायत द्वारा मान्यता प्रदान की गई हो. वहां बच्‍चों को गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ उनमें नेतृत्‍व क्षमता के गुण भी विकसित किए जाते हों. बच्‍चों के द्वारा गठित बाल पंचायत गांव में बाल अधिकारों से संबंधित मुद्दों को उठाती हो और उन अधिकारों और अधिकारों को प्राप्त करने के लिए स्थानीय संवैधानिक निकाय, ग्राम पंचायत के साथ समन्वय करती हो.

कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन के बारे में
नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन (केएससीएफ) बच्चों के शोषण के खिलाफ और हिंसा की रोकथाम के लिए काम करने वाला एक वैश्विक संगठन है. केएससीएफ अपने कार्यक्रमों, प्रत्‍यक्ष हस्‍तक्षेप, अनुसंधान, क्षमता निर्माण, जन-जागरुकता और व्यवहार परिवर्तन के जरिए बाल मित्र समाज के निर्माण की ओर सतत अग्रसर एक संगठन है. श्री सत्‍यार्थी के कार्यों और अनुभवों ने हजारों बच्‍चों और युवाओं को ‘बाल मित्र दुनिया’ के निर्माण के लिए प्रेरित और प्रोत्‍साहित किया है. उनके कार्यों और अनुभवों से सरकारों, व्‍यावसायिक जगत, समुदायों के बीच भागीदारी निर्माण, प्रभावी राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय कानून सुनिश्चित करने और प्रमुख हितधारकों के साथ सफल प्रणालियों पर अमल करने और उसमें भागीदारी करने की दिशा में एक नई राह मिली है.

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First published: September 25, 2019, 1:37 PM IST
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