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अफजल को फांसी: रात 12 बजे से सुबह 8 बजे तक का सच?

बैरक के दरवाजे खुले और जेल सुपरिटेंडेंट ने वहां कैद संसद पर हमले के मुख्य साजिशकर्ता अफजल गुरु को नींद से जगाया। उसकी बैरक बदली जा रही थी, उसे जेल नंबर 3 के बैरक में ले जाया गया।

बैरक के दरवाजे खुले और जेल सुपरिटेंडेंट ने वहां कैद संसद पर हमले के मुख्य साजिशकर्ता अफजल गुरु को नींद से जगाया। उसकी बैरक बदली जा रही थी, उसे जेल नंबर 3 के बैरक में ले जाया गया।

बैरक के दरवाजे खुले और जेल सुपरिटेंडेंट ने वहां कैद संसद पर हमले के मुख्य साजिशकर्ता अफजल गुरु को नींद से जगाया। उसकी बैरक बदली जा रही थी, उसे जेल नंबर 3 के बैरक में ले जाया गया।

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    नई दिल्ली। अफजल गुरु को फांसी के साथ ही उसकी फांसी का मामला लटकने का विवाद भी खत्म हो गया है। अफजल तिहाड़ जेल में बंद था और उसने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका भी दाखिल की थी। लेकिन उसकी अर्जी ठुकरा दी गई। किस तरह अफजल को फांसी देने की प्रक्रिया शुरू हुई, क्या हुआ उन चंद घंटों में, जानने की कोशिश करते हैं।

    वक्त - रात के 12 बजे
    जगह - दिल्ली का हाई प्रोफाइल तिहाड़ जेल
    बैरक के दरवाजे खुले और जेल सुपरिटेंडेंट ने वहां कैद संसद पर हमले के मुख्य साजिशकर्ता अफजल गुरु को नींद से जगाया। उसकी बैरक बदली जा रही थी, उसे जेल नंबर 3 के बैरक में ले जाया गया।

    वक्त - सुबह के 5 बजे
    जगह - तिहाड़ जेल की जेल नंबर 3
    बैरक के दरवाजे फिर खुले - जेल सुपरिटेंडेट ने अफजल गुरु को फिर जगाया - उसे बताया गया कि उसके गुनाहों की सजा का वक्त आ चुका है - राष्ट्रपति ने उसकी माफी अर्जी खारिज कर दी है और उसे अब सजा-ए-मौत दी जाएगी।

    वक्त - सुबह के 8 बजे
    13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए भयानक आतंकवादी हमले की साजिश रचने वाले को फांसी दे दी गई औऱ जेल के भीतर ही दफना दिया गया।

    सरकार ने अफजल की फांसी को पूरी तरह से गोपनीय रखा, किसी को भनक तक नहीं लगने पाई। हालांकि, हालात की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पूरी दिल्ली में हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी कर दिया गया था। फांसी दिये जाने के समय तिहाड़ जेल के डीजी समेत कुल दस अधिकारी और डॉक्टर मौके पर मौजूद थे।

    अफजल गुरू के डेथ वारंट की जानकारी तिहाड़ के डीजी को शुक्रवार रात को दी गई थी। उसी के बाद फांसी की तैयारी शुरू कर दी गई। रात 12 बजे से ही दिल्ली पुलिस और तिहाड़ जेल के आला अफसरों की एक कोर कमेटी बना दी गई। कोर कमेटी ने फांसी के इंतजाम किए और दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को देर रात से ही चाक चौबंद करना शुरू कर दिया । शुक्रवार आधी रात अफजल गुरू के लिए जेल नंबर 3 की बैरक खाली करवाई गई और उसमें मौजूद कैदियों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। इस बैरक की सुरक्षा तमिलनाडु पुलिस के हवाले थी।

    शनिवार सुबह 5 बजे अफजल गुरु को उसकी फांसी के बारे में बताया। सुबह 7 बजे डॉक्टरों ने अफजल का ब्लड प्रेशर और दूसरे जरूरी मेडिकल टेस्ट किए। जांच में ब्लड प्रेशर और स्वास्थ्य सामान्य पाया गया। अफजल गुरू से उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई। इसके बाद सुबह साढ़े सात बजे फांसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। सुबह 8 बजे डॉक्टरों ने अफजल की मौत की पुष्टि कर दी। फांसी के बाद मौलवी की मौजूदगी में जेल नंबर 3 में ही उसे दफना दिया गया।


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