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आखिर तिहाड़ में 24 साल बाद हुई फांसी की प्रक्रिया

संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को मृत्युदंड देने के लिए देश की सबसे बड़ी दिल्ली की तिहाड़ जेल में शनिवार सुबह 24 साल बाद फांसी की प्रक्रिया हुई।

संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को मृत्युदंड देने के लिए देश की सबसे बड़ी दिल्ली की तिहाड़ जेल में शनिवार सुबह 24 साल बाद फांसी की प्रक्रिया हुई।

संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को मृत्युदंड देने के लिए देश की सबसे बड़ी दिल्ली की तिहाड़ जेल में शनिवार सुबह 24 साल बाद फांसी की प्रक्रिया हुई।

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    नई दिल्ली। संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को मृत्युदंड देने के लिए देश की सबसे बड़ी दिल्ली की तिहाड़ जेल में शनिवार सुबह 24 साल बाद फांसी की प्रक्रिया हुई। इससे पहले 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारों केहर सिंह और सतवंत सिंह को यहां फांसी दी गई थी।

    तिहाड़ जेल के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि 1981 के बाद अफजल सातवां कैदी था जिसे इस जेल में फांसी दी गई। शनिवार सुबह आठ बजे गुरु को फांसी पर चढ़ाया गया।

    1982 में दो मासूम बच्चों गीता चोपड़ा और उसके छोटे भाई संजय की अपहरण के बाद हत्या के दोषी रंगा और बिल्ला को यहां फांसी दी गई थी। इसके बाद 1984 में जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के नेता मकबूल भट को और 1985 में विद्या जैन हत्याकांड के दोषी जुगाड़ सिंह को इसी जेल में फांसी दी गई थी।

    1989 में इंदिरा गांधी के हत्यारों को उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी मशहूर जल्लाद कालू ने फांसी दी थी। फांसी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसे बतौर पारिश्रमिक 150 रुपये दिए गए थे।

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