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अफजल का सामान परिजनों को सौंपने पर फैसला बाकी

अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बाद उसके परिवार के सदस्यों ने मांग की थी कि अफजल के कपड़े, चश्मा और एक रेडियो उन्हें सौंप दिए जाएं।

अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बाद उसके परिवार के सदस्यों ने मांग की थी कि अफजल के कपड़े, चश्मा और एक रेडियो उन्हें सौंप दिए जाएं।

अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बाद उसके परिवार के सदस्यों ने मांग की थी कि अफजल के कपड़े, चश्मा और एक रेडियो उन्हें सौंप दिए जाएं।

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    नई दिल्ली। अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बाद उसके परिवार के सदस्यों ने मांग की थी कि अफजल के कपड़े, चश्मा और एक रेडियो उन्हें सौंप दिए जाएं, लेकिन तिहाड़ जेल के एक अधिकारी ने रविवार को कहा कि मुद्दे पर सरकार का फैसला आना अभी बाकी है। उधर, अफजल का परिवार दिल्ली आकर जेल अधिकारियों से मिलने की तैयारी में है। अफजल गुरु के चचेरे भाई यासीन गुरु ने बताया कि अफजल गुरु की पत्नी तबस्सुम और परिवार के अन्य सदस्य शव की मांग कर चुके हैं ताकि उनकी आखिरी रस्म इस्लाम के मुताबिक की जा सके। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए अफजल गुरु का चश्मा, कपड़े और रेडियो जो कि वह जेल में सुना करते थे हासिल करना बहुत महत्वपूर्ण है।

    यासीन ने कहा कि परिवार इस मसले पर जेल अधिकारियों से बातचीत के लिए दिल्ली जाने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि तबस्सुम और उनके 12 साल के बेटे गालिब के लिए अफजल गुरु का चश्मा बहुत कीमती है। अगर सरकार हमें उनका शव नहीं दे सकती तो कम से कम उनका सामान हमें लौटा दिया जाना चाहिए। जेल के अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि जेल नियमावली के अनुसार फांसी पर चढ़ाए गए कैदी की संपत्ति उसके परिवार को सौंपी जानी है। तिहाड़ जेल की महानिदेशक विमला मेहरा ने हालांकि कहा कि अफजल के इस्तेमाल में आने वाला सामान हमारे कब्जे में है। उसका शव या सामान परिजनों को सौंपा जाए या नहीं, इस पर फैसला सरकार लेगी।

    अफजल के वकील एन डी पंचोली ने कहा कि जेल से उनका सामान वापस लेना परिवार का हक है। हम सरकार के अधिकारियों से मिलेंगे और यह मांग रखेंगे। अफजल को फांसी दिए जाने के तुरंत बाद पंचोली ने उसके परिवार की ओर से तिहाड़ जेल की प्रमुख को एक आवेदन देकर उसकी आखिरी रस्म धार्मिक परंपरा के अनुसार करने की अनुमति मांगी थी। अफजल को फांसी दिए जाने के बाद एहतियातन दिल्ली में घोषित अलर्ट रविवार को भी जारी रहा। कथित रूप से हिरासत में लिए गए दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एस ए आर गिलानी ने कहा कि उन्हें घर में ही रहने की सलाह दी गई है।

    विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कालेज में प्राध्यापक गिलानी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शनिवार को कथित रूप से हिरासत में ले लिया था। कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले कुछ अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। गिलानी को संसद पर हमले में उनकी कथित संलिप्तता के लिए दिसंबर 2001 में गिरफ्तार कर लिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने सबूत के अभाव में 2003 में उन्हें बरी कर दिया था। गौरतलब है कि संसद पर हुए हमले के सूत्रधार अफजल को शनिवार सुबह आठ बजे तिहाड़ जेल की जिस कोठरी में वह बंद था, उसी के बाहर उसे फांसी दे दी गई और वहीं दफना दिया गया। 13 दिसंबर 2001 को हथियारों से लैस पांच आतंकवादियों ने संसद परिसर में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी की थी जिसमें माली और सुरक्षाकर्मियों सहित 10 लोग मारे गए थे। उस समय संसद के अंदर 100 सांसद मौजूद थे।


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