महाकुंभ में हादसा रोकने को खास इंतजाम, सुरक्षा कड़ी

महाकुंभ में हादसा रोकने को खास इंतजाम, सुरक्षा कड़ी
मौनी अमावस्या पर हुए हादसे के सुरक्षा जबरदस्त तौर पर कड़ी है। वहीं 10 फरवरी के दर्दनाक हादसे के बाद श्रद्धालुओं के शहर से बाहर जाने के लिए भी बड़े पैमाने पर इंतजाम किए गए हैं।

मौनी अमावस्या पर हुए हादसे के सुरक्षा जबरदस्त तौर पर कड़ी है। वहीं 10 फरवरी के दर्दनाक हादसे के बाद श्रद्धालुओं के शहर से बाहर जाने के लिए भी बड़े पैमाने पर इंतजाम किए गए हैं।

  • News18India
  • Last Updated: February 15, 2013, 3:20 AM IST
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इलाहाबाद। मौनी अमावस्या पर हुए हादसे के सुरक्षा जबरदस्त तौर पर कड़ी है। वहीं 10 फरवरी के दर्दनाक हादसे के बाद श्रद्धालुओं के शहर से बाहर जाने के लिए भी बड़े पैमाने पर इंतजाम किए गए हैं। सिर्फ कुंभ मेले का प्रशासन ही नहीं, बल्कि इलाहाबाद का जिला प्रशासन और रेलवे प्रशासन ने फैसला किया है कि अब भीड़ को मेले से तभी बाहर जाने को कहा जाएगा जब सड़क, शहर, बस अड्डे और रेलवे स्टेशन खाली होंगे।

इलाहाबाद के कमिश्नर देवेश चतुर्वेदी के मुताबिक अब भीड़ को धीरे धीरे आगे जाने दिया जाएगा ताकि वो कई घंटों में पैदल चलकर स्टेशन पहुंचे, हमारी डाइवर्जन स्कीम तैयार हैं और उसी के तहत हम लोगों को आगे बढाएंगे। आतंकी हमलों की आशंका के अलावा 10 फरवरी को रेलवे स्टेशन पर हुए दर्दनाक हादसे के बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे ऊपर जरूर रखी गई है। इसके अलावा बाहर के राज्यों से भी आतंकवाद और नक्सल विरोधी फोर्स बुलाई गई है।

इलाहाबाद के एसएसपी आरकेएस राठौर के मुताबिक हालात पर पैनी नजर रखे हुए हैं। पूरी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं। हम हर संदिग्ध व्यक्ति औऱ वस्तु पर नजर रखे हुए हैं ताकि कोई कहीं कुछ भी प्लांट न करने पाए। भगदड़ जैसे हादसों को रोकने के लिए पहली बार तय किया गया है कि इलाबाद जंक्शन के साथ, रामबाग, झूंसी, प्रयाग, प्रयागघाट स्टेशन पर भी 31 कुंभ स्पेशल ट्रेने रवाना होंगी। इसके अलावा 1,500 अतिरिक्त बसें लगाई गई हैं। 3 स्थाई और 9 अस्थाई बस अड्डे बनाए गए हैं। किसी को भी सिविल लाइंस की तरफ से रेलवे स्टेशन जाने की इजाजत नहीं है। स्टेशन के आसपास 42 कॉलेजों में अस्थाई कैंप बनाए गए हैं ताकि भीड़ बढ़े तो स्टेशन या बस अड्डे से पहले श्रद्धालुओं को यहां ठहराया जाए। ट्रेनों में भारी भीड़ को देखते हुए ही बसों की तादाद बढ़ाई गई है।



सीपीआरओ (रेलवे) संदीप माथुर के मुताबिक पिछली बार हादसे को लेकर हमने तय किया है कि भीड़ एकसाथ न आने दी जाए। डाक्टरों की टीम फुटओवरब्रिज के बजाए रेलवे ट्रैक से आएगी, रिलीफ ट्रेन तैयार खड़ी रहेगी। वहीं डीएम मणि प्रसाद मिश्र ने बताया कि मेले से लोग तब आगे बढ़ाए जाएंगे जब शहर और स्टेशन पर दबाव कम होगा, बसों का भरपूर इंतजाम किया है ताकि हर आदमी हर दिशा में हर तरह के साधन का इस्तेमाल करे।
अभी तक सिर्फ कुंभ में व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 14 सेक्टर बांटे गए थे। लेकिन 10 फरवरी के हादसे के बाद शहर को भी 38 सेक्टरों में बांट दिया गया है। सभी का प्रभारी एक सेक्टर मजिस्ट्रेट होगा। जल पुलिस घाटों की भीड़ पर नजर रखेगी। सुरक्षा बल जमीन पर पैनी निगाह रखेंगे और हेलीकॉप्टर के जरिए आसमान से नजर रखी जाएगी। ताकि पता चलता रहे कि भीड़ का दबाव किस तरफ ज्यादा है। इसी के जरिए भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा।

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