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तिहाड़ के अधिकारियों ने साझा नहीं की अफजल पर सूचना

अफजल गुरु से संबंधित सूचना जाहिर होने से क्या पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्ते बिगाड़ सकता है? तिहाड़ जेल के अधिकारियों का तो यही मानना है।

अफजल गुरु से संबंधित सूचना जाहिर होने से क्या पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्ते बिगाड़ सकता है? तिहाड़ जेल के अधिकारियों का तो यही मानना है।

अफजल गुरु से संबंधित सूचना जाहिर होने से क्या पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्ते बिगाड़ सकता है? तिहाड़ जेल के अधिकारियों का तो यही मानना है।

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    लखनऊ। संसद पर हमला मामले में फांसी की सजा भुगतने वाले अफजल गुरु से संबंधित सूचना जाहिर होने से क्या पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्ते बिगाड़ सकता है? तिहाड़ जेल के अधिकारियों का तो यही मानना है। लखनऊ की उर्वशी शर्मा की ओर से सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत दायर की गई अर्जी के जवाब में तिहाड़ जेल ने अपने जवाब में कहा है कि इससे भारत की संप्रभुता और एकता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा देश की सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक और आर्थिक हितों को चोट पहुंचेगी या भड़काऊ कदम होगा।

    जेल मुख्यालय ने अफजल गुरु की फांसी की कार्रवाई से संबंधित 'ब्लैक वारंट', दया याचिका खारिज होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भेजे गए संदेश और अफजल को जेल में रखने के दौरान उस मदवार कितना खर्च आया जैसे का ब्योरे को उजागर करने पर विभिन्न उपबंधों का हवाला देते हुए कहा है कि इससे भारत की पड़ोसी मुल्कों के साथ रिश्ते बिगड़ सकते हैं।

    शर्मा ने उन दस्तावेजों या पत्रों की प्रतियां भी मांगी थी जो दफन के लिए जगह तय करने की प्रक्रिया में जेल विभाग द्वारा लिखे, भेजे और हासिल किए गए थे। शर्मा ने जल्लादों के नाम, अफजल को दफन करने के समय उसके शव के साथ मौजूद लोगों की सूची और उस वक्त की तस्वीर की मांग की थी।

    जेल विभाग ने उनके आग्रह को पूरी तरह ठुकरा दिया। जेल अधिकारियों ने जेल में रहने के दौरान अफजल पर कितना खर्च आया ऐसे सवालों का भी जवाब देना मुनासिब नहीं समझा है।
    शर्मा ने बातचीत के दौरान कहा कि यह पूरी तरह अनुचित है। आखिर वे दया याचिका खारिज होने और उसके बाद फांसी से संबंधित पत्राचार साझा क्यों नहीं करना चाहते?

    आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा कि अफजल गुरु को जिस तरह और जिन परिस्थितियों में फांसी दी गई और उसे दफना दिया गया, उसे लेकर कई प्रदर्शन हो चुके हैं। तिहाड़ जेल का जेल विभाग और केंद्र सरकार इस मुद्दे पर अपना दामन बेदाग दिखाए। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर पुनरीक्षण याचिका दायर करने के विकल्प तलाश रही हैं।

    जम्मू-कश्मीर के सोपोर जिला निवासी अफजल गुरु को 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आतंकवादी हमला मामले में संलिप्त रहने का दोषी पाया गया था। अफजल को नौ फरवरी को तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई और उसके शव को वहीं दफना दिया गया था।

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