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एंटी रेप बिल पेश,18 से कम का आरोपी माना जाएगा नाबालिग

गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने श्रीलंका में तमिलो के उत्पीड़न के मुद्दे पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम द्रमुक, अन्नाद्रमुक और तमिलनाडु के अन्य सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के बीच सदन में पहले पेश किया गया।

गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने श्रीलंका में तमिलो के उत्पीड़न के मुद्दे पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम द्रमुक, अन्नाद्रमुक और तमिलनाडु के अन्य सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के बीच सदन में पहले पेश किया गया।

गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने श्रीलंका में तमिलो के उत्पीड़न के मुद्दे पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम द्रमुक, अन्नाद्रमुक और तमिलनाडु के अन्य सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के बीच सदन में पहले पेश किया गया।

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    नई दिल्ली। सरकार ने बलात्कार के मामलों में कठोर दंड के प्रावधानों वाला बहुचर्चित आपराधिक कानून आज लोकसभा में पेश कर दिया। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने श्रीलंका में तमिलो के उत्पीड़न के मुद्दे पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम द्रमुक, अन्नाद्रमुक और तमिलनाडु के अन्य सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के बीच सदन में पहले पेश किया गया आपराधिक कानून संशोधन विधेयक 2012 वापस लिया और कल सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति के आधार पर बना संशोधित विधेयक पेश किया।

    यह विधेयक राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा तीन फरवरी को जारी आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश का स्थान लेगा जो चार अप्रैल को अप्रभावी हो जाएगा। इस विधेयक में भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता 1973, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 और लैंगिक अपराधों से बालकों का सरंक्षण अधिनियम 2012 में जरूरी संशोधन किए जाने का प्रस्ताव किया गया है।

    इस विधेयक में बलात्कार के मामलों में मुकदमे की प्रक्रिया को व्यावहारिक और आसान बनाने और इस अपराध के गंभीरतम मामलों में मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। जबकि तेजाब फेंकने के मामलों में भारतीय दंड संहिता में एक नई धारा 326 ए और 326बी डाल कर इसे संज्ञेय और गैरजमानती अपराध बनाया गया है।

    इस विधेयक में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 ए और 354बी के अंतर्गत ताक झांक करने के मामलों को संज्ञेय और जमानती, पीछा करने को गैर जमानती अपराध बनाने और एक से लेकर सात साल के कारावास और जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है। ऐसे अपराधों के पहली बार किए जाने पर नरमी बरते जाने और दूसरी बार किए जाने पर कठोरता बरते जाने की बात कही गई है।

    विधेयक में बलात्कार शब्द का प्रयोग किया गया है जबकि अध्यादेश मे यौन हमला शब्द का इस्तेमाल किया गया है। बलात्कार के मामलों में दोषियों को 20 साल या उसके पूरे जीवनकाल तक के कठोर कारावास की बात कही गई। अगर पीड़िता को इस अपराध के कारण कोई गंभीर चिकित्सकीय समस्या का सामना करना पड़ता है तो आरोपी से उसके पूरे खर्च की वसूली किए जाने का प्रस्ताव है।

    महिलाओं की लज्जा और निजता की रक्षा के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के अंतर्गत सजा में बढ़ोतरी की गई है। जबकि बलात्कार के मामलों में पीडिता की गरिमा की रक्षा के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम मे धारा 53ए और 114ए जोडने, धारा 119 को हटाने और धारा 146 में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।

    इस विधेयक में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम में बालक की परिभाषा पहले की तरह ही रहेगी। इसके तहत यौन अपराधों के मामले में 18 साल से कम आयु के आरोपी को अवयस्क माना जाएगा और उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं के अंतर्गत मुकदमा नहीं चलाया जा सकेगा।

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