पढ़ें: संजय ने 1993 के ब्लास्ट से लेकर अब तक क्या कहा!

बॉलीवुड के संजू बाबा पर लगा खलनायक का ठप्पा नहीं मिट सका। सुप्रीम कोर्ट से संजय दत्त को राहत नहीं मिली। अदालत ने उनके गुनाह को रहम के लायक नहीं माना।

  • News18India
  • Last Updated: March 21, 2013, 3:09 PM IST
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नई दिल्ली। बॉलीवुड के संजू बाबा पर लगा खलनायक का ठप्पा नहीं मिट सका। सुप्रीम कोर्ट से संजय दत्त को राहत नहीं मिली। अदालत ने उनके गुनाह को रहम के लायक नहीं माना। संजय दत्त को टाडा कोर्ट ने अवैध तरीके से एके 56 राइफल रखने के आरोप में 6 साल की सजा दी थी। सुप्रीमकोर्ट ने उनकी अपील पर ये सजा 1 साल घटा दी।

संजय को सजा
सुप्रीम कोर्ट ने संजय को 5 साल की सजा दी है। इसमें से 1.5 साल की सजा वो पहले ही काट चुके हैं। अब उन्हें 3.5 साल और जेल में बिताने होंगे। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला आने के बाद संजय दत्त और उनका परिवार सदमें में हैं। मुंबई में संजय दत्त के घर शुभचिंतकों का तांता लगा था और वो एकदम खामोश थे। तो दिल्ली में उनकी सांसद बहन प्रिया दत्त खबर सुनकर रो पड़ीं। हालांकि इस सजा खिलाफ उनके वकील पुनर्विचार याचिका डालने की तैयारी कर रहे हैं।

संजय पर सख्त सुप्रीम कोर्ट
संजय के खिलाफ जिस तरह का केस था उनके वकील भी अदालत से बस रहम की अपील ही कर सकते थे। उन्हें उम्मीद थी कि संजय का चाल-चलन और उनके सेलिब्रिटी स्टेटस को देखते हुए अदालत उन्हें प्रोबेशन पर छोड़ देगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियां और संजय दत्त का गुनाह बेहद गंभीर है। संजय दत्त को प्रोबेशन पर रिहा नहीं किया जा सकता। टाडा अदालत ने सबूतों के आधार पर एकदम सही फैसला दिया था।



पुलिस की चार्जशीट, तमाम सबूत, बयान, संजय दत्त का इकबालिया बयान। सबकुछ संजय दत्त के खिलाफ जा रहे थे। 1993 मुंबई ब्लास्ट में संजय दत्त की पहचान आरोपी नंबर 117 के तौर पर थी। उन्हें पहली बार 19 अप्रैल 1993 में गिरफ्तार किया गया। मुंबई पुलिस के तत्कालीन डीसीपी के एल बिश्नोई के सामने संजय दत्त ने इकबालिया बयान दिया। और इस बयान में उन्होंने अपना जुर्म कबूला। वो बयान से पलट गए। चार्जशीट में संजय के गुनाह को सिलिसिले को बताया गया है।

घटनाक्रम: 16 जनवरी, 1993 शाम साढ़े छह बजे
संजय दत्त के बांद्र के पाली हिल के बंगले में गुजरात नंबर प्लेट वाली लाल रंग की मारुति वैन रुकी। उसमें से दो लोग अबू सलेम और बाबा मूसा चौहान उतरे। इसके बाद एक एंबेसडर कार से मैग्नम वीडियो के मालिक हनीफ कड़ावाला और समीर हिंगोरा आएं।

इन लोगों ने मारुति वैन का दरवाजा खोलकर संजय दत्त को हथियारों का जखीरा दिखाया। पुलिस के सामने अपने इकबालिया बयान में संजय दत्त ने बताया कि

संजय का पहला बयान (1993)
1992 के दंगों में पूरी मुंबई सुलग उठी। मेरे पिता सुनील दत्त राजनीति में थे। हमने दंगा पीड़ितों के लिए राहत कैंप लगाने शुरू कर दिए। लेकिन हमारे परिवार को धमकी भरे फोन आने शुरू हो गए। मैं और पूरा परिवार डर गया था। तभी हनीफ और समीर ने मुझे ऑटोमेटिक राइफल रखने की सलाह दी जिसे मैने मान लिया। जनवरी 1993 में हनीफ, समीर और अबू सलेम मेरे घर आए। इनके साथ एक चौथा आदमी भी था। इनकी कार में 15-20 एके-56, हैंड ग्रेनेड और सैंकड़ों कारतूस रखे थे।

संजय का ये बयान माफिया डॉन अबू सलेम और उसके एक साथी बाबा मूसा चौहान के इकबालिया बयान से मेल खाता है। हांलाकि सभी अपने इकबालिया बयान से अदालत में पलट गए। इनके इकबालिया बयान के माने तो 16 जनवरी, 1993 की शाम सलेम और संजय दत्त के बीच काफी देकर तक बातचीत होती रही। गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने संजय दत्त ने क्या बयान था इस बारे में वो सुनिए आप।

संजय का पहला बयान-(1993)
सलेम ने मुझे तीन राइफलें और कुछ कारतूस रखने के लिए दिए। मैं डर गया था, मैंने एक ही राइफल मांगी। लेकिन उन्होंने कहा कि दो बाद में वापस लेंगे। इन हथियारों को मैंने अपनी कार की डिक्की में रख लिया और फिर रात को अपने घर की दूसरी मंजिल में छिपा दिया। मैं दो दिन तक मैं सो नहीं पाया। मैंने हनीफ को दोनों राइफल ले जाने को कहा। बाद में हनीफ, समीर और सलेम मेरे घर आए जिन्हें मैंने दो एके-56 लौटा दी। और एक राइफल और कुछ कारतूस अपने पास रख लिए। मैंने उनसे कहा कि दंगे खत्म होने के बाद ये भी लौटा दूंगा। दंगे खत्म हुए तो मैंने राइफल हनीफ को लौटानी चाही। लेकिन उसने मना कर दिया।

लेकिन पुलिस के चार्जशीट की माने तो बाबा मूसा और अबू सलेम से संजय दत्त ने एक 9 एमएम पिस्टल, तीन ए के 56, 27 हैंग ग्रेनेड और 560 कारतूस लिए थे। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक संजय दत्त ने ये हथियार दाऊद के भाई अनीस को फोन करके मंगाए थे। पुलिस के आरोपों की माने तो 21 जनवरी को समीर और हनीफ के कहने पर अबू सलेम, बाबा चौहान और मंजूर अहमद संजय दत्त के घर पहुंचे और एके 56 और पिस्टल के अलावा बाकी हथियार वापस ले आए।

21 जनवरी की ही शाम अनीस इब्राहिम के कहने पर अबू और मंजूर ने संजय दत्त के घर से उठाए गए हथियार बांद्रा में रहने वाली जैबूनिशा कादरी के घर पहुंचा दिए। फिर 12 मार्च 1993 को मुंबई में 12 धमाकों से दहल उठा। 12 अप्रैल को पुलिस ने समीर और हनीफ को गिरफ्तार कर लिया। इस वक्त संजय दत्त मॉरीशस में शूटिंग कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी की खबर मिलते ही संजय दत्त ने अपने करीबी यूसूफ नलवाला को फोन किया और कहा कि घर में छुपाए हथियारों को तुरंत नष्ट कर दे। यूसूफ ने रूसी मुल्ला और करसी अडजेनिया की मदद से ए.के. 56 को नष्ट कर दिया। नाइन एमएम वाले पिस्टल का बैग रूसी मुल्ला ने अजय मारवाह को रखने के लिए दिया जिसे अजय बगैर देखे अपने पास रख लिया। 19 अप्रैल को संजय दत्त मारीशस से मुंबई लौटे और एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिए गए। आखिरकार सबूतों, गवाहों ने उन्हें मुजरिम करार दे दिया।

याकूब मेमन को फांसी
याकूब मेमन ने ये धमाके कराने में अहम भूमिका अदा की। दुबई में रची गई धमाकों की पूरी साजिश से वो वाकिफ था। अल हुसैनी बिल्डिंग में रखे विस्फोटकों की उसे पूरी खबर थी। पैसे जुटाने से लेकर बम रखवाने तक में उसका रोल था। अदालत ने माना कि साजिश में याकूब की भूमिका उसे पूरी तरह सजा-ए-मौत का हकदार ठहराती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धमाकों के असल बाजीगर याकूब और पाकिस्तान में बैठे टाइगर मेमन और दाऊद जैसे लोग थे। बाकी आरोपी महज उनके हाथ की कठपुतली थे जिनकी गरीबी और बेरोजगारी का फायदा उठाया गया। इसी आधार पर अदालत ने सडजा ए मौत पाए बाकी दस आरोपियों अब्दुल गनी इस्माइल, परवेज नाजिर, मुश्ताक तरानी, असगर मुकादम, शाहनवाज कुरैशी, शोएब घंसार, फिरोज मलिक, जाकिर हुसैन, अब्दुल अख्तर खान और फारुक पावले की सजा ए मौत को अदालत ने उम्रकैद में बदल दिया।
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