PHD छात्रा मर्डर केस: पेनड्राइव के लिए हुई नेहा की हत्या?

आगरा के मशहूर दयालबाग संस्थान में पीएचडी छात्रा नेहा शर्मा की हत्या को पूरा एक महीना होने जा रहा है। कत्ल के बाद बड़े-बड़े दावे कर रही पुलिस इस मर्डर मिस्ट्री को अब तक सुलझा नहीं पाई है।

News18India
Updated: April 13, 2013, 2:10 PM IST
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Updated: April 13, 2013, 2:10 PM IST
आगरा। आगरा के मशहूर दयालबाग संस्थान में पीएचडी छात्रा नेहा शर्मा की हत्या को पूरा एक महीना होने जा रहा है। कत्ल के बाद बड़े-बड़े दावे कर रही पुलिस इस मर्डर मिस्ट्री को अब तक सुलझा नहीं पाई है। एक नए खुलासे ने इस केस को और उलझा दिया है। सूत्रों की मानें तो नेहा एक बड़े प्रोजेक्ट पर रिसर्च कर रही थीं। वो रिसर्च से मिले आंकड़ों को पेटेंट करवाने की भी तैयारी में थी। नेहा ने अपनी रिसर्च के सारे आंकड़े एक पेनड्राइव में रख रखे थे। नेहा की हत्या के बाद से उसकी पेनड्राइव का भी कोई पता नहीं है।

नेहा की हत्या के बाद से ही उसकी पेनड्राइव गायब है। ये पेनड्राइव इसलिए भी अहम है क्योंकि नेहा शर्मा पीएचडी कर रही साधारण छात्रा नहीं थी। सूत्रों की मानें तो नैनो बायोटेक्नोलॉडी में पीएचडी कर रहीं नेहा शर्मा एक खास रिसर्च में लगीं थीं। ये रिसर्च थी कैंसर के पीड़ितों में प्रतिरोधात्मक शक्ति या इम्यून सिस्टम को बढ़ाने पर। अगर नेहा शर्मा अपनी रिसर्च में कामयाब होती तो करोड़ों लोगों को फायदा होता। सूत्रों की मानें तो नेहा इस रिसर्च को पूरा करने के बेहद करीब थी। उसने रिसर्च के नतीजों को पेटेंट करवाने की तैयारी भी शुरू कर दी थी।

लेकिन कागजी कार्रवाई पूरी करने से पहले ही उसकी हत्या कर दी गई। माना जा रहा है कि उसकी पूरी रिसर्च और उसके आंकड़े पेनड्राइव में ही सुरक्षित थे। लेकिन अब ये पेनड्राइव गायब है।

गौरतलब है कि 15 मार्च को लैब में नेहा की हत्या भी बेहद खूंखार तरीके से की गई थी। उसके हाथों को रस्सियों से बांध दिया गया था और शरीर को कटर से जगह-जगह काटा गया था। ऐसा कटर जिसका इस्तेमाल कागज काटने के लिए किया जाता है। नेहा के शरीर पर दर्जन भर से ज्यादा वार हुए थे। देखने से ऐसा लग रहा था कि कातिल को किसी ऐसी चीज की तलाश थी जो शायद नेहा शर्मा के भीतर थी। सूत्रों की मानें तो कातिल को जिस चीज की तलाश थी वो कुछ और नहीं नेहा की पेनड्राइव हो सकती है। आशंका इस बात की है कि हत्या से ठीक पहले नेहा ने वो पेनड्राइव निगल ली थी। इसी पेनड्राइव को निकालने के लिए कातिल ने नेहा का शरीर कई जगह से काटा था।

ध्यान देने वाली बात ये भी है कि नेहा के पोस्टमॉर्टम के बाद उसके शरीर से कोई पेनड्राइव नहीं मिली थी। यानि मुमकिन है कि कातिल पेनड्राइव हासिल करने में कामयाब रहा। नेहा ने अपनी रिसर्च का ज्यादातर हिस्सा पेनड्राइव में ही रखा था। हत्या के चार दिन बाद कूड़े के ढेर में पुलिस को नेहा का लैपटॉप मिला था लेकिन उसमें भी कोई डाटा नहीं था। नेहा के मोबाइल से भी सारा डाटा हटा दिया गया था।

नेहा की हत्या का मकसद उसकी रिसर्च के आंकड़े हथियाने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। आपको फिर बता दें कि नेहा जो रिसर्च कर रही थी उस पर पूरी दुनिया की नजर थी। अपनी रिसर्च के लिए नेहा को यूजीसी से 80 लाख रुपये की ग्रांट भी मिली थी। इसमें 60 लाख रुपये मशीनों के लिए और 20 लाख रिसर्च के लिए दिए गए थे। माना जा रहा है कि अगर नेहा शर्मा की रिसर्च पूरी हो जाती तो उसकी कीमत करोड़ों में होती।

नेहा की हत्या के एक महीने बाद नए खुलासों ने इन सवालों को फिर अहम बना दिया है। 15 मार्च को नेहा की हत्या के करीब 2 घंटे बाद पुलिस को इसकी जानकारी मिली। आशंका इस बात की है कि इस दौरान दयालबाग संस्थान की लैब से सबूत मिटाने की कोशिश की गई। जांच के दौरान पुलिस ने एक छात्र से कई बार पूछताछ भी की थी। इस छात्र के रिश्तेदार दयालबाग संस्थान में बड़े पदों पर हैं। आरोप है कि जांच पर दबाव का खेल उस छात्र से पूछताछ के बाद ही शुरू हो गया। हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर कर दी गई जिसमें पुलिस पर संस्थान के लोगों को फंसाने के लिए थर्ड डिग्री के इस्तेमाल का आरोप लगा दिया गया। इस याचिका के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस ने जवाब भी मांग लिया।
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गौरतलब है कि आगरा का दयालबाग संस्थान रसूखदार लोगों से जुड़ा होने के कारण बेहद ताकतवर भी माना जाता है। दयालबाग संस्थान पर उठ रह सवालों को देखते हुए आईबीएन 7 ने कई बार कॉलेज प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन कोई भी कैमरे पर बोलने के लिए तैयार नहीं हुआ। हमने आगरा पुलिस से भी संपर्क साधा।

आखिर जांच में ढिलाई की वजह क्या है। आखिर क्यों आगरा में ही देश के बड़े फोरेंसिक एक्सपर्ट मौजूद होने के बावजूद उन्हें कत्ल के 15 दिन बीत जाने पर क्यों बुलाया गया। आखिर पुलिस पर किसका दबाव है। इन सवालों के जवाब में पुलिस के पास रटा- रटाया जवाब है, जांच चल रही है।

इस केस में सामने आए नए खुलासों के बाद नेहा शर्मा का परिवार भी मीडिया के सामने आने से बच रहा है। जबकि पहले वो भी इस केस की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। आईबीएन 7 ने जब नेहा के परिवार से संपर्क साधा तो यही जवाब मिला कि वो कोई बात नहीं करेंगे। ऐसे में सवाल फिर उठता है कि क्या नेहा शर्मा के परिवार पर भी दबाव डाला जा रहा है।

इस मामले में पुलिस पर कितना दबाव है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाईकोर्ट में मामला जाने के बाद पुलिस ने संदिग्धों से पूछताछ तक बंद कर दी है। अब पुलिस ने दयालबाग संस्थान के भीतर ही एक पेटी रखवा दी है और छात्रों से अपील की है कि किसी के पास भी कोई जानकारी हो तो वो उस पेटी में डाल सकता है।
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