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ब्लैक पैंथर की तलाश में 18 साल के ध्रुव ने एक सड़क पर गुजार दिए 9 हजार मिनट

ध्रुव पाटिल की फाइल फोटो
ध्रुव पाटिल की फाइल फोटो

ध्रुव पाटिल (Dhruv Patil) को जानवरों से खासा लगाव है. उन्होंने मैसूर जू में कई जानवरों को गोद ले रखा है और घर पर भी कई पक्षियों का ख्याल रखते हैं. ध्रुव कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एमबी पाटिल के सबसे छोटे बेटे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 13, 2020, 4:16 PM IST
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बेंगलुरु. यह कहानी 18 साल के ध्रुव पाटिल की है. जिन्होंने ब्लैक पैंथर (Black Panther) की केवल एक झलक को कैमरे में कैद करने के लिए 9000 मिनट या यह कह लें कि 150 घंटों का इंतजार किया. यह वक्त उन्होंने अपने कैमरे के साथ केवल एक सड़क पर गुजार दिया. हालांकि, बाद में उनकी यह मेहनत रंग लाई और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी को लेकर उनके इस समर्पण ने सफलता दिलाई.

खास बात है कि भारत में केवल 5-6 ब्लैक पैंथर हैं. इन्हीं में से एक मैसूर के नजदीक काबिनी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी (Kabini wildlife sanctuary) में मौजूद है. बीजापुर के ध्रुव को इसी पैंथर की तलाश थी. खास बात है कि ध्रुव ने कैमरे में पैंथर की तस्वीर खींचने के लिए काबिनी का 25 बार दौरा किया. उन्होंने कैमारा नाम की एक ही सड़क पर 9 हजार मिनट से ज्यादा का समय गुजारा. वह रुडयार्ड किपलिंग की किताब के चरित्र बघीरा का असल जिंदगी में इंतजार कर रहे थे.

यह भी पढ़ें: ओडिशा में नजर आया बेहद दुर्लभ काला बाघ, कैमरे में कैद हुई तस्वीर



आखिरकार उन्हें सफलता मिली और एक दिन पैंथर उनके सामने से गुजरा ही गया. उन्होंने मीडिया के सामने अपना पूरा अनुभव साझा किया है. उन्हें इस समय को जिंदगी के सबसे बेहतरीन दिनों में से एक बताया है. खास बात है कि ध्रुव को जानवरों से खासा लगाव है. उन्होंने मैसूर जू में कई जानवरों को गोद ले रखा है और घर पर भी कई पक्षियों का ख्याल रखते हैं. ध्रुव कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एमबी पाटिल के सबसे छोटे बेटे हैं.

उड़ीसा में नजर आया था दुर्लभ बाघ
बीते नवंबर में उड़ीसा के जंगलों में काली धारियों वाला दुर्लभ बाघ देखा गया था. ओडिशा में मिले इस बाघ का औपचारिक नाम मेलेनिस्टिक टाइगर (Melanistic Tiger) है. बाघ के शरीर पर बनी यह काली धारियां जैनेटिक डिफेक्ट के कारण आती हैं. 2018 की टाइगर सेंसस रिपोर्ट बताती है कि काली धारी वाले बाघों की संख्या काफी तेजी से कम हुई है. वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में वैज्ञानिक डॉक्टर बिवाश पांडव बताते हैं कि इन बाघों के शरीर पर काली धारियां इंटरब्रीडिंग के कारण आई हैं. उन्होंने यह भी बताया कि इन बाघों का आकार आम बाघों के मुकाबले छोटा होता है.
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