पांच साल में भारत ने पड़ोसी देशों के 18,999 लोगों को दी नागरिकता, ये देश रहा सबसे आगे

पांच साल में भारत ने पड़ोसी देशों के 18,999 लोगों को दी नागरिकता, ये देश रहा सबसे आगे
नागरिकता कानून को लेकर देश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं. (Photo- PTI)

ब्योरे के अनुसार इनमें सर्वाधिक, बांग्लादेश के 15036 नागरिकों को भारत की नागरिकता दी गई है. इनमें पाकिस्तान के 2935, अफगानिस्तान के 914, श्रीलंका के 113 और म्यांमार का सिर्फ एक नागरिक शामिल है.

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नई दिल्ली. पिछले पांच सालों में भारतीय नागरिकता पाने वाले पड़ोसी देशों के नागरिकों में सर्वाधिक 80 प्रतिशत बांग्लादेश (Bangladesh) के हैं. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Nityanand Rai) द्वारा बुधवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में पेश आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है. सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार पड़ोसी देशों अफगानिस्तान (Afghanistan), बांग्लादेश, पाकिस्तान (Pakistan), श्रीलंका (Sri Lanka) और म्यांमार (Myanmar) के 18999 नागरिकों को 2014 से 2019 के दौरान भारत की नागरिकता दी गई.

ब्योरे के अनुसार इनमें सर्वाधिक, बांग्लादेश के 15036 नागरिकों को भारत की नागरिकता दी गई है. इनमें पाकिस्तान के 2935, अफगानिस्तान के 914, श्रीलंका के 113 और म्यांमार का सिर्फ एक नागरिक शामिल है.


इसलिए इतने बांग्लादेशी लोगों को मिली नागरिकता
इसमें स्पष्ट किया गया है कि 2015 में भारत बांग्लादेश सीमा समझौते (Indo-Bangladesh Land Boundary Agreement) के बाद बांग्लादेश के 14864 नागरिकों को भारत की नागरिकता दी गई. पिछले पांच सालों में पाकिस्तान के सर्वाधिक 809 आवेदकों को 2019 में भारत की नागरिकता दी गई, जबकि 2016 में यह संख्या 670 थी.



अफगानिस्तान के लोगों को नागरिकता देने में आई गिरावट
मंत्रालय के ब्योरे के मुताबिक अफगानिस्तान के नागरिकों को भारत की नागरिकता देने के मामले में 2015 के बाद से लगातार गिरावट दर्ज की गई है. अफगानिस्तान के 249 आवेदकों को 2015 में भारत की नागरिकता दी गई थी, यह संख्या 2019 में घटकर 40 रह गई.

मंत्रालय ने बताया कि नागरिकता के बारे में धार्मिक पहचान के आधार पर आंकड़े एकत्र नहीं किए गए.

भारत में नागरिकता कानून को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन
बता दें भारत ने दिसंबर 2019 में ही नागरिकता कानून में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है. इस कानून के मुताबिक 31 दिसंबर 2014 से पहले इन तीन देशों से भारत में आए लोगों को नागरिकता दे दी जाएगी. इन कानून के बाद से ही देश भर में विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं. हाल ही में दिल्ली में चल रहे इन विरोध प्रदर्शनों के बीच सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी जिसमें 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और करीब 200 लोग घायल हो गए थे. हालांकि सरकार की ओर से ये साफ कर दिया गया है कि नागरिकता कानून से किसी भी भारतीय नागरिक को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा.

(भाषा के इनपुट के साथ)

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