190 सेकंड की फोन कॉल से पुलिस ने जोड़ीं गौरी लंकेश और कलबुर्गी की हत्‍या की कड़ियां

कर्नाटक पुलिस की एसआईटी ने की दोनों की हत्‍या की जांच.
कर्नाटक पुलिस की एसआईटी ने की दोनों की हत्‍या की जांच.

कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार जुलाई 2018 में 28 साल के गणेश मिस्किन की गिरफ्तारी के तुरंत बाद, उसके दो करीबी रिश्तेदारों ने फोन पर मिस्किन की गिरफ्तारी के संबंध में बातचीत की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 8:36 AM IST
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नई दिल्‍ली. बेंगलुरु में 2017 में हुई पत्रकार गौरी लंकेश (Gauri Lankesh) की हत्या के एक मुख्य आरोपी के दो रिश्तेदारों के बीच फोन कॉल में हुई बातचीत में कर्नाटक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को एक अन्य हाई-प्रोफाइल मामले में उसके शामिल होने के अहम सबूत मिले थे. यह हाई प्रोफाइल मामला था बुद्धिजीवी एमएम कलबुर्गी (MM Kalburgi) की हत्‍या का. पुलिस ने आरोपी के रिश्‍तेदार की कॉल को इंटरसेप्‍ट किया था.

कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार जुलाई 2018 में 28 साल के गणेश मिस्किन की गिरफ्तारी के तुरंत बाद, उसके दो करीबी रिश्तेदारों ने फोन पर मिस्किन की गिरफ्तारी के संबंध में बातचीत की थी. इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक गणेश मिस्किन ही वह शख्‍स था जो मोटरसाइकिल से लंकेश के कथित हत्यारे परशुराम वाघमोरे को उसके घर तक ले गया था. कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार उसके दो रिश्‍तेदारों में से एक रवि मिस्किन फोन पर कथित तौर पर एक 'अंकल' से बता कर रहा था. उसने उन्‍हें बताया कि उसका बड़ा भाई गणेश दो हत्याओं में शामिल था. फोन पर हुई इस बातचीत की रिकॉर्डिंग को कलबुर्गी मामले में चार्जश्‍सीट के साथ सबूत के रूप में रखा गया है ताकि दोनों मामलों में मिस्किन के शामिल होने की बात पर जोर दिया जा सके.

गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी की हत्‍या के बीच 190 सेकंड की कॉल रिकॉर्डिंग ने किसी तरह कड़ी जोड़ने में मदद की, यह शुरू हुआ 22 जुलाई 2018 को 11:51 बजे. मिस्किन के भाई ने कथित तौर पर कहा कि गणेश मिस्किन और उसके सहयोगी वहां पर एक हत्या और एक अन्य हत्या में शामिल थे. इसके बाद 'अंकल' ने पूछा तो वे दो हत्याओं में शामिल हैं, है ना?" जवाब मिला हां. रिकॉर्ड्स के मुताबिक जिस दिन हुबली में मिस्किन और उसके दोस्त अमित बद्दी को एसआईटी ने पकड़ा था, उसी दिन यह कॉल हुई थी. कलबुर्गी हत्‍या मामले में सबूत के के रूप में एसआईटी ने कानूनी तौर पर इंटरसेप्ट किए गए फोन की तकनीकी रूप से पुष्टि के लिए मिस्किन के दो रिश्तेदारों की आवाज के सैंपल का आपस में मिलान भी किया.



गौरी लंकेश की हत्‍या 5 सितंबर 2017 को हुई. एमएम कलबुर्गी की हत्‍या 30 अगस्‍त 2015 को हुई. ऐसे में कर्नाटक स्‍टेट फॉरेंसिक साइंस लैब की बैलिस्टिक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि दोनों हत्‍याओं में कुछ संबंध है. यह सब संभव हुआ था उसी 190 सेकंड की कॉल इंटरसेप्‍ट के जरिये. इसने एसआईटी को मामले में नए सुराग दिए.
गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी की हत्‍या मामलों में एसआईटी की जांच में कट्टरपंथी हिंदुत्व समूह सनातन संस्था से जुड़े कार्यकर्ताओं के समूह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई. कोरोना महामारी के कारण दोनों ही केस के ट्रायल में देरी हो रही है. लंकेश हत्याकांड में 18 नवंबर 2018 को दायर चार्जशीट में एसआईटी ने 18 लोगों को नामजद किया था, जिनमें मिस्किन और अन्य लोग भी शामिल थे. इसका संबंध सनातन संस्था और अन्य कट्टरपंथी समूहों से था.

वहीं कलबुर्गी हत्‍या मामले में छह लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिन्‍हें 2019 में बुद्धिजीवी की विधवा उमादेवी की याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी द्वारा जांच के लिए लिया गया था. अगस्त 2019 में दायर चार्जशीट में मिस्किन को आरोपी शूटर और बेलगावी निवासी प्रवीण प्रकाश चतुर को मोटरसाइकिल के सवार के रूप में नामजद किया गया है, जो उसे कलबुर्गी के घर ले गया था.

एसआईटी के अनुसार अगस्त 2015 में सनातन संस्‍था से जुड़े युवाओं के नेता अमोल काले ने कलबुर्गी की हत्‍या की साजिश रची और उसे अंजाम तक पहुंचाया. एसआईटी ने पाया कि ये युवा कथित तौर पर संस्था द्वारा प्रकाशित 'क्षत्र धर्म साधना' नामक पुस्तक से प्रेरित थे. यह 'हिंदू काफिरों' की हत्या के लिए कहती है. एसआईटी के मुताबिक जनवरी और मई 2015 के बीच अमोल काले, गणेश मिस्किन और प्रवीण चतुर ने हुबली के इंदिरा गांधी ग्लासहाउस के पास कई बार मुलाकात की और एमएम कलबुर्गी की हत्या की योजना बनाई. गणेश मिस्किन को कलबुर्गी को गोली मारने और हत्‍या करने का काम दिया गया था. प्रवीण चतुर को बाइक चलाकर मिस्किन को कलबुर्गी के घर तक से ले जाने का काम सौंपा गया था.

एसआईटी ने जांच में यह भी पाया कि कलबुर्गी के कथित हत्यारों और अन्य लोगों के लिए एक प्रशिक्षण शिविर अगस्त 2015 की शुरुआत में दक्षिण कन्नड़ क्षेत्र में धर्मस्थल के पास एक रबर प्लांटेशन में आयोजित किया गया था. इसमें दो गेस्ट ट्रेनर्स भी थे. चार्जशीट के अनुसार, कलबुर्गी को संस्‍था से जुड़े युवाओं ने मारा था. ऐसा 9 जून 2014 को कर्नाटक में अंधविश्वास पर रोक लगाने के लिए एक कानून पर बहस के दौरान दिए गए भाषण को जिम्‍मेदार बताया गया. इस भाषण के बाद कलबुर्गी को ये लोग दुर्जन मानने लगे थे.

लंकेश और कलबुर्गी हत्‍या मामलों की जांच में 20 अगस्त, 2013 को पुणे में हुई नरेंद्र दाभोलकर की हत्या और 16 फरवरी, 2015 को कोल्हापुर में हुई गोविंद पंसारे की हत्‍या के संबंध में भी खुलासे हुए. बैलिस्टिक सबूतों से पता चला है कि चार हत्याएं कट्टरपंथी समूह से जुड़े युवाओं द्वारा इस्तेमाल की गई दो 7.65 मिमी की बंदूकें से की गई थीं. लंकेश और कलबुर्गी मामलों के मुख्य आरोपियों में से एक काले ने अब कोविड संकट और जेलों की भीड़ का हवाला देते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है.
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