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एचपी पर 100 साल पुरानी आफत का खतरा

उत्तराखंड में आसमानी सुनामी ने सबकुछ तबाह कर दिया। लेकिन अब प्राकृतिक आपदा का खतरा हिमाचल प्रदेश पर मंडरा रहा है।

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    चंडीगढ़। उत्तराखंड में आसमानी सुनामी ने सबकुछ तबाह कर दिया। लेकिन अब प्राकृतिक आपदा का खतरा हिमाचल प्रदेश पर मंडरा रहा है। इस पहाड़ी राज्य में जमीन के नीचे होने वाली उधल पुछल कभी भी तबाही मचा सकती है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिट यानि एनडीएमए ने हिमाचल प्रदेश सरकार को भूकंप के बड़े खतरे से आगाह किया है। एनडीएमए ने चेतावनी दी है कि हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला, सुंदरनगर और धरमशाला में कभी भी भूकंप के जोरदार झटके आ सकते हैं। यही नहीं हिमाचल में पिघलने वाली ग्लेशियर से बनने वाली झीले भी बड़ी आपदा की दस्तक दे रही हैं। आईबीएन7 की खास रिपोर्ट।

    नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की माने तो हिमाचल पर भूकंप का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। राज्य सरकार और एनडीएमए के अफसरों के बीच हुई बैठक में ये बड़ी चिंता जाहिर की गई। एनडीएमए ने चेतावनी दी कि राजधानी शिमला, सुंदर नगर और धरमशाला पर भूकंप का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ये इलाके भूकंप के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाके में आते हैं। खतरे को भांपते हुए हिमाचल सरकार ने भी लोगों से चौकन्ना रहने के लिए कहा है।

    हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव सुद्रिप्तो रॉय का कहना है कि सरकार अपनी तरफ से तो स्थिती से निपटने के लिए तैयार है। लेकिन जनता को भी इस बाबत चौकन्ना रहना बेहद ज़रूरी होगा। मुख्य सचिव ने कहा की नेशनल डीजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी के साथ हुई बैठक के दौरान ये बात भी सामने आई हैं।

    एनडीएमए का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में हर पचास साल में एक बार बड़ा भूकंप जरूर आता है। लेकिन इस बार 111 साल हो गए लेकिन ऐसा कोई भूकंप इस राज्य में नहीं आया। पिछला भूकंप 1905 में कांगड़ा में आया था। इस भूकंप ने अकेले कांगड़ा जिले में 20000 लोगों की जान ले ले थी।

    राज्य पर दूसरा बड़ा खतरा ग्लेशियर से पिघलने वाली झीले हैं। एनडीएमए की माने तो हिमाचल के उपरी इलाके में इस वक्त 11 ऐसी झीले हैं जो कभी भी टूट सकती हैं। और ये पहले से मौजूद नदियों और नालों में मिलकर भारी तबाही मचा सकती हैं।

    हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव सुद्रिप्तो रॉय का कहना है कि हमें झीलों के खतरे के बारे में भी आगाह रहने को कहा गया है।

    इंसान ने विकास के नाम पर प्रकृति से जो बिना सोचे समझे खिलवाड़ किया है ये उसका नतीजा है। भू वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमाचल में भूकंप हजारों सालों से आ रहा है। झीले भी हजारों सालों से बनती बिगड़ती रहती हैं। लेकिन 20 से 30 साल पहले खतरा इतना बड़ा नहीं था जितना अब है।

    भू वैज्ञानिक प्रो एडी आहूवालिया का कहना है कि हिमाचल में तो एसा होता रहा है लेकिन हम खुद ही अब इन हादसों के रास्तों के बीच बैठ गए है तो इनकी चपेट में आना लाजमी है।

    सवाल ये है कि आखिर अब हिमाचल सरकार इंसानों की जान और अपने पहाड़ों को कैसे बचाएगी। एनडीएमए के साथ बैठक के बाद राज्य सरकार ज्यादा आबादी वाले इलाकों में भवन निर्माण के कानूनों को कड़ा करने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन इस विचार को वो कब तक धरातल पर पहुंचा पाएगी ये कोई नहीं जानता।

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