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किसकी बनेगी सरकार? देखें आज रात 8 बजे

किसकी बनेगी सरकार? देखें आज रात 8 बजे

आज रात आठ बजे प्रसारित होगा इस खास सर्वे का आखिरी एपिसोड। इसमें हम सर्वे में शामिल किए गए सभी सीटों पर राजनीतिक दलों की स्थिति बताएंगे।

    नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में करीब एक साल का फासला है। लेकिन देश की जनता का मूड भांपने के लिए आईबीएन7 – सीएसडीएस ने विशेष सर्वे ‘अगर अभी चुनाव हों तो’ कराया जिसमें कई दिलचस्प तथ्य सामने आए। आईबीएन7 ने 22 जुलाई से ये खास कार्यक्रम आपको दिखाया और बताया कि देश की जनता का मूड फिलहाल क्या है।

    आज रात आठ बजे प्रसारित होगा इस खास सर्वे का आखिरी एपिसोड। इसमें हम सर्वे में शामिल किए गए सभी सीटों पर राजनीतिक दलों की स्थिति बताएंगे। बताएंगे कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और बीजेपी के नरेंद्र मोदी की पीएम उम्मीदवारी पर जनता का क्या रुख है।

    राहुल बनाम मोदी का मुकाबला कितनी टक्कर का है? कांग्रेस या बीजेपी कौन संभालेगा देश की सत्ता? नीतीश, माया, ममता, मुलायम, जयाललिता क्या किरदार निभाएंगे दिल्ली की सत्ता में? इन तमाम सवालों के जवाब के लिए देखिए आईबीएन7 पर खास कार्यक्रम ‘अगर अभी चुनाव हों तो’ आज रात आठ बजे। इस दौरान शो में बेहतरीन विश्लेषक मौजूद रहेंगे जो विस्तार से सर्वे के नतीजों पर अपनी राय देंगे।

    हमने अपने सर्वे में विभिन्न मुद्दों को उठाया और 18 राज्यों की 267 लोकसभा सीटों पर 19 हजार लोगों से बात की। क्या रहा अब तक के सर्वे का नतीजा पढ़ें-

    बिहार
    सर्वे के मुताबिक बीजेपी से सत्ताधारी जेडीयू के तलाक के बाद नीतीश की लोकप्रियता में 9 फीसदी की कमी आई है। जबकि बीजेपी नेता सुशील मोदी की लोकप्रियता 6 फीसदी बढ़ी है। बिहार में 57 फीसदी लोग ये मान रहे हैं कि बिहार में भ्रष्टाचार बढ़ा है। अगर अभी चुनाव हुए तो बीजेपी को 8-12 जबकि जेडीयू को 15-19 सीटें मिल सकती हैं। लालू के खाते में 8-12 सीटें आ सकती हैं। जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में उन्हें सिर्फ 4 सीटों से संतोष करना पड़ा था। आरजेडी को 5 फीसदी वोटों का सीधा फायदा मिलता नजर आ रहा है।

    महाराष्ट्र
    अगर अभी चुनाव हों तो महाराष्ट्र की 48 सीटों में से कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को 23 से 27 सीटें मिलती दिख रही है, जबकि बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को 18 से 22 सीटें मिलती दिख रही हैं। सर्वे में सवाल पूछा था क्या कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन जारी रहना चाहिए। 35 फीसदी लोगों ने कहा हां, जबकि 20 फीसदी कहते हैं ना, 45 फीसदी वोटर कोई राय जाहिर नहीं कर सके। वोटर से हमारा सवाल था कौन है बाल ठाकरे का असली राजनीतिक वारिस? सिर्फ 18 फीसदी ही मानते हैं कि उद्धव ठाकरे हैं बाला साहब के राजनीति वारिस, 48 फीसदी ने राज ठाकरे के नाम पर लगाई मोहर। 15 फीसदी दोनों को उनका राजनीतिक वारिस मानते हैं, जबकि 2 फीसदी का कहना है कि दोनों ही इस लायक नहीं। 17 फीसदी की इस मामले में कोई राय ही नहीं है।

    गुजरात
    गुजरात में अगर अभी चुनाव हों तो किसको कितनी सीटें मिलेंगी, ये सर्वे में सबसे बड़ा मुद्दा था। गुजरात की 26 सीटों में से कांग्रेस को जहां सिर्फ 2 से 6 सीटें मिलती नजर आ रही हैं, वहीं बीजेपी को 20 से 24 सीटें, जबकि अन्य को कोई सीट नहीं मिल रही। मोदी को पीएम उम्मीदवार के तौर पर पेश करना सही है, ये सवाल गुजरात में भी पूछा और पूरे देश में भी, गुजरात में 49 फीसदी लोगों ने कहा हां, 24 फीसदी ने कहा ना जबकि 27 फीसदी की कोई राय ही नहीं। जबकि देश भर में 41 फीसदी ने कहा हां, 22 फीसदी ने कहा ना और 37 फीसदी की कोई राय नहीं थी।

    सवाल ये भी कि मोदी अगर पीएम बन जाते हैं तो कौन बनेगा गुजरात का मुख्यमंत्री, 9 फीसदी ने कहा अमित शाह तो, 7 फीसदी ने कहा आनंदी बेन पटेल, 4 फीसदी ने कहा केशुभाई पटेल तो 2 फीसदी ने कहा शंकर सिंह वाघेला, 10 फीसदी ने अलग-अलग नेताओं के नाम लिया तो 61 फीसदी कोई राय जाहिर नहीं कर पाए।
    कर्नाटक
    एक्सक्लूसिव सर्वे के नतीजे बताते हैं कि कर्नाटक में फायदा कांग्रेस को हो रहा है। कांग्रेस को 18 से 22 सीट हासिल होने की उम्मीद है। लेकिन बीजेपी को येदुरप्पा के साथ छोड़ने का नुकसान हो रहा है। कांग्रेस को कर्नाटक में 47 फीसदी वोट मिल रहे हैं और 9 फीसदी वोटों का फायदा है। बीजेपी को 20 फीसदी वोट मिल रहे हैं और 22 फीसदी का नुकसान हो रहा है। जेडीएस को मिल रहे हैं 15 फीसदी वोट और 2 फीसदी का फायदा है। जबकि अन्य को 18 फीसदी वोट मिल रहे हैं और उन्हें 11 फीसदी का फायदा है।
    जहां तक सीटों का सवाल है कर्नाटक में कांग्रेस को 18 से 22 सीटें मिल रही हैं। बीजेपी को 2 से 6 सीटें मिल रही हैं जबकि जेडीएस को 2 से 6 सीटें मिल रही हैं। जाहिर है कर्नाटक में बीजेपी इस नुकसान की भरपाई चाहती है। इसीलिए बीजेपी कर्नाटक में येदुरप्पा के वापसी की सुगबुगाहट है।

    आंध्र प्रदेश
    उधऱ, आंध्र प्रदेश में कांग्रेस दो तरफ संकट से जूझ रही है। अगर अभी हों चुनाव तो कांग्रेस को 11 से 15 सीटें मिल रही हैं। बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिल रही तो जगन की वाईएसआर कांग्रेस को 11 से 15 सीटें मिल रही हैं। तेलुगुदेशम को 6 से 10 सीटें मिल रही हैं तो तेलंगाना राष्ट्र समिति को 5 से 9 सीटें मिलेंगी। बाकियों को 4 सीटें मिलने के आसार हैं। तेलंगाना मुद्दे का कितना असर होगा इस पर 55 फीसदी लोगों ने कहा हां, जबकि 42 फीसदी ने ना।

    लोकप्रिय नेता कौन- 25 फीसदी ने कहा जगन रेड्डी, तो 17 फीसदी ने कहा चंद्रबाबू नायडू, 12 फीसदी ने कहा के चंद्रशेखर राव तो 8 फीसदी की निगाह में किरन रेड्डी लोकप्रिय हैं। 16 फीसदी लोगों की पसंद अन्य नेता हैं।

    तमिलनाडु
    तमिलनाडु में अगर अभी हों चुनाव तो किसको होगा कितना फायदा। सर्वे के मुताबिक बाजी जयललिता के हाथ में है और शायद बीजेपी भी खाता खोले। कांग्रेस को 1 से 5 सीटें मिल रही हैं तो शायद बीजेपी को भी 2 सीटें मिल जाएं। डीएमके को 8 से 12 सीटें मिल रही हैं तो जयललिता की अन्ना डीएमके को 16 से 20 सीटें मिल रही हैं। अन्य को 4 से 10 सीटें मिलेंगी। जयललिता के इस फायदे को एनडीए के फायदे की तरह देखा जा रहा है क्योंकि वो इनदिनो नरेंद्र मोदी की स्वाभाविक मित्र मानी जा रही हैं। जयललिता सरकार करुणानिधि से बेहतर हैं? इस पर 43 फीसदी ने कहा हां जबकि 26 फीसदी ने कहा ना। जबकि 7 फीसदी ने दोनों को अच्छा बताया। 11 फीसदी दोनों को बुरा बताते हैं तो 13 फीसदी की कोई राय नहीं है।

    उत्तर प्रदेश
    सर्वे कहता है कि भारत के दिल माने जाने वाले इस प्रदेश में बीजेपी अपनी लोकसभा सीटें तीन गुनी तक बढ़ा सकती है। जबकि मुलायम की समाजवादी पार्टी हो या मायावती की बीएसपी, किसी को भी फायदा नहीं मिलने जा रहा है। वहीं कांग्रेस को भी ग्रहण लग सकता है। नरेंद्र मोदी के मोदित्व में डूबी इस पार्टी को 27 फीसदी वोट मिल सकते हैं। पिछली बार के मुकाबले 9 फीसदी ज्यादा वोट।

    वहीं राज्य में मौजूदा सरकार चला रही समाजवादी पार्टी को 22 फीसदी वोट मिल सकते हैं। पिछली बार के मुकाबले 1 फीसदी कम। मायावती की बीएसपी को भी 21 फीसदी तक वोट नसीब हो सकते हैं। ये वोट भी पिछली बार के मुकाबले 1 फीसदी कम हैं। प्रदेश में दोबारा खड़ा होने की पुरजोर कोशिश में लगी कांग्रेस 16 फीसदी वोट पा सकती है। पिछली बार पार्टी को 2 फीसदी ज्यादा वोट मिले थे।

    हमारे सर्वे के मुताबिक अगर अभी चुनाव हों तो बीजेपी उत्तर प्रदेश में 29 से 33 सीटें तक जीत सकती है। 2009 की 10 सीटों के मुकाबले पार्टी तीन गुना ज्यादा सीटें जीत सकती हैं। वहीं सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी को 17 से 21 सीटें तक मिल सकती हैं। 2009 में पार्टी को प्रदेश से 22 लोकसभा सीटें हासिल हुई थीं, यानि नुकसान। बीएसपी का हाथी 14-18 सीटें झटक सकता है, जबकि पिछली बार उसे 20 सीटें मिली थीं, यानि नुकसान। कांग्रेस को सिर्फ 11 से 15 सीटें मिलने के आसार हैं, जबकि पिछले आम चुनाव में राहुल गांधी के ताकत लगाने से पार्टी को 22 सीटें मिली थीं, यानि तगड़ा नुकसान। आरएलडी को 2 सीटें मिल सकती हैं। पिछली बार पार्टी का खाता तक नहीं खुला था।

    समाजवादी पार्टी का जलवा-जलाल ढलान पर आ सकता है। 26 फीसदी लोग ही अखिलेश सरकार को बेहतर मान रहे हैं। जबकि 29 फीसदी का कहना है कि माया सरकार बेहतर है। लेकिन मुलायम के लिए अच्छी खबर ये है कि 46 फीसदी मुस्लिम अखिलेश सरकार से संतुष्ट हैं तो अन्य पिछड़ा वर्ग के 30 फीसदी वोटर भी राज्य सरकार से संतुष्ट हैं।

    राजस्थान
    कांग्रेस को राजस्थान में 44 फीसदी वोट मिल रहे हैं और पिछली बार के मुकाबले उसे 3 फीसदी का नुकसान है। बीजेपी को 44 फीसदी वोट मिल रहे हैं और उसे 7 फीसदी का फायदा हो रहा है। बीएसपी को राजस्थान में 3 फीसदी वोट मिल रहे हैं और ये न फायदा है न नुकसान। जबकि बाकियों के हिस्से 9 फीसदी वोट जा रहे हैं और उसे 4 फीसदी का नुकसान है।

    इस वोट शेयर के आधार पर जो तस्वीर बनती हैं उसके मुताबिक कांग्रेस को राजस्थान में 10 से 14 सीटें ही मिल रही हैं, जबकि 2009 में उसे मिली थीं 20 सीटें। बीजेपी को भी इतनी ही सीटें मिलती दिख रही हैं जबकि 2009 में उसे सिर्फ 4 सीटें मिली थीं। जाहिर है बीजेपी को राजस्थान में भी बड़ा फायदा होता दिख रहा है।

    इस खास सर्वे में राजस्थान के वोटरों से पूछा वसुंधरा और गहलोत में किसकी सरकार को मानते हैं बेहतर। आम वोटरों की बात करें तो 29 फीसदी गहलोत सरकार को बेहतर मानते हैं तो 35 फीसदी वसुंधरा सरकार को। वसुंधरा जाट समुदाय से आती हैं तो वहां 43 फीसदी वसुंधरा के पक्ष में हैं। गुर्जरों में भी वो गहलोत के मुकाबले ज्यादा मजबूत हैं वहां 21 और 38 का अनुपात है। मुसलमानों और अनुसूचित जाति में जरूर गहलोत का ग्राफ वसुंधरा से ऊपर है 42 फीसदी मुसलमान और 35 फीसदी अनुसूचित जातियां उनके पक्ष में हैं।

    मध्य प्रदेश
    आईबीएन7 और सीएसडीएस का सर्वे बताता है कि मध्यप्रदेश में शिवराज का झंडा बुलंद है। 75 फीसदी मतदाता शिवराज सरकार से खुश हैं और अगर अभी लोकसभा चुनाव हो जायें तो बीजेपी को 21 से 25 सीटें मिल सकती हैं। जबकि कांग्रेस का आंकड़ा ज्यादा से ज्यादा छह सीटों तक पहुंच सकता है। सर्वे से ये भी साबित होता है कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के आगे नरेंद्र मोदी की चमक फीकी है।

    दरअसल विवादों से दूर, आम घर से आया और आम आदमी की चिंता करने वाला राजनेता यानी शिवराज सिंह चौहान। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री चौहान की ये छवि लोकसभा चुनाव में भी गुल खिला सकती है। आईबीएन7 और सीएसडीएस का सर्वे बताता है कि वे लोगों का दिल जीतने में कामयाब हुए हैं। अगर अभी लोकसभा चुनाव हों तो मध्य प्रदेश में बीजेपी को 50 फीसदी वोट मिल सकते हैं। जो पिछले चुनाव से सात फीसदी ज्यादा हैं। वहीं कांग्रेस के वोटों में करीब 8 फीसदी की कमी आई है। उसे सिर्फ 32 फीसदी लोगों का समर्थन हासिल होगा। बीएसपी को भी छह फीसदी वोट मिल सकते हैं।

    सर्वे में शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र मोदी की तुलना से जुड़ा सवाल भी पूछा गया। सवाल था कि क्या शिवराज मोदी से बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे। जवाब में 28 फीसदी आम मतदाताओं ने नरेंद्र मोदी तो 49 फीसदी ने शिवराज सिंह चौहान को प्रधानमंत्री के तौर पर बेहतर बताया। वहीं 36 फीसदी बीजेपी समर्थकों ने नरेंद्र मोदी तो 51 फीसदी ने शिवराज सिंह चौहान को बेहतर बताया।

    उधर, 8 फीसदी आम मतदाताओं ने दोनों को बेहतर बताया तो 9 फीसदी बीजेपी समर्थकों ने भी दोनों को बेहतर बताया। लेकिन आम मतदाताओं के 5 फीसदी और बीजेपी समर्थकों में एक फीसदी ने दोनों को ही प्रधानमंत्री पद के लायक नहीं माना। 11 फीसदी आम मतदाताओं और 3 फीसदी बीजेपी समर्थक मतदाताओं की इस पर कोई राय नहीं है। साफ है कि शिवराज सिंह चौहान का जादू मध्य प्रदेश के मतदाताओं पर बरकरार है। खास बात ये कि शिवराज के इस जादू के आगे मोदी की चमक भी फीकी नजर आ रही है।


    Tags: Ibn7, Narendra modi, बिहार

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