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1993 मुंबई बम धमाकों के दोषी अब्दुल गनी की नागपुर में मौत

News18Hindi
Updated: April 25, 2019, 5:02 PM IST
1993 मुंबई बम धमाकों के दोषी अब्दुल गनी की नागपुर में मौत
फाइल फोटो.

12 मार्च 1993 के दिन देश की मायानगरी दहल उठी थी. 13 सीरियल धमाकों ने इस शहर को हिलाकर रख दिया था.

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  • Last Updated: April 25, 2019, 5:02 PM IST
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1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी अब्दुल गनी तुर्क की बुधवार को नागपुर में मौत हो गई. अब्दुल गनी महाराष्ट्र के नागपुर की सेंट्रल जेल में बंद था. उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे नागपुर के जीएमसी अस्पताल लाया गया था. सामाचार एजेंसी एएनआई के एक ट्वीट के अनुसार अस्पताल में उसकी मौत हो गई. उल्लेखनीय है कि मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को पहले ही फांसी दी जा चुकी है. जबकि मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है.

12 मार्च 1993 के दिन देश की मायानगरी दहल उठी थी. 13 सीरियल धमाकों ने इस शहर को हिलाकर रख दिया था. 12 मार्च, 1993 को तेज रफ्तार से दौड़ती मुंबई को अचानक ब्रेक लग गया था. बांबे स्टॉक एक्सचेंज की इमारत एकदम से हिल गई थी और लोगों ने एक कान फोड़ देने वाला पहला धमाका सुना. फिर यह सिलसिला रुका नहीं, एक के बाद एक 13 धमाके हुए और मुंबई ही नहीं पूरा देश दहल उठा था. मुंबई पर आतंक ने हमला बोल दिया था.

इस वक्त पर हुए धमाके
पहला धमाका-दोपहर 1.30 बजे, मुंबई स्टॉक एक्सचेंज



दूसरा धमाका-दोपहर 2.15 बजे, नरसी नाथ स्ट्रीट


तीसरा धमाका-दोपहर 2.30 बजे, शिव सेना भवन
चौथा धमाका-दोपहर 2.33 बजे,एयर इंडिया बिल्डिंग
पांचवा धमाका-दोपहर 2.45 बजे,सेंचुरी बाज़ार
छठा धमाका-दोपहर 2.45 बजे, माहिम
सातवां धमाका-दोपहर 3.05 बजे,झावेरी बाज़ार
आठवां धमाका-दोपहर 3.10 बजे,सी रॉक होटल
नौवां धमाका-दोपहर 3.13 बजे,प्लाजा सिनेमा
दसवां धमाका-दोपहर 3.20 बजे,जुहू सेंटूर होटल
ग्यारवां धमाका-दोपहर 3.30 बजे,सहार हवाई अड्डा
बारहवां धमाका-दोपहर 3.40 बजे,एयरपोर्ट सेंटूर होटल

19 नवंबर 1993 में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था. 19 अप्रैल 1995 को मुंबई की टाडा अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई थी. अगले दो महीनों में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे. अक्टूबर 2000 में सभी अभियोग पक्ष के गवाहों के बयान समाप्त हुए थे. अक्टूबर 2001 में अभियोग पक्ष ने अपनी दलील खत्म की थी. सितंबर 2003 में मामले की सुनवाई समाप्त हुई थी, सितंबर 2006 में अदालत ने अपने फैसले देने शुरू किए.

इस सीरियल ब्लास्ट में करीब 27 करोड़ रुपए की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था. इसके बाद इस मामले की छानबीन शुरू हुई. सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित की गई. पुलिस ने तकरीबन दस हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की और लगभग 686 गवाहों को पेश किया. ये आंकड़े इतना बताने के लिए काफी हैं कि इन धमाकों में संलिप्तता कितनी गहरी थी. देश की आजादी के बाद अदालत में जितने भी मामले दर्ज हुए हैं, ये उनमें से सबसे संगीन और पेचींदा माना जाता है. इस मामले का मुख्य आरोपी घोषित किया गया अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम कासकर, जो आज भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है. इंटरपोल के जरिए दाऊद इब्राहिम के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया लेकिन आज भी उस तक दुनिया की कोई भी पुलिस नहीं पहुंच पाई.

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First published: April 25, 2019, 5:01 PM IST
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