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2.5 लाख गांवों को डिजिटल बनाएगी भारतनेट, 19000 करोड़ रुपये की मदद से मिला बल

भारतनेट परियोजन बढ़ेगी आगे. (File pic)

भारतनेट परियोजन बढ़ेगी आगे. (File pic)

Digital India: ये दुनिया का सबसे बड़ा ग्रामीण संचार तंत्र (कनेक्टिविटी) कार्यक्रम है और मोदी सरकार की डिजिटल इंडिया (Di ...अधिक पढ़ें

    नई दिल्‍ली. केंद्र की महत्वाकांक्षी भारतनेट परियोजना (Bharatnet) में केंद्रीय वित्त मंत्री ने फिर से जान फूंक दी है. वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने इस परियोजना को 19 हज़ार करोड़ की नगद मदद देने की घोषणा की है. ये दुनिया का सबसे बड़ा ग्रामीण संचार तंत्र (कनेक्टिविटी) कार्यक्रम है और मोदी सरकार की डिजिटल इंडिया (Digital India) पहल में एक अहम बिंदु है, जिसका लक्ष्य भारत को डिजिटल तौर पर सशक्त समाज की श्रेणी में लाना है. आखिर क्या है भारतनेट परियोजना. आइये जानते हैं...

    क्या है भारतनेट परियोजना
    भारतनेट परियोजना भारत की 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में लाने का कार्यक्रम है. इस परियोजना को भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड अमलीजामा पहना रहा है. यही संस्था देश के कोने-कोने में नेटवर्क पहुंचाने में सरकार का विशेष संचार माध्यम बनेगा. इसके जरिये ग्रामीण प्रशासन प्राथमिक स्तर पर ही कई सुविधाओं जैसे टेली-मेडिसिन, टेली-एजूकेशन, ई-हेल्थ और ई-एंटरटेनमेंट का इस्तेमाल कर पाएगा.

    डिजिटल इंडिया पोर्टल के मुताबिक इससे ग्रामीण भारत के करीब 60 करोड़ लोग सूचना तंत्र से जुड़ पाएंगे और ग्राम पंचायत स्तर से लेकर स्कूल, पंचायत दफ्तर, पोस्ट ऑफिस सभी एक दूसरे के संपर्क में आ जाएंगे. इसके जरिये सभी के लिए इंटरनेट सुविधा मिल सके ये सुनिश्चित हो पाएगा. कोरोना काल के बाद जिस तरह से आर्थिक और सामाजिक स्तर पर डिजिटिल क्रांति की जरूरत ज्यादा महसूस की जा रही है. ऐसे में सरकार का मुख्य उद्देश्य इस परियोजना के जरिये ग्रामीण भारत में ब्राडबैंड का इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना है, जिससे इंटरनेट की दिक्कतों से निजात पाई जा सके. भारतनेट परियोजना के जरिये केंद्र का लक्ष्य भारत के अंतिम कोने तक वाई-फाई के जरिये कनेक्टिविटी चालू करवाना है. इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों में वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जाएंगे.

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    आर्थिक मदद कौन करेगा, क्या होगा बजट?
    वित्त मंत्रालय ने भारतनेट परियोजना में जो नगद संचार किया है, उसके बाद इसका बजट करीब 61 हज़ार करोड़ हो गया है. सरकार के मुताबिक, भारतनेट परियोजना के लिए फंड एक साथ दिया जाएगा ना कि इसे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के आधार पर आवंटित किया जाएगा. एकमुश्त राशि यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) से भारतनेट परियोजना को दी जाएगी.

    केंद्र के जरिये दूसरी टेलीकॉम कंपनियों से ग्रामीण और दूररदाज के इलाकों में संचार सुविधा विकसित करने के लिए जो धन एकत्र किया जाता है उसे यूएसओएफ का नाम दिया गया है.

    कहां तक पहुंची परियोजना
    इस साल के मई तक 1.56 लाख कुल ग्राम पंचायत में भारत नेट सर्विस चालू कर दी गई है. केंद्र ने लोकसभा में मार्च में बताया था कि ये परियोजना इस साल अगस्त तक पूरी कर दी जाएगी. हालांकि कोरोना और लॉकडाउन की वजह से काम की गति पर फर्क पड़ा है और ये समय सीमा आगे बढ़ गई है. केंद्र ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि ये परियोजना काफी बड़ी है और ग्राम पंचायत देशभर में फैली हुई है, इसलिए इस काम में वक्त लगेगा लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं ये परियोजना जल्दी से जल्दी पूरी हो सके.

    इस साल मार्च में केंद्र ने संसद में बताया था कि 5 लाख किलोमीटर से ज्यादा ऑप्टिकल फाइबर केबल इस परियोजना के तहत बिछाई जा चुकी है. उन्होंने ये भी कहा कि सैटेलाइट के जरिये ब्रॉडबैंड 5200 ग्राम पंचायत (दूरदराज और पहाड़ी इलाके भी शामिल) में उपलब्ध कराया जाएगा. इनमें से 3600 सुविधा उठाने के लिए तैयार भी हो चुकी हैं.

    किस राज्य में सबसे ज्यादा ग्राम पंचायत हुईं शामिल
    मार्च में लोकसभा जो आंकड़े साझा किए गए हैं. उसके अनुसार उत्तर प्रदेश में 31,300 ग्राम पंचायत सहित उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, वहीं इसके बाद महाराष्ट्र 19000 और मध्य प्रदेश 15000 ग्राम पंचायत के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं. ये वो ग्राम पंचायत हैं जो भारतनेट परियोजना की सुविधा उठाने को तैयार हैं.

    Tags: Digital India, Narendra modi

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