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जस्‍टिस गोगोई से पहले भी ये 2 पूर्व प्रधान न्‍यायाधीश जा चुके हैं राज्‍यसभा

जस्‍टिस गोगोई से पहले भी ये 2 पूर्व प्रधान न्‍यायाधीश जा चुके हैं राज्‍यसभा

पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया था

पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया था

इससे पहले भी दो पूर्व सीजेआई राज्‍यसभा भेजे जा चुके हैं. ऐसा 1998 में जस्टिस रंगनाथ मिश्रा और 1983 में जस्टिस बहरुल इस्लाम के साथ हुआ था.

    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (supreme court) के पूर्व जस्टिस कुरियन जोसफ सहित पूर्व न्यायाधीशों ने पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) के राज्यसभा में नामांकन की कड़ी आलोचना की और कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद पद लेना न्यायपालिका की स्वतंत्रता को ‘कमतर’ करता है.

    जोसफ ने गोगोई और दो अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों जे चेलमेश्वर और मदन बी लोकुर (अब सभी सेवानिवृत्त) के साथ 12 जनवरी 2018 को संवाददाता सम्मेलन करके तत्कालीन सीजेआई के तहत उच्चतम न्यायालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे. जोसफ ने कहा कि गोगोई ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता के 'सिद्धांतों से समझौता' किया है.

    जस्टिस लोकुर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'कुछ समय से अटकलें लगाई जा रही थीं कि न्यायमूर्ति गोगोई को क्या सम्मान मिलेगा. उस अर्थ में नामांकन आश्चर्यजनक नहीं है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि यह इतनी जल्दी आ गया. यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और अखंडता को फिर से परिभाषित करता है. क्या आखिरी गढ़ गिर गया है?'

    पूर्व जस्टिस रंजन गोगोई अपने रिटायरमेंट के बाद राज्‍यसभा के लिए नामांकित होने वाले पहले पूर्व जस्टिस नहीं हैं. उनका कार्यकाल 13 महीने का था. इससे पहले भी दो पूर्व सीजेआई राज्‍यसभा भेजे जा चुके हैं. ऐसा 1998 में जस्टिस रंगनाथ मिश्रा और 1983 में जस्टिस बहरुल इस्लाम के साथ हुआ था.

    जस्टिस बहरुल इस्लाम का कार्यकाल ठंडा रहा था. वह जनवरी 1983 में CJI के पद से सेवानिवृत्त हुए थे और जून 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था. उन्होंने इससे पहले 1962 और 1972 तक लगातार दो बार असम से राज्यसभा सांसद के रूप में भी काम किया था. न्यायमूर्ति इस्लाम को राज्यसभा सांसद के रूप में अपना तीसरा कार्यकाल मिला जब उन्होंने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को शहरी सहकारी बैंक घोटाले में सभी आरोप से मुक्त कर दिया.

    जस्टिस रंगनाथ मिश्रा नवंबर 1991 में CJI के पद से सेवानिवृत्त हुए और 1998 में राज्यसभा की एक सीट पर कांग्रेस के टिकट पर उन्हें वोट दिया गया. हालांकि उस समय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली बीजेपी सत्ता में थी. जस्टिस मिश्रा वही शख्स थे, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज रहते हुए 1985 में 1984 सिख विरोधी दंगों में जांच आयोग का नेतृत्व और संकलन किया था.

    न्यायमूर्ति मिश्रा ने पुलिस की भूमिका मामलों के पंजीकरण और हत्याओं की कुल संख्या निर्धारित करने के लिए तीन और समितियों के गठन की सिफारिश की थी. उनकी रिपोर्ट ने राजीव गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एचकेएल भगत को क्लीन चिट दी थी और पुलिस की निष्क्रियता का कोई विशेष कारण नहीं पाया.

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    Tags: Justice Ranjan Gogoi, Rajya sabha

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