कोरोना से उबरने के छह महीने बाद ही 20-30 फीसदी लोगों ने गंवाई प्राकृतिक इम्‍युनिटी, दोबारा संक्रमण का खतरा- शोध

देश में बढ़ रहे हैं कोरोना वायरस संक्रमण के मामले. (Pic- AP)

देश में बढ़ रहे हैं कोरोना वायरस संक्रमण के मामले. (Pic- AP)

Coronavirus: यह शोध काफी महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि इससे यह जाना जा सकता है कि आखिर देश में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर कब तक रहेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 11, 2021, 8:35 AM IST
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नई दिल्‍ली. देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामलों में दिनोंदिन तेजी देखने को मिल रही है. कई शहरों में हालात बेकाबू हैं. इस बीच कोरोना के टीकाकरण (Covid 19 Vaccine) का अभियान भी तेजी से बढ़ रहा है. लोगों के मन में इस संबंध एक सवाल यह भी आता है कि कितने लंबे समय के लिए कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ प्राकृतिक इम्‍युनिटी बनी रहती है.

इंस्‍टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्‍स एंड इंटिग्रेटिव बायोलॉजी (IGIB) की ओर से किए गए एक अध्‍ययन में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस के खिलाफ प्राकृतिक इम्‍युनिटी बनी रहती है. लेकिन कुल संक्रमितों में से 20 से 30 फीसदी लोगों ने 6 महीने के बाद इस प्राकृतिक इम्‍युनिटी को गंवा दिया है.

आईजीआईबी के डायरेक्‍टर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने एक ट्वीट में कहा, 'अध्‍ययन में पाया गया कि 20 से 30 फीसदी लोगों के शरीर में वायरस को बेअसर करने की प्रक्रिया खत्‍म होने लगी. ऐसा तब हुआ जब वे सीरोपॉजिटिव थे.' डॉ. अग्रवाल का कहना है कि 6 महीने का यह अध्‍ययन इस बात का पता लगाने में सहायक होगा कि आखिर क्‍यों मुंबई जैसे शहरों में अधिक सीरोपॉजिटिविटी होने के कारण भी संक्रमण से राहत क्‍यों नहीं मिल रही है.

यह शोध काफी महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि इससे यह जाना जा सकता है कि आखिर देश में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर कब तक रहेगी. यह वैक्‍सीन के महत्‍व को भी दर्शाता है. शोध अभी भी जारी है. लेकिन मौजूदा समय में कई ऐसी वैक्‍सीन हैं जो संक्रमणों से लड़ने और मौत से बचाने में महत्‍वपूर्ण मानी जाती हैं.


शोधकर्ताओं का कहना है कि इस शोध से यह जानने में मदद मिलेगी कि दिल्‍ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में लोगों के शरीर में अधिक सीरोपॉजिटिविटी होने के बावजूद कोरोना के अधिक केस क्‍यों आ रहे हैं. आईजीआईबी के वरिष्‍ठ वैज्ञानिक डॉ. शांतनू सेन गुप्‍ता ने बताया, 'सितंबर में हमने सीएसआईआर की लैब में सीरो सर्वे किया था. इसमें सिर्फ 10 फीसदी प्रतिभागियों में ही वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी मिली थीं. हमने इस पर 3 से 6 महीने तक निगरानी रखी और जांच की.'
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