कोटकपूरा गोलीकांड: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी पंजाब सरकार, तैयार की SLP

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह. (पीटीआई फाइल फोटो)

2015 Kotkapura Firing Case: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने कोटकपूरा गोलीबारी केस में पंजाब की SIT जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया था. ये गोलीबारी सिख प्रदर्शनकारियों पर हुई थी, जो धर्म ग्रंथ की कथित बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे.

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    चंडीगढ़. पंजाब सरकार कोटकपूरा गोलीकांड (2015 Kotkapura Firing Case) को लेकर हाईकोर्ट के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी. सरकार ने इसके लिए विशेष अनुमति याचिका (SLP) तैयार कर ली है. बता दें कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस साल अप्रैल में पंजाब पुलिस के विशेष जांच दल (SIT) द्वारा कोटकपूरा गोलीकांड को लेकर पेश की गई जांच रिपोर्ट को रद्द कर दिया था. अदालत ने राज्य सरकार को मामले में दोबारा एसआईटी गठित करने को कहा था. हाई कोर्ट ने तत्कालीन आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह को शामिल नहीं करने का भी निर्देश दिया था.

    अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दखल के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है. इस मुद्दे पर महाधिवक्ता अतुल नंदा और गृह सचिव अनुराग अग्रवाल के बीच नोकझोंक हुई थी और फाइल एक ऑफिस से सिर्फ दूसरे ऑफिस में जा रही थी. SLP दाखिल करने पर अंतिम फैसला लेने के लिए सरकार को पहले ही तीन महीने हो चुके हैं.

    सरकार की दलील
    अखबार ने सूत्रों के हवाले से ये लिखा है कि सरकार ने SLP में ये दलील दी है कि हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र को पार करते हुए जांच को रद्द कर दिया, जबकि ट्रायल कोर्ट में अभी ट्रायल शुरू हुआ था. इसके अलावा, सरकार ने एक ये भी दलील दी है कि इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह द्वारा दायर याचिका पर खारिज करने के आदेश आए थे, जिन्होंने मामले में हाई कोर्ट में खुद के लिए राहत मांगी थी.



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    SLP को लेकर फंसा है पेंच
    बता दें कि SLP हाईकोर्ट के आदेश के तीन महीनों के बाद दायर की जाती है. इस मामले में कोर्ट ने 9 अप्रैल को आदेश दिया था. जबकि 3 महीने की समयसीमा खत्म हो गई है. ऐसे में सरकार ये दलील दे सकती है कि उन्हें आदेश की कॉपी 22 अप्रैल को मिली. लिहाज़ा उन्हें SLP फ़ाइल करने की इजाजत दी जाए.

    क्या है पूरा मामला?
    फरीदकोट में 2015 में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी और इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस गोलीबारी की घटना हुई थी. उस वक्त प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री थे. गुरु ग्रंथ साहिब के पन्ने बिखरे पाए जाने के बाद कोटकपूरा में विरोध प्रदर्शन हुआ था.

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