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2016 के जेएनयू देशद्रोह मामले ने DUSU चुनाव के मुद्दाें पर भी डाला असर

देश के बड़े राजनीतिक दल दिल्‍ली यूनिवर्सिटी की कैंपस कम्‍युनिटी में मौजूदगी के जरिये डूसू चुनाव में जुटे स्‍टूडेंट्स का उत्‍साह बढ़ा रहे हैं.

देश के बड़े राजनीतिक दल दिल्‍ली यूनिवर्सिटी की कैंपस कम्‍युनिटी में मौजूदगी के जरिये डूसू चुनाव में जुटे स्‍टूडेंट्स का उत्‍साह बढ़ा रहे हैं.

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्‍व वाली बीजेपी (BJP) सरकार बनने के बाद पार्टी की छात्र इकाई अखिल भारतीय विश्‍व परिषद (ABVP) ने पांच में से चार बार डूसू (DUSU) के अध्‍यक्ष पद पर कब्‍जा किया.

  • News18Hindi
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    करन आनंद
    नई दिल्‍ली.
    देश का सबसे बड़ा केंद्रीय विश्‍वविद्यालय दिल्‍ली यूनिवर्सिटी स्‍टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के लिए सालाना चुनाव करा रहा है. हर साल होने वाले इन चुनावों में स्‍टूडेंट्स का जोश कई गुना बढ़ा हुआ होता है. विश्‍वविद्यालय मेट्रो स्‍टेशन पर उतरते ही आपको इसकी बानगी मिल जाएगी. हर तरफ दीवारों और सड़क पर चुनावी पोस्‍टर्स नजर आ जाएंगे. देश के बड़े राजनीतिक दल (National Political Parties) कैंपस कम्‍युनिटी में मौजूदगी के जरिये स्‍टूडेंट्स का उत्‍साह बढ़ा रहे हैं.

    कई बड़े नेताओं के सियासी सफर को डूसू चुनाव से मिली रफ्तार
    यूनिवर्सिटी कैंपस में हर तरफ स्‍टूडेंट्स की गरमा-गरम बहस हो रही हैं. स्‍टूडेंट्स की चर्चा में किसको वोट दें, किसकी जीतने की सबसे ज्‍यादा उम्‍मीद है और चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) की सॉफ्ट लैंडिंग क्‍यों नहीं हो सकी जैसे मुद्दे सुनाई दे रहे हैं. अरुण जेटली (Arun Jaitley), विजय गोयल (Vijay Goel) और अजय माकन (Ajay Makan) जैसे कद्दावर नेताओं के सियासी सफर को डूसू चुनावों से नई दिशा मिली थी. इसलिए इसे सबसे अहम स्‍टूडेंट बॉडी इलेक्‍शन माना जाता है. कुछ लोगों का मानना है कि डूसू चुनाव से देश के सियासी रुझान की झलक भी मिलती है.

    राष्‍ट्रीय मुद्दों से प्रभावित नजर आ रहा है स्‍टूडेंट्स का रुख
    2014 में नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्‍व में बीजेपी (BJP) को मिली जबरदस्‍त जीत के बाद पार्टी की स्‍टूडेंट विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पांच में चार बार डूसू अध्‍यक्ष पद पर कब्‍जा किया है. इस बार दिल्‍ली विश्‍यवविद्याल के छात्रों का रुख राष्‍ट्रीय मुद्दों से प्रभावित नजर आ रहा है. इससे कैंपस का माहौल कहीं ज्‍यादा सियासी हो गया है. बीते पांच साल में देश के सियासी माहौल का दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय की छात्र राजनीति पर बहुत असर हुआ है. इससे पहले तक कैंपस की राजनीति अंदरूनी मुद्दों के इर्दगिर्द घूमती थी. अब यूनिवर्सिटी की सियासत राष्‍ट्रीय दलों के प्रति झुकाव के आधार पर बंट गई है.

    कश्‍मीर और चंद्रयान के नाम पर वोट मांग रही है एबीवीपी
    डूसू चुनाव में 2014 के बाद कैंपस से बाहर के मुद्दे अंदरूनी मसलों पर हावी हो गए हैं. कैंपस रैलियों में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नाम की गूंज सुनी जा सकती है. इस बार एबीवीपी स्‍टूडेंट्स से कश्‍मीर (Kashmir) और चंद्रयान के नाम पर वोट मांग रही है. यूनिवर्सिटी में एम.फिल (M.Phil) के छात्र अमित्रजीत मुखर्जी ने कहा कि डूसू चुनाव केंद्र सरकार के कामकाज पर मतसंग्रह की तरह देखा जा रहा है. मुखर्जी 2013 से डीयू कैंपस में रह रहे हैं. उनके मुताबिक, कांग्रेस (Congress) की छात्र इकाई नेशन स्‍टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) एबीवीपी के पीछे-पीछे चलते हुए उसी के उठाए मुद्दों पर चर्चा की रही है.

    जेएनयू प्रकरण के बाद बदल गई देश की छात्र राजनीति
    मुखर्जी का मानना है कि 2016 में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के स्‍टूडेंट्स यूनियन प्रेसिडेंट कन्‍हैया कुमार समेत तीन लोगों पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया. इसके बाद से देश की छात्र राजनीति बदल गई. अचानक आपका सियासी झुकाव अहम हो गया है. जेएनयू प्रकरण से पहले तक ज्‍यादा स्‍टूडेंट्स राजनीति को लेकर उदासीन थे, लेकिन उसके बाद छात्र राजनीति बड़ी जंग में तब्‍दील हो गई. हालांकि, स्‍टूडेंट्स के राजनीति में ज्‍यादा रुचि लेने से कैंपस में रैगिंग एकदम कम हो गई है.

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