गौरी लंकेश केस: हथियार ढूंढने के मिशन इंपॉसिबल में जुटी पुलिस, खर्च होंगे सवा दो करोड़ रुपये

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Updated: September 3, 2019, 9:05 AM IST
गौरी लंकेश केस: हथियार ढूंढने के मिशन इंपॉसिबल में जुटी पुलिस, खर्च होंगे सवा दो करोड़ रुपये
गौरी लंकेश

हथियार की खोज इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि ये चार हत्याओं में ये एक प्रमुख कड़ी है. ये हत्याएं महाराष्ट्र (Maharashtra) में नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे, कर्नाटक (Karnataka) में गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी की हुई थीं.

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वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश (Gauri Lankesh) की हत्या के करीब दो साल बाद एसआईटी (Special Investigation Team, SIT) इस्तेमाल किए गए हथियार को खोजने के लिए एक खास मिशन शुरू करेगी. अब तक की जांच में यही एकमात्र सबूत मिलना बाकी है. हत्या में इस्तेमाल किए गए 7.65 मिमी-कैलिबर की देसी पिस्तौल की खोज मुंबई के पास वसई नाले में बारिश और बाढ़ के थम जाने के बाद की जाएगी. इस खास मिशन की लागत 2.2 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. कर्नाटक और महाराष्ट्र पुलिस इस खास मिशन के लिए आने वाली लागत को 30:70 के अनुपात में साझा करेंगे. उन्हें उम्मीद है कि इससे मामले की जांच में एक भी सबूत की कमी नहीं रहेगी. मामले में अब तक कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

पुलिस बलों को उस खास इलाके में ड्रेजिंग के काम को करने के लिए विशेषज्ञों को नियुक्त करना होगा, जहां से उन्हें पता चले कि पिस्तौल कहां से फेंकी गई थी. उनका मानना ​​है कि इसे एक पुल से फेंका गया था, जो इस साल मानसून के दौरान गहरे डूब गई होगी. हथियार की खोज इसलिए जरूरी है, क्योंकि चार हत्याओं में ये एक प्रमुख कड़ी है. ये हत्याएं महाराष्ट्र में नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे, कर्नाटक में गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी की हुई थीं.

हथियार से जुड़ती है चार हत्याओं की कड़ी
लंकेश और कलबुर्गी हत्याकांड की जांच कर रही एसआईटी पहले ही मिले सबूतों के आधार पर स्थापित कर चुकी है कि बरामद की गई गोलियां एक ही हथियार से दागी गई थीं. 5 सितंबर, 2017 को लंकेश की हत्या कर दी गई थी, जबकि प्रो. कलबुर्गी की अगस्त 2015 में हत्या कर दी गई थी. इस्तेमाल किए गए हथियार की कड़ियां 2015 में वामपंथी विचारक गोविंद पानसरे और 2013 में तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की हत्याओं से भी जुड़ती हैं. हथियार इन सभी बिंदुओं को जोड़ने के लिए सबूत को और ज्यादा पक्का करने वाला होगा. इस मामले के एक आरोपी शरद कलस्कर के बयानों के आधार पर उसकी तलाश की जा रही है.

एक जैसा था चारों मामलों में हत्याओं का तरीका
सभी चार मामलों में हत्याओं का तौर-तरीका एक जैसा था. इन चारों को उनकी विचारधारा या दक्षिणपंथ के खिलाफ रुख के लिए अलग-अलग मामलों में गोली मार दी गई थी. सभी की हत्या में बाइक का इस्तेमाल किया गया था. सभी चारों हत्याओं को कथित रूप से सनातन संस्था से जुड़े लोगों द्वारा अंजाम दिया गया था. चार मामलों के आरोपी एक-दूसरे के परिचित भी हैं. गणेश मिस्किन, जो लंकेश मामले में अभियुक्त नंबर 9 है और कलबुर्गी मामले में उस पर गोली चलाने का संदेह है. जबकि बाइक कथित तौर पर दूसरा आरोपी प्रवीण चतुर चला रहा था. 27 साल का चतुर लंकेश मामले में एक अहम गवाह है. वह एक थिएटर में पद्मावत की स्क्रीनिंग पर किए गए पेट्रोल बम हमले के मामले में भी आरोपी है.

हथियार को खोजना मुश्किल है पर एसआईटी कोई तथ्य नहीं छोड़ना चाहती
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हथियार की खोज करना असंभव जैसा है. क्योंकि शहर में पिछले दो वर्षों में काफी बारिश हुई है. खासकर उन इलाकों में जहां उसे फेंके जाने का दावा है. लेकिन जांचकर्ता अपनी तरफ से हर संभव कोशिश कर रहे हैं. वे इस खास सबूत को छोड़ना नहीं चाहते हैं. जबकि लंकेश मामले में आरोपपत्र पहले ही दायर किया जा चुका है. बहुत जल्द कलबुर्गी मामले में आरोपपत्र दायर किया जाएगा. एसआईटी अपने पास मौजूद सबूतों को लेकर आश्वस्त है. लेकिन हथियार खोजने से उनकी जांच को मजबूती मिलेगी.

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First published: September 3, 2019, 9:01 AM IST
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