आसान नहीं है बीजेपी के लिए 2019 की चुनावी जंग

मोदी बीजेपी के लिए एक ऐसा तुरुप का इक्का है जिसने अकेले ही बीजेपी को 2014 की सत्ता हासिल करवाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी.

News18.com
Updated: April 15, 2018, 2:33 PM IST
आसान नहीं है बीजेपी के लिए 2019 की चुनावी जंग
पीएम मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी
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Updated: April 15, 2018, 2:33 PM IST
(वेंकटेश केसरी)

2019 लोकसभा चुनावों के लिए मंच तैयार है. सभी अहम राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी चुनावी रणनीतियां बनानी शुरु कर दी है. विपक्ष ने भी प्रधानमंत्री मोदी को उनकी अगली पारी के लिए चुनौति दे दी है जिससे 2019 के लिए विपक्षी दलों की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

गोरखपुर और फूलपुर उप-चुनावों के नतीजों ने भी बीजेपी की एकल-विकल्प की छवि पर गहरी चोट की है. गुजरात में कांग्रेस की मज़बूत वापसी के बाद कर्नाटक चुनाव भी बीजेपी के लिए आसान नहीं है. राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री मोदी के लिए 2014 की राह मुश्किल होने का बात कह डाली. हालांकि राहुल गांधी का ये बयान कांग्रेस के आत्मविश्वास को दर्शाता है.

मोदी बीजेपी के लिए एक ऐसा तुरुप का इक्का है जिसने अकेले ही बीजेपी को 2014 की सत्ता हासिल करवाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी. लेकिन फिलहाल सत्ताधारी अपने खुद के ही जाल में फंसते नज़र आ रहे हैं. उन्नाव रेप केस और दलित आंदोलन के बाद सरकारी व्यवस्थाओं पर बार-बार सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं.

बजट सेशन में बार-बार आने वाली रुकावटों के बावजूद पीएम मोदी की चुप्पी बहुत गैर-जिम्मेदाराना रही, जबकि संसद के दोनों सदनों में सेशन बिना रुकावट के लगातार चलता रहे इस बात की जिम्मेदारी सरकार की ही होती है.ऐसे में सरकार को इस बात की जिम्मेदारी लेनी होगी कि ये सब उनके शासन में कमी की वजह से ही हो रहा है.

बीजेपी शानदार चुनावी जीतों को अच्छे शासन में तब्दील करने में असफल नज़र आ रही है जिसका सीधा-सीधा फायदा कांग्रेस पार्टी को मिल रहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सोशल मीडिया के ज़रिए लगभग हर मु्द्दे पर प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा निशाना साध रहें है. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बैनर्जी , टीडीपी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे भी पीएम मोदी और उनके शासन पर सीधा-सीधा प्रहार करते हैं. दूसरी तरफ अन्य विपक्षी दल जैसे मायावती, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव इत्यादि बड़े पैमाने पर एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ लड़ने की तैयारी में हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार, यूनियन मिनिस्टर राम विलास पासवान इत्यादि बीजेपी की सहयोगी पार्टियां होने के बावजूद विपक्ष से लड़ने में अपनी भूमिका तलाश नहीं कर पा रही है.

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस अपने दम पर राहुल गांदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजराज, हरियाणा, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और आसाम में बीजेपी को हराने में सक्षम है? ये सभी राज्य मिलकर लोकसभा में  150 सदस्य भेजते हैं. कांग्रेस के मुताबिक एंटी इकंमबेंसी, कास्ट कॉम्बीनेशन और प्री-पोस्ट गठबंधन मिलकर कांग्रेस को सत्ता दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं.

(लेखक के निजी विचार)
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