किंवदंतीः अश्वत्थामा की वजह से आते हैं तूफान!

इंसान ने जब से बड़े समुद्री तूफानों का लेखा-जोखा रखना शुरू किया है, तब से अब तक आया सबसे बड़ा चक्रवात बंगाल की खाड़ी में ही 1970 में आया था।

इंसान ने जब से बड़े समुद्री तूफानों का लेखा-जोखा रखना शुरू किया है, तब से अब तक आया सबसे बड़ा चक्रवात बंगाल की खाड़ी में ही 1970 में आया था।

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    नई दिल्ली। इंसान ने जब से बड़े समुद्री तूफानों का लेखा-जोखा रखना शुरू किया है, तब से अब तक आया सबसे बड़ा चक्रवात बंगाल की खाड़ी में ही 1970 में आया था। ये भोला तूफान था जिसकी वजह से बांग्लादेश में 5 लाख लोगों ने जान गंवाई थी। यही नहीं इतिहास के सबसे भयंकर 35 चक्रवाती तूफानों में से 26 तूफान अकेले बंगाल की खाड़ी में आए हैं। इसीलिए पाइलीन को लेकर भी भारी तबाही की आशंका है। 1971 में भारतीय सेना और बांग्लादेश के लिए लड़े मुक्तिवाहनी लड़ाकों की ताकत ने पाकिस्तान को सबसे करारी शिकस्त दी। बांग्लादेश का जन्म हुआ लेकिन इस कहानी की शुरुआत उस तूफान से हुई थी, जिसे आज भी दुनिया का सबसे भयंकर तूफान माना जाता है।

    11 नवंबर 1970: दुनिया के सबसे भयंकर तूफान भोला की वजह से हुई थी 5 लाख लोगों की मौत। पूर्व पाकिस्तान और भारत के पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्से में बंगाल की खाड़ी से उठे भोला तूफान ने इतनी तबाही मचाई कि इसे आज भी दुनिया का सबसे भयंकर तूफान माना जाता है। तूफान में देर से शुरू हुए और अधूरे राहत कार्य की वजह से पाकिस्तानी तानाशाह जनरल याह्या खान की इंटरनेशनल मीडिया में जमकर आलोचना हुई। पश्चिमी पाकिस्तान के दबदबे के प्रति आक्रोश ने चुनाव में आवामी लीग को भारी जीत दिलाई। पाकिस्तान ने बांग्लाभाषियों का दमन शुरू कर दिया। इसका नतीजा भारत-पाकिस्तान की जंग से निकला। भोला तूफान दुनिया के नक्शे पर एक नए मुल्क के जन्म की वजह भी बन गया।

    1999-उड़ीसा में तूफानः बंगाल की खाड़ी में पिछला सबसे भयंकर तूफान 25 अक्टूबर 1999 का उड़ीसा चक्रवात था, ये तूफान भी पाइलीन की तरह कैटेगरी-5 दर्जे का था। तूफान का असर तट से 20 किलोमीटर भीतर तक पड़ा। सबसे भयंकर तबाही जगतसिंह पुरा जिले में हुई। 8 मीटर ऊंची समुद्री लहरें अपने साथ सबकुछ बहा ले गईं। 10 हजार से ज्यादा लोग मारे गए।

    1991-बांग्लादेश में तूफानः 29 अप्रैल 1991 में बांग्लादेश में 250 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ चक्रवात आया। छह मीटर ऊंची लहरों के साथ इसने चिटगांव में सबसे ज्यादा तबाही मचाई। इस तूफान में 1 लाख 38 हजार लोग मारे गए। एक करोड़ लोग बेघर हो गए, जबकि ये महज कैटेगरी-4 के स्तर का ही तूफान था।

    2008-म्यांमार में तूफानः 27 अप्रैल 2008 को म्यांमार में आए नर्गिस तूफान में भी करीब 1 लाख 38 हजार लोग मारे गए। कैटेगरी-4 स्तर का ये तूफान 215 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल रही हवा के साथ आया था।

    1977-आंध्र प्रदेश में तूफानः 1977 में 19 नवंबर के दिन आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में आए तूफान ने भी जबरदस्त तबाही ढाई थी। इस तूफान में करीब 10 हजार लोग मारे गए थे जबकि करीब 50 लाख लोग प्रभावित हुए थे। बंगाल की खाड़ी से उठने वाले ऐसे ही तूफानों की वजह से पाइलीन को लेकर भारत में चिंता है।

    इतिहास के सबसे भयंकर 35 चक्रवाती तूफानों में से 26 तूफान अकेले बंगाल की खाड़ी में आए हैं। किवदंती है कि जब अश्वत्थामा और अर्जुन ने एक दूसरे पर ब्रह्मास्त्र चलाया तो ऋषियों की प्रार्थना पर अर्जुन ने अपना अस्र वापस ले लिया। लेकिन अश्वात्थामा ने अपना ब्रह्मास्त्र अभिमन्यु की विधवा उत्तरा की कोख की तरफ मोड़ दिया। कृष्ण ने भ्रूण को तो बचा लिया। लेकिन अश्वत्थामा को 6 हजार साल तक भटकने का शाप दिया। कहते हैं तब से अश्वत्थामा उड़ीसा के तटीय इलाके में शिव की पूजा करता है और बंगाल की खाड़ी में चक्रवात लाता है। पिछले तीन दशक में बंगाल की खाड़ी से कई भयंकर तूफान उठे हैं।

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