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कोल घोटाले में कुमार मंगलम बिड़ला पर भी FIR

कोयला घोटाले के सिलसिले में अब मशहूर उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।
कोयला घोटाले के सिलसिले में अब मशहूर उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।

कोयला घोटाले के सिलसिले में अब मशहूर उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।

  • News18India
  • Last Updated: October 15, 2013, 4:41 PM IST
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नई दिल्ली। कोयला घोटाले के सिलसिले में अब मशहूर उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। सीबीआई की ओर से सोमवार की देर रात दर्ज कराई गई एफआईआर में आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन की हैसियत से उन्हें भी आरोपी बनाया गया है। हालांकि कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उसने सभी नियम कानूनों का पूरी तरह से पालन किया है। वैसे सीबीआई की एफआईआर में पूर्व कोयला सचिव पी सी पारिख का भी नाम है। ये पहली बार है जब किसी बड़े अफसर को कोयला घोटाले में नामजद किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट से लगातार मिल रही फटकार के बाद जागी सीबीआई ने कोयला आवंटन घोटाले में कार्रवाई तेज कर दी है। इस सिलसिले में सीबीआई ने सोमवार रात 14वीं एफआईआर दर्ज की। साथ ही मंगलवार को दिल्ली, भुवनेश्वर, मुंबई और हैदराबाद में छापेमारी भी की। इस एफआईआर में साल 2005 में हुए आवंटनों के मामले हैं। इस एफआईआर में सीबीआई ने पूर्व कोयला सचिव पी सी पारिख को पहली बार नामजद किया है। उनके अलावा आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला का नाम भी इस एफआईआर में है।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक पूर्व कोल सचिव पीसी पारिख की भूमिका पर सीबीआई को ना केवल 2005 में हुए आवंटनों में बल्कि दूसरे आवंटनों में भी शक है। जल्द ही सीबीआई कुमारमंगलम और आदित्य बिड़ला के साथ-साथ पीसी पारिख को पूछताछ के लिए बुला सकती है।



उधर, आदित्य बिड़ला ग्रुप की ओर से कहा गया है कि उन्हें एफआईआर के बारे में जानकारी नहीं है। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक चौदहवीं एफआईआर, उड़ीसा के जासुकुडा जिले में मौजूद तालाबिरा-2 ब्लॉक आवंटन के सिलसिले में है। कंपनियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। सीबीआई कोयला आवंटन से जुड़ी फाइलों के लापता होने के मामले में भी जल्द ही एफआईआर दर्ज कर सकती है।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक कोल ब्लॉक की लापता फाइलों के मामले में कोल मंत्रालय के कई अधिकारियों पर भी शक है। यही वजह है कि सीबीआई ने इस मामले में पूर्व कोल सचिव पीसी पारिख से पूछताछ करने के बाद मामला दर्ज करने का फैसला किया है।

गौरतलब है कि सीबीआई को 1993 से 2005 और 2006 से 2009 के बीच आवंटित कोयला खंडों से जुड़ीं करीब 130 अहम फाइलें नहीं मिली हैं। इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर कोयला मंत्रालय के करीब दर्जन भर अफसरों से पूछताछ की है। इसके अलावा सीबीआई के चार अफसरों ने कोयला मंत्रालय जाकर फाइलों के रखरखाव से जुड़ी जानकारी भी ली है।



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