अपना शहर चुनें

States

PM को खुला खत 'देश को आपकी मदद चाहिए'

हम इस वक्त उस हालात में हैं जहां उद्योग जगत के बड़े चेहरों और रिटायर्ड अफसरों पर आधी-अधूरी जानकारियों, कमजोर तथ्यों और निष्कर्षों के सहारे केस किया जा रहा है।
हम इस वक्त उस हालात में हैं जहां उद्योग जगत के बड़े चेहरों और रिटायर्ड अफसरों पर आधी-अधूरी जानकारियों, कमजोर तथ्यों और निष्कर्षों के सहारे केस किया जा रहा है।

हम इस वक्त उस हालात में हैं जहां उद्योग जगत के बड़े चेहरों और रिटायर्ड अफसरों पर आधी-अधूरी जानकारियों, कमजोर तथ्यों और निष्कर्षों के सहारे केस किया जा रहा है।

  • News18India
  • Last Updated: October 25, 2013, 10:36 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली। कोयला घोटाले में देश के प्रमुख उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला के खिलाफ सीबीआई की एफआईआर ने वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम को चिंता में डाल दिया है। एसोचैम ने पीएम के नाम एक खुली चिट्ठी लिखकर कड़े शब्दों में अपनी नाराजगी जताई है।
अखबारों में विज्ञापन देकर एसोचैम ने आरोप लगाया है कि उद्योगपतियों पर बेहद कमजोर केस थोपे जा रहे हैं। एसोचैम ने कहा है कि सरकार का काम सिर्फ नियम बनाना नहीं बल्कि उद्योगों को भी बढ़ावा देना है। एसोचैम ने प्रधानमंत्री को उनके पुराने वायदे की याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि अर्थव्यवस्था की जड़ को मजबूत किया जाएगा।
एसोचैम ने लिखा है कि-हम इस वक्त उस हालात में हैं जहां उद्योग जगत के बड़े चेहरों और रिटायर्ड अफसरों पर आधी-अधूरी जानकारियों, कमजोर तथ्यों और निष्कर्षों के सहारे केस किया जा रहा है। उद्योग जगत का भरोसा वापस लौटाने के लिए देश को आपकी मदद चाहिए। हमें डर है कि अगर अविश्वास का ये माहौल बना रहा तो फैसले लेने की प्रक्रिया को और नुकसान होगा।
इस बीच पूर्व कोयला सचिव पी सी पारख की एक चिट्ठी भी सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाली है। पारख ने ये चिट्ठी साल 2005 में कोयला सचिव रहते उस वक्त के कैबिनेट सचिव को लिखी थी। इस चिट्ठी में कोयला मंत्रालय पर गंभीर सवाल खड़े किए गए थे। पारख ने आरोप लगाया था कि कोयला मंत्रालय को माफिया चला रहे हैं। गौरतलब है कि उस वक्त के कोयला मंत्री शिबू सोरेन ने पारख पर नेताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था। सोरन इस बात से भी नाराज थे कि पारख उनके मौखिक आदेश नहीं मानते थे।
कैबिनेट सचिव को 2005 में लिखी चिट्ठी में पारख ने कहा था कि मौजूदा सिस्टम में कोल माफिया को संरक्षण देकर बड़े पैमाने पर कालाबाजारी के जरिए काला धन पैदा किया जा रहा है। मुझे खेद है कि जो सांसद संविधान की शपथ लेते हैं वो आईएएस अफसरों और सार्वजनिक निगमों के अफसरो को अपनी जरूरतों के लिए ब्लैकमेल करने में लगे हुए हैं। ये देश का दुर्भाग्य है कि देश में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जो ऐसे नेताओं की गलत हरकतों पर लगाम लगा सके।
2005 में लिखी चिट्ठी सामने आने के बाद पी सी पारख ने फिर कहा है कि अब भी सिस्टम में बहुत बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता में कमी के चलते अपराध बढ़ रहा है और देश में अब भी कई कोयला खदानें ऐसी हैं जहां देश के हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
पारख ने ये चिट्ठी तत्कालीन कैबिनेट सचिव बी के चतुर्वेदी को लिखी थी। पारख की चिट्ठी सामने आने के बाद चतुर्वेदी ने पारख को बेहद ईमानदार अफसर बताया और कहा कि उस वक्त सबूतों की कमी के चलते जांच का आदेश नहीं दिया गया था।


पर्व कैबिनेट सचिव टी एस आर सुब्रहमण्यम ने भी पी सी पारख के दावों का समर्थन किया है। टी एस आर ने कहा कि चिट्ठी के बावजूद कोयला माफिया पर कार्रवाई न होने का मतलब है कि सरकार की मंशा साफ नहीं है।


अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज