बीएमसी कंट्रोल रूम के 22 स्टाफ को कोरोना, 26 कर्मचारी रोज संभाल रहे 4000 कॉल

बीएमसी कंट्रोल रूम के 22 स्टाफ को कोरोना, 26 कर्मचारी रोज संभाल रहे 4000 कॉल
महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 50 हजार को पार कर गई है. (file photo)

कोरोना (Corona) मरीजों की जल्द से जल्द मदद करने के लिए बीएमसी (BMC) के आपदा ​प्रबंधन नियंत्रण कक्ष में 48 कर्मचारियों को रखा गया था, जिसमें से अब तक 22 कर्मचारियों में कोरोना हो चुका है.

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मुंबई. चीन (China) से दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण का असर भारत में तेजी से बढ़ रहा है. भारत में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा महाराष्ट्र (Maharashtra) प्रभावित दिख रहा है. महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमितों की संख्या 50 हजार को पार कर गई है. कोरोना (Corona) मरीजों की जल्द से जल्द मदद करने के लिए बीएमसी (BMC) के आपदा ​प्रबंधन नियंत्रण कक्ष में 48 कर्मचारियों को रखा गया था, जिसमें से अब तक 22 कर्मचारियों में कोरोना हो चुका है. महामारी संकट के इस दौर में अब हेल्प डेस्क पर केवल 26 लोग ही बचे हैं. बताया जाता है इन लोगों को हर दिन 4000 से अधिक कॉल देखनी पड़ रही हैं, जिसके कारण सभी कर्मचारी काफी तनाव में हैं.

बीएमसी का आपदा ​प्रबंधन नियंत्रण कक्ष बीएमसी मुख्यालय की दूसरी मंजिल पर स्थि​त है. इस नियंत्रण कक्ष से ही पूरे राज्य में कोरोना मरीजों तक मदद पहुंचाने का काम किया जा रहा है. मरीजों को एम्बुलेंस मुहैया कराना, अस्पतालों में बेड ​की स्थिति की जानकारी रखना और सं​बंधित अस्पताल से बात कर मरीजों को हर मुमकिन मदद देना, यहां तक की कोविड 19 से जुड़े सवालों के जवाब भी इसी नियंत्रण कक्ष से दिए जाते हैं.

आपदा प्रबंधन विभाग से जुड़े अधिकारी महेश नारवेकर ने बताया, 'कोरोना महामारी से पहले हमें एक दिन में लगभग 800 कॉल आया करती थीं लेकिन अब 4000 से अधिक फोन आते हैं. हमारा स्टाफ काफी तनाव में काम कर रहा है. राज्य को अगर कोरोना से हराना है तो हमारी भूमिका काफी अहम हो जाती है.' उन्होंने बताया कि कोरोना की इस जंग में हमारा स्टाफ घटकर आधा हो गया है. कॉल बढ़ती जा रही हैं लेकिन स्टाफ की संख्या कम होती जा रही है.



स्टाफ से जुड़े एक सहायक प्रभारी ने कहा कि वह मंगलवार तक काम कर रहे थे लेकिन अब उन्हें क्वारंटाइन किया गया है. उन्हें पता है कि उनकी गैर मौजूदगी में अन्य स्टाफ का काम बढ़ गया है और वह अब और तनाव में हैं. उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों से हम सभी स्टाफ के लोगों को एक होटल में ठहराया गया है. कोई भी घर नहीं गया था. मैं थोड़ा कमजोर महसूस कर रहा था और सूखी खांसी थी इसलिए मैंने जांच कराना ही उचित समझा. जांच में मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. मुझे बुखार नहीं है इसलिए मुझे विले पार्ले के एक होटल में रखा गया है. मैं होटल में रखकर खुद को दोषी मान रहा हूं. मैं उस दिन का इंतजार कर रहा हूं जब मैं ठीक होकर फिर से काम पर लौट सकूंगा.



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स्टाफ कम होने का असर मरीजों पर पड़ रहा
नियंत्रण कक्ष के एक अन्य कर्मचारी ने बताया कर्मचारी कम होने के साथ हमें लोगों की मदद करने में देरी हो रही है. कर्मचारी ने एक कॉल का जिक्र करते हुए कहा, पांच दिन पहले एक फोन आया, जिसमें लड़के ने बताया कि उसकी मां को कोरोना है. मां को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस चाहिए. दूसरी कॉल पर व्यस्त होने के कारण हमें कॉल लेने में 25 मिनट तक लग गए और एंबुलेंस को उस तक पहुंचने में 1 घंटे से अधिक का समय लग गया. तब तक मरीज की हालत काफी खराब हो चुकी थी. वह बच गई है लेकिन हमें आपना काम करने में काफी समय लग गया.

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आसान नहीं है कंट्रोल रूप में काम करना
महेश नारवेकर ने बताया कि 22 कर्मचारियों को तुरंत बदलना आसान नहीं है. सही व्यक्ति को कॉल करना और अस्पताल में बेड और एम्बुलेंस को ट्रैक करना बहुत की तकनीकी काम है. यह केवल कॉल उठाने का ही काम नहीं है. कंट्रोल रूम में काम करने के लिए डोमेन नॉलेज होना जरूरी है क्योंकि हम भी फॉलो-अप करते हैं. उन्होंने अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों की तुलना हवाई यातायात नियंत्रक से की और कहा कि इस काम में भी गति और सटीकता की आवश्यकता है.

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First published: May 25, 2020, 11:34 AM IST
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