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बोडो उग्रवादी संगठन NDFB की पूरी कुंडली

बोडो उग्रवादी संगठन NDFB की पूरी कुंडली

एनडीएफबी का जाल भारत, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार में फैला हुआ है। कुछ समय पहले भारत के अनुरोध पर भूटान सेना ने भूटान के अंदर NDFB के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई की।

एनडीएफबी का जाल भारत, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार में फैला हुआ है। कुछ समय पहले भारत के अनुरोध पर भूटान सेना ने भूटान के अंदर NDFB के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई की।

एनडीएफबी का जाल भारत, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार में फैला हुआ है। कुछ समय पहले भारत के अनुरोध पर भूटान सेना ने भूटान के अंदर NDFB के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई की।

    असम के तीन जिलों में उग्रवादियों के हमलों में 68 लोगों की हत्या कर दी गई। इन हत्याओं की जिम्मेदारी एनडीएफबी ने ली। क्या है एनडीएफबी ? पढ़ें, इस कुख्यात उग्रवादी संगठन की कुंडली खोलती IBNKhabar की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट...

    नई दिल्ली। एनडीएफबी मतलब नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड एक ऐसा संगठन है जिसका मकसद है असम से बोडो बहुल इलाके को अलग कर एक स्वतंत्र और संप्रभु बोडोलैंड देश की स्थापना। भारत सरकार ने इस ग्रुप को आतंकी गुट की श्रेणी में डाल रखा है। लगभग 28 साल पहले 1986 में बना ये संगठन सामूहिक नरसंहार के लिए कुख्यात है और ऐसे हमलों में वो अब तक हजार से भी ज्यादा लोगों की जान ले चुका है। इस ग्रुप में फिलहाल 1200 के करीब आतंकी हैं, जो अक्सर सुरक्षा बलों और गैर बोडो समुदाय पर हमला करते रहते हैं। एक समय ये संख्या 3500 से ज्यादा थी, लेकिन भारत और भूटानी सुरक्षा बलों के अभियानों और आंतरिक फूट के चलते इसकी ताकत कम हो रही है। जिसकी बौखलाहट में इस संगठन ने अपने हमलों को तेज कर दिया है।

    एनडीएफबी को अघोषित तौर पर चीनी मूल के संगठनों से मदद मिलती है। ये मदद म्यांमार के रास्ते इन तक पहुंचती है। इनकी पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एनडीएफबी का जाल भारत, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार में फैला हुआ है। हालांकि भारत सरकार के अनुरोध पर भूटानी सेना ने भूटान के अंदर से गतिविधियां संचालित कर रहे एनडीएफबी के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई की थी। भूटानी सेना के चलाए ऑपरेशन ऑल क्लियर में एनडीएफबी के कई लड़ाके गिरफ्तार हुए, तो कई मार गिराए गए। भूटानी सेना की इस कार्रवाई के दौरान एनडीएफबी का प्रचार सचिव लापता हो गया था, जिसके बारे में अबतक कोई खबर नहीं है। 2006 में एनडीएफबी और भारत सरकार के बीच संघर्ष विराम का समझौता भी हुआ था, लेकिन ये 6 महीने तक ही चला था क्योंकि एनडीएफबी ने लोगों पर हमले करने की नीति नहीं छोड़ी थी और न ही अपने हथियार डाले थे।

    एनडीएफबी में दो गुटः एनडीएफबी में दो गुट हैं, पहला आईके सांग्बिजित के नेतृत्व में एनडीएफबी(एस)। जो भारत सरकार से वार्ता के पक्ष में है। वहीं, दूसरा धड़ा एनडीएफबी(आर-बी) रंजन डायमरी के नेतृत्व में जो हमेशा से संघर्ष का ही रास्ता अख्तियार करता रहा है। हालांकि पहले दोनों धड़े एक ही थे, लेकिन साल 2012 के बाद से दोनों धड़े अलग हुए हैं। ज्यादातर हमलों के लिए एनडीएफबी(आर-बी) ग्रुप ही जिम्मेदार है।

    नेतृत्व और मददः इस गुट का शीर्ष नेतृत्व बांग्लादेश से चलता है। जिसे म्यांमार और भूटान के रास्ते मदद मिलती है। इस गुट को म्यांमार बेस्ड चिन नेशनल लिबरेशन आर्मी से हथियार मिलते हैं। एनडीएफबी के पूर्वोत्तर के अन्य विद्रोही गुटों से भी घनिष्ट संबंध हैं, जैसे युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम(उल्फा), कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाईजेशन(केएलए), अचिक नेशनल वालंटियर्स काउंसिल(एएनवीसी), जो भारत सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़े हुए हैं।

    प्रतिद्वंद्वी गुटः एनडीएफबी का बोडोलैंड की मांग को लेकर सक्रिय अन्य गुटों से भी संघर्ष होता रहता है। इनमें बोडो लिबरेशन टाइगर्स फोर्स(बीएलटीबी) सबसे प्रमुख है जो कि 2003 में हथियार डाल चुका है। आदिवासी कोबरा फोर्स से भी इसकी तनातनी रहती है। एनडीएफबी के मुस्लिमों पर कई हमलों की वजह से कई मुस्लिम गुटों से भी इसकी तनातनी रही है। इस गुट को ईसाई प्रभुत्व वाला माना जाता है, जिसकी वजह से एनडीएफबी की हिंदू बहुल उग्रवादी संगठन बोडो लिबरेशन टाइगर्स फोर्स(बीएलटीबी) से तनातनी रही है।

    कहां से संचालित होती हैं गतिविधियां: एनडीएफबी की गतिविधियां ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर और उत्तर पश्चिम से संचालित होती हैं। ये गुट असम के बोंगाईगांव, कोकराझार, दर्रांग, बरपेटा, ढुबरी, नलबरी और सोनितपुर जिलों में सक्रिय है। ये गुट मेघालय की गारो पहाड़ियों में भी सक्रिय है। साथ ही भूटान को छिपने की जगह के तौर पर इस्तेमाल करता है। जो मानस राष्ट्रीय उद्यान से होकर भूटान में घुसपैठ करता है। हालांकि भूटानी सेना की कार्रवाई के बाद भूटान से इस गुट को अपना बोरिया बिस्तर समेटने को मजबूर होना पड़ा।

    एनडीएफबी के बड़े हमलेः
    दिसंबर 2014: एनडीएफबी के तीन जिलों में किए गए हमलों में 68 लोग मारे गए। एनडीएफबी ने इन हमलों में आदिवासियों को निशाना बनाया।
    अगस्त 2014: चिरांग जिले में 16 साल की लड़की की बीभत्स तरीके से हत्या। मां-बाप के सामने ही 9 गोलियां मारीं।
    मई 2014 : असम दंगों के दौरान कोकराझार और बक्सा जिलों में 32 मुस्लिमों की हत्या का आरोप, एनडीएफबी ने नकारा।
    मार्च 2011: चिरांग और कोकराझार जिलों के बीच घात लगाकर 8 जवानों की हत्या।
    नवंबर 2010: कई हमलों में 22 लोगों की हत्या। दिसंबर 2014 की तरह एक साथ कई जगहों पर हमला।
    अक्टूबर 2004: ढुबरी जिले के ध्विमगुरी बाजार में अंधाधुंध फायरिंग में 16 लोगों की हत्या, 20 घायल।
    अगस्त 2011: रंगिया के नजदीक अरुणाचल एक्सप्रेस में धमाका किया। 12 की मौत।
    1998-2000 ट्रेनों पर हमले: ट्रेनों पर कई हमलों में एनडीएफबी ने दर्जनों लोगों की हत्याएं की।

    Tags: Bangladesh, India, Myanmar

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